Saturday, May 16, 2020

36 घंटे गेहूं का ढेर ही घर है...ट्रैक्टर के बीच खाना, ट्रालियों पर कपड़ा बांधकर वहीं पर सो गए किसान

चार महीने जिस गेहूं को खून-पसीने से सींचा। अब उन्हें तुलवाने के लिए किसानों को 36 घंटे कतार में लगना पड़ रहा है। जिले का सबसे बड़ा खरीदी केंद्र मानपुर का सायलो है। यहां पर 14 सोसायटियों के पंजीकृत किसानों की उपज तौली जा रही है। शुरुआत 22 अप्रैल से हुई थी। तब दो दिन तक केवल 6-6 किसानों से दो शिफ्टों में गेहूं तुलवाए। किसानों का दबाव बढ़ा तो सरकार को एसएमएस की संख्या बढ़ानी पड़ी। इसके बाद 40 से 45 एसएमएस रोज भेजे जाने लगे। किसान खुश थे। सायलो ने खरीदी का समय 24 घंटे कर दिया। इनके सब के बावजूद किसानों की कतार लंबी होती जा रही है।
शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात को भास्कर टीम ने देवास रोड स्थित हामूखेड़ी के गेट से लेकर सायलो तक भ्रमण किया। किसानों के हाल जाने। इस दौरान 600 ट्रैक्टर ट्रॉली कतार में थी। किसान बोले- उन्हें तो 15 मई को गेहूं तुलवाने के लिए एसएमएस भेजे थे। रात 1.15 बजे तक तो वे सायलो केंद्र से ही दो किलोमीटर दूर खड़े थे। फिर भी उन्हें उम्मीद थी कि शनिवार दोपहर 12 से शाम 5 बजे के बीच उनका नंबर आ जाएगा। व्यवस्था बनाई जा सके इसके लिए सुबह 10 बजे 900 किसानों को टोकन बांटे थे। रात 12 बजे तक पुलिस ने भी मोर्चा संभाला लेकिन उसके बाद व्यवस्था किसानों के हाथों में आ गई।
रात 10.10 बजे सूखी लड़कियां तोड़ी, मच्छरदानी स्टैंड बनाया

जवासिया के अजय पटेल सिंचाई के दौरान कई बार खेत पर ही सोते हैं लेेकिन अाज तक मच्छरदानी का उपयोग नहीं किया। गेहूं तुलवाने के लिए सायलो आए तो आसपास के किसानों ने कहा- बहुत मच्छर है। कुछ इंतजाम करके जाना। घर की मच्छरदानी निकाली और ट्रॉली में रख ली। सुबह 8 बजे से कतार में लगे थे। रात हो गई। सूखे पेड़ के चार डंडे तोड़े और वहीं ट्रॉली पर मच्छरदानी स्टैंड बनाकर सुस्ताने लगे।
ट्रैक्टरों के बीच तिरपाल बिछाकर भोजन रात 10.30 बजे

किसानों को पता है कि एक दिन में नंबर नहीं आएगा। रातड़िया के पद्मसिंह रात 10.30 बजे अपने ट्रैक्टर के सामने ही तिरपाल बिछाकर भोजन करने लगे। पूछने पर बताया कि ट्रैक्टर की कतार लंबी है और ऐसा लगता है कि कल दाेपहर तक ही नंबर आएगा। घर से खाना लाए थे। आखिर कब तक इंतजार करें। तिरपाल बिछाकर पहले भोजन कर लें। उसके बाद जब ट्रॉलियां आगे बढ़ेंगी तो हम भी ट्रैक्टर बढा देंगे।
नंबर आया तो रिजेक्ट हो गईट्रॉली रात 11.15 बजे

गाेठड़ा से आए जीवनसिंह दो दिन से कतार में लगे हैं। घर से लाया खाना खत्म हो गया है। आसपास के किसान भोजन बांट रहे हैं। कहते हैं दो दिन बाद नंबर आया तो खुशी हुई लेकिन जैसे ही गेहूं की सैंपलिंग हुई, ट्रॉली रिजेक्ट हो गई। कहा गया गेहूं को साफ करके लाओ। सायलो के सामने रात 11.15 बजे से दो घंटे तक तिरपाल पर पूरी ट्राॅली के गेहूं को चलना लगाकर साफ किया। उसके बाद रात 1.15 बजे नंबर आया।
सड़क किनारे ही बना लिया बिछोना रात 12.45 बजे

नरवल से आए रामेश्वर पटेल ने सड़क किनारे तिरपाल बिछाई और सो गए। वे कहते हैं आखिर कब तक ट्रैक्टर की सीट पर बैठ सकते हैं। 36 घंटे गुजर गए। अब भी नंबर आने में 10 घंटे और लगेंगे। ऐसे में इसी तरह रास्ते में कमर सीधी कर लेते हैं। वैसे भी किसानों को कहीं भी कैसे भी रहने की अादत बन गई है। वे कड़ाके की ठंड में सिंचाई कर सकते हैं तो ट्रॅाली की निगरानी में इस तरह सड़क किनारे भी सो सकते हैंं।



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The house is a pile of wheat for 36 hours ... food between tractors, tying cloths on the trolleys and sleeping there


source https://www.bhaskar.com/local/mp/ujjain/news/the-house-is-a-pile-of-wheat-for-36-hours-food-between-tractors-tying-cloths-on-the-trolleys-and-sleeping-there-127310331.html

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