ट्रेन के खड़े डिब्बों में 36 घंटे से हैं 153 वेंडर और अटेंडेंट, याद आ रहे परिवार : लॉकडाउन के दौर में ट्रेन पेंट्रीकार के 153 वेंडर और अटेंडेंट यशवंतपुर-पाटलीपुत्र एक्सप्रेस के काेच में बैठकर इटारसी ताे अा गए लेकिन परिवहन का साधन नहीं मिलने से फंसे हुए हैं। इटारसी स्टेशन पर खड़े 5 काेच में 36 घंटे से रोके हुए हैं, रेलवे से खाना-नाश्ता सब मिल रहा है लेकिन अारपीएफ की निगरानी हाेने से खुद काे खुली जेल में बंदी जैसा मान रहे हैं। वे कह रहे हैं- हमें घर जाना है। वाहन हम खुद कर लेंगे, बस इजाजत दे दो। घर से प|ी अाैर बच्चाें के काॅल अा रहे हैं कि जल्दी घर अा जाअाे। भिंड के साेनू सिंह (26) ने बताया घर की चिंता सता रही है। बिलासपुर में स्टाॅल पर काम करने वाले विनाेद कुमार, जंग बहादुर, लाेकेंद्र सिंह अाैर उदयवीर ने बताया- रुपए खत्म हाे गए हैं। संभावना है कि सड़क मार्ग से इन्हें 29 मार्च तक भिजवाया जा सकता है।
जेब में बिस्किट रख नागपुर से उदयपुर पैदल चल पड़े मजदूर, होशंगाबाद में मिला खाना : नागपुर से उदयपुर अपने घर के लिए पैदल निकले दिहाड़ी कामकाजी लाेग रविवार काे हाेशंगाबाद पहुंचे। नागपुर से उदयपुर का करीब 847 किमी के सफर है। घर की अास में निकले युवा अभी 278 किमी ही पूरा कर पाए हैं। रात को बुदनी पहुंचे। बिस्कुट जेब में लेकर निकले इन लाेगाें काे होशंगाबाद शहर के भास्कर संवाददाता ने समन्वय कर लाेगाें के सहयोग से भाेजन कराया। युवकों की इच्छा है कि कैसे भी करके घर पहुंच जाएं। उन्होंने कहा- रेत-गिट्टी उठाने का काम नहीं है तो नागपुर में क्या करते। उन्हें भिजवाने के संबंध में मप्र शासन को सूचना दी है। इधर, पिपरिया में भी करीब 90 मजदूरों ने अपने घर वापस जाने की मांग की। अपेक्षा है कि जांच कराकर उन्हें घर पहुंचाने के लिए साधन उपलब्ध कराया जाए। रुपए भी नहीं हैं।
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source https://www.bhaskar.com/mp/hoshangabad/news/mp-news-fear-of-corona-but-home-first-072627-6932912.html
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