कोरोना के संक्रमण को न तो शहर के लोग गंभीरता से ले रहे हैं और न ही इसका जिम्मेदार अमला। बाजारों में हाट की तरह भीड़ उमड़ रही है। प्रशासन ने जिन लोगों को होम क्वारेंटाइन किया है, उनमें से कई लोगों को तो इसका मतलब भी नहीं मालूम। वे इसकी गंभीरता को समझे बिना आराम से घूम रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें न तो किसी ने घर पर रहने की सलाह दी और न ही जिम्मेदार उनका फॉलोअप ले रहे हैं। इन हालातों के चलते खतरा बढ़ने की आशंका है इसलिए दैनिक भास्कर की शहरवासियों से अपील है कि आप घर में ही रहें तो बेहतर होगा।
16 बाजारों में 6 घंटे आम दिनों की तरह उमड़ी भीड़, दुकानों पर खरीदारों के झुंड, सख्ती भी नहीं
1 मामा का बाजार: सुबह 7.20 बजे, यहां दूध, राशन की दुकान पर लोग समूह में खड़े थे। न इन्हें रोकने के लिए पुलिस थी न कोई अन्य इंतजाम। दुकानों के बाहर मार्किंग तक नहीं।
2 माधोगंज: पुलिस थाने के पास से लेकर आगे चौराहे तक, हालात खराब थे। दुकानों के बाहर इतनी भीड़ थी कि लोगों ने अपनी गाड़ियां सड़क पर लगाईं तो आधी-आधी सड़क घिर गई। एक एफआरवी यहां से गुजरी, लेकिन सायरन बजाते हुए पुलिसकर्मी निकल गए। अनाउंसमेंट तक नहीं किया।
3 लाला का बाजार: यहां दुकानों के साथ छोटी क्लिनिक और दवा की दुकानों पर भीड़ लगी थी। शास्त्री क्लिनिक के पास भीड़ होने पर पुलिस पहुंची।
4 महाराज बाड़ा: चिटनीस की गोठ तिराहे से लेकर छापा खाना और महाराज बाड़ा। यहां मंगलवार सुबह जमीन पर भी सामान रखकर लोग बेच रहे थे। सप्तमी के चलते यहां पूजा का सामान बेचने वाली दुकान, फल के ठेले,किराने की दुकान, जमीन पर रखकर सामान बेचने वालों की भीड़ थी। ठीक सामने बृजवासी मिष्ठान्न भंडार के बाहर कुर्सी डालकर कोतवाली थाने का स्टाफ बैठा था, लेकिन भीड़ तक नहीं छंटवाई।
5 चावड़ी बाजार: यहां दवा की दुकान और फल के ठेलों पर लोग एक-दूसरे से सटकर खड़े थे। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो रहा था।
6 खासगी बाजार: किराने की दुकान, दवा की दुकानों पर भीड़, एक बार भी पुलिस नहीं गुजरी।
7 छत्री मंडी: मंडी के बाहर बैरिकेड लगा दिए गए। यहां लोगों ने वाहन लगाए तो भीड़ लग गई। अंदर भी एक-एक दुकान पर कई लोग खड़े थे। दुकानदार न ग्लब्स पहने थे न मास्क लगाए थे। किराने की दुकानों पर भी भीड़ थी। इसी तरह मंडी के पीछे भी यही हालात थे। सड़क पर पार्किंग से जाम लगने लगा।
8 लक्ष्मीगंज: लक्ष्मीगंज सब्जीमंडी में फिर व्यवस्था चरमरा गई। सुबह 5 बजे से यहां भीड़ लग गई। हालात ऐसे हो गए कि अंदर पैर रखने तक की जगह नहीं थी। सड़कों पर गाड़ियां लग गई। इसके चलते गोल पहाड़िया तक भीड़ लगी। यहां राशन की दुकानों पर भी कोई लोगों ने दूरी मेंटेन नहीं की।
9 हनुमान चौराहा: जनकगंज डिस्पेंसरी से चौराहे तक हालात खराब थे। भीड़ लगी थी। डिस्पेंसरी के बाहर ही मरीजों की भीड़ थी। इसके सामने बैंक ऑफ इंडिया के बाहर लोगों की जमकर भीड़ थी। सोशल डिस्टेंसिंग नहीं थी। न पुलिस आई न बैंक के स्टाफ ने कुछ इंतजाम किए।
