Sunday, March 22, 2020

1984 के दंगाें में भी बागली इस तरह नहीं रहा था बंद, साप्ताहिक हाट-बाजार भी नहीं लगा


जनता कर्फ्यू के चलते बागली नगर व आसपास के ग्रामीण क्षेत्र पूर्णता बंद रहा। केवल मेडिकल स्टोर खुले थे। लोग स्वैच्छा से ही अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर दिनभर अपने घरों में ही रहे।

बागली के अभिभाषक राजेंद्र इनानी ने बताया कि देश में इस प्रकार का जनता का कर्फ्यू पहली बार देखने को मिला। ना ही इसे कोई बंद कराने वाला था ना ही किसी ने किसी पर दबाव डाला। इसके बावजूद लोगों ने कोरोना वायरस के बचाव के तहत अपनी मर्जी से ही अपने कामकाज बंद कर घर में रहे। मैंने भी आज दिनभर घर पर रहकर अपने पुराने बचे हुए काम निपटाए।
साथ ही वर्षों बाद रेडियो पर गाने सुने। देवकरण राठौर ने बताया कि 1984 के दंगों में पूरे देश में धारा 144 लगाई गई थी। उस समय भी बागली नगर इस प्रकार से पूर्णता बन नहीं रहा था। 70 से
75 वर्ष के इतिहास में पहली बार बागली में लगने वाला साप्ताहिक बाजार नहीं लगा।

रोज 125 से ज्यादा मरीज पहुंचते हैं, रविवार काे एक भी नहीं पहुंचा

स्वास्थ्य केंद्र में जहां प्रतिदिन 125 से अधिक मरीज इलाज कराने के लिए आते हैं, रविवार को एक भी मरीज नहीं पहुंचा। 19 मार्च को 118 मरीज, 20 मार्च को 152 एवं 21 मार्च को 106 मरीजों ने बागली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अपना इलाज करवाया था, लेकिन 22 मार्च को शाम 4 बजे तक एक भी मरीज स्वास्थ्य केंद्र पर नहीं पहुंचा।

लाेगाें ने घर में कामकाज
करने वालाें काे दे दी छुट्टी


नगर की गलियां सूनी रही। पुलिस प्रशासन के लोग ही इक्का-दुक्का नजर आ रहे थे। अभिभाषक सूर्यप्रकाश गुप्ता ने बताया कि कोरोना वायरस के चलते आज हमने अपने घरों में काम करने वाले लोगों को भी एक दिन पहले ही कह दिया था कि आप भी रविवार को छुट्टी रखकर अपने घरों में ही रहे। परिवार के लोगों ने मिलकर अपने सारे कामकाज स्वयं किए।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today


source https://www.bhaskar.com/mp/dewas/news/mp-news-even-in-the-1984-riots-bagli-was-not-closed-like-this-weekly-haat-bazaars-were-also-not-installed-062619-6897658.html

No comments:

Post a Comment