शनिवार सुबह 9 बजे रामायण का प्रसारण दूरदर्शन पर हुअा ताे दूरदर्शन के जमाने में टीवी देखने के शाैकीन युवा अाैर बुजुर्गाें की यादें ताजा हाे गईं। बच्चों ने दादा-दादी और पापा के साथ बैठकर रामायण देखी। सिवनीमालवा वार्ड 9 निवासी कमलाबाई लौवंशी ने तीन पीढ़ियों के साथ बैठकर रामायण देखी। बुजुर्गों ने अपने जमाने में रामायण के दौरान घरों में होने वाली भीड़ और सड़कों के सन्नाटे के बारे में भी बताया। नए दर्शकाें काे यह जानना था कि अाखिर एेसा काैन सा अभिनय अाैर प्रस्तुतिकरण था जाे अभी तक दर्शकाें काे याद है।
6 33 साल पहले जब टीवी पर रामायण सीरियल शुरू हुआ था तो परिवार के सभी लोग रविवार के दिन सुबह जल्दी उठकर चाय नाश्ता करके टेलीविजन के सामने बैठ जाया करते थे और रामायण सीरियल चालू होने का बड़ी बेसब्री से इंतजार किया जाता था। उस दौर में लोगों के घरों पर बहुत कम टीवी हुआ करती थी।
अजय पाराशर, जवाहर वार्ड साेहागपुर
5 1988 में हमारे पिताजी श्रीनिवास काबरा और मेरा बेटा यतिराज अाैर मैं (तीन पीढ़ियां) एक साथ रामायण देखते थे। उस समय खाद्य मंत्री कन्हैयालाल शर्मा परिचित थे। उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री से मांग कर प्रदेश के सभी सर्किट हाउस में टीवी और एंटीना लगवाया जाए जिससे कि हम रामायण देख सकें।
श्रीनारायण काबरा, समाजसेवी पिपरिया
4 पापा से जब भी रामायण की बात हाेती ताे पापा का एक ही जवाब हाेता अरुण गाेविल जैसा राम काेई नहीं बन सकता। मुझे यह देखना था कि पापा इतनी तारीफ किस सीरियल की करते हैं। देखने पर पता चला तब के अार्टिस्ट सीरियल में कैसे जान डालते थे। इसे राेज देखूंगा ताकि अगली बार पापा से बात हाे ताे चर्चा में शामिल हाे सकूं।
-अार्यन चाैकसे, होशंगाबाद
3 यह प्रयास बेहद बेहतर है। पहले िसलेबस में रामायण, गीता पढ़ते थे अब लाइफ स्टाइल फास्ट है। बच्चाें काे अाध्यात्मिक किताबाें से जाेड़ पाना संभव नहीं हाे रहा एेसे में एकल परिवार में रह रहे माता पिता के लिए यह अच्छा अवसर है कि वे अपने बच्चाें काे रामायण जी दिखाकर इसके विषय में जानकारी दे सकेंगे।
- डाॅ. एलएल दुबे, होशंगाबाद
2 तब टीवी नई अाई थी। चुनिंदा घराें में ही हाेती थी। हमारे घर में ताे टीवी अाई ही रामायण देखने के लिए थी। अासपड़ाेस के लाेग भी हमारे ही घर अाकर रामायण देखने बैठते थे। परिवार की महिलाएं रविवार काे काम जल्दी पूरे कर लेती थीं। अाज फिर से वही प्रसारण देखा। अन्य चैनलाें पर भी इसका प्रसारण हाेना चाहिए।
-राजकुमार उपाध्याय, इटारसी
1 दारा सिंह ने रामायण में जैसे हनुमान का राेल किया वह दाेबारा कभी नहीं दिखा। जब भी धार्मिक सीरियल अाते ताे साेचता था एक बार रामायण भी फिर से प्रसारित हाे। पुरानी यादें ताजा हाे गईं। अब परिवार में नाती- पाेते भी हैं जाे रामायण देखते हुए पूछ रहे थे दादा यह क्या है ताे उन्हें इसकी जानकारी भी दी जिसे सुनकर बच्चे राेमांचित हुए।
- प्रकाश मालाेनिया, इटारसी
रामायण देखने वाले दर्शकाें ने एेसे साझा किए अपने अनुभव...
सिवनीमालवा| ठुमक ठुमक चले रामचंद्र के दृश्य पर तालियां बजाता लौवंशी परिवार।
होशंगाबाद। शनिवार को रामायण सीरियल को घर में बैठकर देखते लोग।
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source https://www.bhaskar.com/mp/hoshangabad/news/mp-news-memories-vividly-ramayana-was-seen-with-grandfather-and-father-everyone-played-applause-at-the-scene-of-ramchandra-072603-6932917.html
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