10 फालका बाजार: यहां राशन की दुकानों पर लोग दूर-दूर खड़े थे। दवा की दुकान पर जरुर भीड़ थी। लेकिन दुकानदार ने खुद ही दो हिस्सों में लाइन लगवा रखी थी।
11 इंदरगंज: यहां किराने, दूध की दुकान और सब्जी के ठेलों पर लोग इकठ्ठे थे। दाल बाजार आने वाले कई लोगों ने सड़क पर पार्किंग की, इससे यहां व्यवस्था बिगड़ी। अचलेश्वर रोड पर कुछ लोग खाना बांट रहे थे, यहां पूरी कार को घेरकर झुंड में लोग खड़े थे।
12 दाल बाजार: यहां रोज की तरह भीड़ लगी रही। सामान्य ग्राहक भी यहां पहुंचा। कई दुकानों पर पुलिस ने खुद लोगों को दूर किया।
13 नाका चंद्रवदनी: यहां हालात खराब थे। दुकान, सब्जी के ठेले। सामान्य दिन की तरह पूरा बाजार चल रहा था। यहां दूध की डेयरियों पर लोगों की खूब भीड़ थी। यहां पुलिस ही नजर नहीं आई।
14 हजीरा चौराहा: यहां से लेकर तानसेन मकबरे तक लोग भीड़ लगाकर खड़े थे। यहां पुलिस लगातार अनाउंसमेंट कर रही थी। पुलिस को देखकर ही लोग अलग हो रहे थे। वहीं बिरलानगर सब्जी मंडी पर कुछ देर के लिए हालात बिगड़े लेकिन पुलिस ने यहां लाठी फटकार कर लोगों को खदेड़ा।
15 पिंटो पार्क: गोला का मंदिर चौराहा, पिंटो पार्क। यहां दुकानदार लापरवाही कर रहे हैं। सुरक्षा के इंतजाम किए बिना ही ग्राहकों को सामान दिया जा रहा है।
16 मुरार: मुरार के सात नंबर चौराहा, सदर बाजार, एमएच चौराहा, थाटीपुर चौराहा, मयूर मार्केट। कहीं भी सोशल डिस्टेंसिंग फॉलो नहीं हो रही थी। सदर बाजार में जब लोग नहीं माने तो पुलिस ने लाठी के जोर पर दुकानें बंद करा दीं। सुबह 10 बजे ही यहां दुकानें बंद कर दी गई।
होम क्वारेंटाइन में हैं लेकिन मोहल्ले से लेकर बाजार तक बेखौफ घूम रहे हैं
शहर में क्वारेंटाइन को भी मजाक समझा जा रहा है। होम क्वारेंटाइन किए गए कई लोग मोहल्ले से लेकर बाजार तक में खुलेआम बेखौफ घूम रहे हैं। उधर सरकारी क्वारेंटाइन में रखे गए लोगों के लिए पानी और सफाई का भी पर्याप्त इंतजाम नहीं है। इन लोगों को पीने का पानी लाने के लिए खुद वार्ड से बाहर निकलना पड़ रहा है। दैनिक भास्कर ने मंगलवार को जब पड़ताल की तो पता चला कि सरकारी अमले ने इन लोगों को खुद के हाल पर छोड़ दिया है। न होम क्वारेंटाइन वालों पर निगाह रखी जा रही है और न सरकारी अस्पताल के क्वारेंटाइन वार्ड में भर्ती किए गए मरीजों पर।
किराएदार की सूचना देने वाले मकानमालिक का नाम होम क्वारेंटाइन की सूची में
जिम्मेदारों की लापरवाही देखिए कि चार शहर का नाका स्थित एक मकान में किराएदार बाहर से लौटकर आया। इसकी सूचना मकान मालिक ने प्रशासन को दी। अफसरों ने होम क्वारेंटाइन की सूची में मकान मालिक का ही नाम दर्ज कर दिया। बात करने पर मकान मालिक राहुल ने बताया कि सावधानी के तौर पर उन्होंने सूचना दी थी। किराएदार पूरी तरह स्वस्थ है, किसी भी तरह के कोई लक्षण उनमें नहीं पाए गए हैं।
