इंदौर.कोरोना से इंदौर शहर के लोगों को बचाने के लिए हमारे कर्मवीर 16 घंटे तक सड़कों पर खड़े होकर ड्यूटी कर रहे हैं। कई पांच दिन से घर ही नहीं गए। जो सोने के लिए घर जाते हैं, उन्होंने खुद को अलग कर लिया है। बच्चों को छूते तक नहीं है। बाहर से ही खुद को सेनेटाइज करने के बाद अलग कमरे में रहते हैं, ताकि परिवार को कोई खतरा न हो।
स्टाफ का ध्यान रखने के लिए एक बजर लगा दिया है, जो हर घंटे बजता है। उसके बाद पूरा स्टाफ हाथ धोता है। इन कर्मवीरों की दिनचर्या जानकर हम यह बताना चाहते हैं कि वे लोग कितनी कड़ी मेहनत कर रहे हैं और दूसरी तरफ कई शहरवासी लॉकडाउन को मान ही नहीं रहे है।
यहीं पर परिवार लेकिन 5 दिन से नहीं देखा
राऊ टीआई दिनेश वर्मा का कहना है परिवार निपानिया में हैं और मैं राऊ के एक फ्लैट में रहता हूं। पांच दिन से उन्हें देखा नहीं। संयोगितागंज टीआई बोले परिवार को दूर से देखूं ये हो नहीं सकता है। इसलिए पास में ही एक अलग फ्लैट लिया है। गांधी नगर, जूनी इदौंर प्रभारी, सदर बाजार, राजेंद्र नगर कोतवाली टीआई भी घर से दूर हैं। सदर बाजार और सराफा टीआई थाने में ही कमरे में रहते हैं। एमजी रोड टीआई राजीव चतुर्वेदी ने स्टाफ के लिए 33 रूम बुक कर लिए हैं। मैं भी यहीं रहता हूं। बच्चे ऑस्ट्रेलिया में है, उनसे रोजाना बात कर लेता हूं।
घर में अलग कमरा, सैनिटाइज के बाद एंट्री
अन्नपूर्णा टीआई बोले घर में खुद को एक कमरे में कैद कर लेता हूं। पत्नी टेबल पर भोजन रख देती हैं। सुबह बर्तन और अपने कपड़े धोकर निकल जाता हूं। मल्हारगंज टीआई ने मंकी कैप और नायलोन का बेल्ट खरीदा, ताकि रोज धो लें। खुद को कमरे में अलग रखा है। यही हाल चंदन नगर, पंढरीनाथ, छोटी ग्वालटोली, रावजी बाजार, द्वारकापुरी, तुकोगंज, भंवरकुआं और पलासिया टीआई का है। सभी घर पहुंचते हैं तो घड़ी, चश्मा,मोबाइल,सेट सेनेटाइज करते हैं। वर्दी, जूते मौजे धोते हैं। कई टीआई घर में घुसने से पहले नहाते हैं।
दस दिन से घर नहीं गए
खजराना टीआई संतोष सिंह का कहना है कि मैं दिनभर घूमता हूं, इसलिए दस दिन से थाने पर ही सोता हूं। घर जाना बिल्कुल बंद कर दिया है। बाणगंगा टीआई बोले होटल में 35 कमरे बुक करवाए हैं। अधिकांश स्टाफ वहीं रह रहा है। जन सेवा और देशभक्ति के लिए होटल में ही सोकर सुबह ड्यूटी पर निकल जाता हूं। लसूड़िया टीआई ने एक मैरिज गार्डन बुक किया। स्टाफ के साथ वहीं सोते हैं।
रात्रि विश्राम थाना क्षेत्र में ही
हाई रिस्क को लेकर पुलिसकर्मी भी काफी सचेत हैं। 30 फीसदी पुलिसकरमियों के घर थाना क्षेत्र या उनके आसपास हैं, इसलिए वे घरों में खुद को अकेला रखकर आसोलेटेड करते हैं। आधे से ज्यादा स्टाफ की हर थाने क्षेत्र की होटल, लॉज और मैरिज गार्डनों में व्यवस्था कर दी गई है।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/indore/news/these-policemen-have-been-away-from-the-family-for-5-days-on-the-other-hand-we-do-not-believe-to-be-safe-in-our-own-house-127071362.html
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