तिघरा जलाशय से आने वाले पानी में तापमान 40 डिग्री के पार होते ही डिजॉल्व ऑक्सीजन (डीओ) की मात्रा मानक से कम होने लगी है। इस कारण शहर में पीले-मटमैले और बदबूदार पानी की समस्या होने लगी है। इससे शहर की लगभग 2 लाख की आबादी प्रभावित हो रही है। शनिवार को राॅ वाटर में डिजॉल्व आक्सीजन की मात्रा 3.4 पीपीएम (पार्ट्स पर नाेटेशन) रही। मानक के अनुसार, पानी में डीओ की मात्रा कम से कम 4 पीपीएम होना चाहिए। हालांकि मोतीझील प्लांट पर पानी का ट्रीटमेंट करने के बाद डीओ की मात्रा 6.6 पीपीएम रही। इस सबके बाद भी शनिवार को शहर में पीले-मटमैले और बदबूदार पानी की सप्लाई हुई। सबसे ज्यादा प्रभावित ग्वालियर और ग्वालियर पूर्व विधानसभा क्षेत्र रहे। यहां जहां भी टंकी से पानी की सप्लाई पहुंची, वहां पर पीला-मटमैला पानी आया। लोगों ने पानी को सूंघकर देखा तो बदबू भी आ रही थी। यह हालात इसलिए बने क्योंकि पीएचई अमले ने पिछले साल के हालातों से सबक नहीं लिया। जबकि जिम्मेदार दावा करते रहे कि पीला पानी नहीं आने देंगे। सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
पिछले साल जब पीले पानी की समस्या आई थी, तब नगर निगम पीएचई विभाग ने नागपुर से नीरी की टीम, भोपाल मुख्यालय से पीएचई विभाग की टीम और मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से तिघरा जलाशय से निकलने वाले पानी के उद्गम स्थल से लेकर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट व शहर तक में सर्वे कराया था। समस्या के निराकरण के लिए टीम ने कई सुझाव दिए थे, लेकिन उन पर अमल नहीं किया गया। गर्मी बढ़ते ही पिछले दो दिन से शहर में पीले-मटमैले पानी की समस्या आना शुरू हुई है। एक मई को मोतीझील के पास कृष्णा नगर पानी की टंकी से लोगों के घरों में पीला पानी पहुंचा। शनिवार को मोतीझील मुख्य मार्ग के पास ही टंकी को भरने वाली लाइन के वॉल्व को बदलने का काम किया गया।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/gwalior/news/supply-of-yellow-soiled-and-smelly-water-started-again-two-lakh-people-affected-127267484.html
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