विदेशों से लौटने वालों से दिल्ली व भोपाल से कर रहे पूछताछ
होम क्वारेंटाइन की सूची में शामिल उन लोगों से सप्ताह में एक बार पूछताछ की जा रही है जो विदेश से लौटकर आए हैं। ऐसे लोगों ने बताया कि उनके पास दिल्ली और भोपाल से भी फोन आए थे। 7 मार्च को सिंगापुर से लौटे हिमांशु द्विवेदी का कहना है कि उनके घर टीम आई थी। हर सप्ताह अपडेट भी लेते हैं।
सूचना पर भी नहीं पहुंची टीम, फोन पर कहा- घर में ही रहें
पूना से आए मुकुल अग्रवाल ने बताया कि उनके घर कोई टीम नहीं आई। हां, एक फोन जरूर आया था। कुछ देर तबीयत के बारे में पूछने के बाद कहा- घर पर ही रहें। मैं मामले की गंभीरता को समझता हूं, इसीलिए खुद को क्वारेंटाइन कर लिया। यूके से लौटे गौरव मंगल के पास शुरुआत में कोई टीम नहीं पहुंची।
हमसे नहीं कहा कि घर में ही रहना है, दवा खाकर घूम रहे हैं
बहोड़ापुर निवासी हरिओम का कहना है किमैं 13 मार्च को पुणे गया था, 21 मार्च को वहां से लौटा। मोहल्ले वालों ने इसकी सूचना दे दी और घर पर डॉक्टरों की टीम आ गई। उन्होंने पूछताछ की और लौट गए। उन्होंने ऐसा कुछ नहीं बताया कि मुझे घर में ही रहना है। दो दिन बाद में जेएएच गया और जांच कराकर दवाई ले आया। मैं आराम से घूम रहा हूं।
...और उधर, सरकारी क्वारेंटाइन वाले पानी लेने भी बाहर जा रहे
जिला अस्पताल मुरार के क्वारेंटाइन सेंटर में भर्ती तीन काेराेना संदिग्ध मरीज पीने के पानी के लिए परेशान हैं। इन्हें पानी पीने के लिए क्वारेंटाइन सेंटर से बाहर आना पड़ रहा है। मंगलवार दोपहर 2:15 बजे यहां भर्ती तीन में से दो मरीज जयपुर से और एक पाली राजस्थान से आया था। इनमें दो बिरला नगर और एक बिलौआ का है। सेंटर के बाहर डॉक्टर और स्टाफ माैजूद था, लेकिन सेंटर की गैलरी में पत्ते बिखरे हुए थे, जिन्हें देखकर अनुमान लगाया जा सकता है कि सफाई पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। मरीजों ने बताया कि अस्पताल से खाना, चाय-नाश्ता तो मिल रहा है लेकिन पीने के पानी के लिए बाहर जाना पड़ता है। उधर जिन डॉक्टरों को आइसोलेशन में 14 दिन रखना है उनके लिए एचएफडब्ल्यूटीसी में क्वारेंटाइन सेंटर बनाया है। यहां टॉयलेट की ठीक से सफाई नहीं हो रही है। टॉयलेट की दुर्गंध के कारण गैलरी में भी खड़ा होना मुश्किल हो रहा है। जिस हॉस्टल को क्वारेंटाइन सेंटर बनाया है उसके गेट पर मंगलवार को शाम 4 बजे सुरक्षा के नाम पर कोई भी गार्ड नहीं था। अंदर चल रही कैंटीन में छह लोग बैठे थे। उनका कहना था कि इन मरीजों का खाना उनके यहां से नहीं जाता है।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/gwalior/news/corona-patients-increased-in-indore-and-bhopal-situation-may-deteriorate-due-to-non-compliance-of-lockdown-in-gwalior-127083837.html
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