पुलिस, प्रशासन, हेल्थ और नगर निगम जैसे विभागों को अतिआवश्यक सेवा में मानकर लॉकडाउन अवधि में कार्य पर रहने की छूट दी गई है, लेकिन सिरोल स्थित क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय को अब भी बाबू और दलाल खोलकर कमीशनबाजी के काम निपटा रहे हैं। गत सोमवार को दलालों और बाबूओं ने तय किया कि गुपचुप तरीके से कार्यालय पहुंचकर रजिस्ट्रेशन संबंधी फाइलें निपटाई जाएं, जबकि अभी इन कार्यालयों में हर तरह के कामों पर रोक लगाई गई है।
लगभग दोपहर एक बजे आरटीओ में पदस्थ दो बाबू और आधा दर्जन दलाल सिरोल पहाड़ी स्थित आरटीओ कार्यालय में पहुंचे। इन्होंने रजिस्ट्रेशन संबंधी फाइलें निकालीं और कंप्यूटर ऑन कर काम शुरू कर दिया। एक गुमनाम शिकायत के आधार पर डीबी स्टार टीम परिवहन कार्यालय पहुंची, तो पाया कि ऑफिस के बाहर आधा दर्जन लक्जरी कारें खड़ी हुई थीं। टीम जब रजिस्ट्रेशन शाखा में पहुंची, तो यहां बाबू और दलाल बैठकर काम कर रहे थे। टीम ने इस पूरी गतिविधि को लाइव शूट किया। इसके बाद टीम ने जिला प्रशासन और परिवहन विभाग के जिम्मेदार अफसरों से बात की, तो उनका कहना था कि लॉकडाउन में कार्यालय नहीं खोल सकते हैं। इस मामले को चेक कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
साेमवार 30 मार्च
समय: दोपहर 1.58 बजे
सोमवार को आरटीओ दफ्तर में काम करते दलाल पवन माहौर व सुमित पाल (इनसेट में)।
अभी लॉकडाउन चल रहा है, इसलिए आॅफिस बंद हैं। ग्वालियर में आफिस क्यों खोला गया है और कर्मचारी व दलाल वहां क्यों पहुंचे। मैं इसकी जानकारी लूंगा। हम संबंधित के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
वी मधुकुमार, परिवहन आयुक्त मप्र.
सस्पेंड कर दूंगा
लॉकडाउन में अतिआवश्यक सेवाओं को छोड़कर बाकी सभी सरकारी और निजी कार्यालयों को बंद रखने के आदेश जारी किए गए हैं। इसके बावजूद अगर आरटीओ कार्यालय खोलकर काम किया गया है, तो मैं तुरंत ही संबंधित कर्मचारी को सस्पेंड कर दूंगा।
कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर
बायोमेट्रिक से चलता है सिस्टम
परिवहन विभाग द्वारा रजिस्ट्रेशन, परमिट, लाइसेंस, फिटनेस संबंधी सभी कार्य ऑनलाइन किए जाते हैं। इसके लिए कार्यालय की विभिन्न शाखाओं में पदस्थ अफसरों और कर्मचारियों को कंसोल दिए गए हैं। वे अपनी आईडी-पासवर्ड डालकर लॉगिन करते हैं, साथ ही उन्हें अपना थंब इंप्रेशन भी देना पड़ता है, ताकि पहचान हो सके कि वह संबंधित कर्मचारी ही है। सोमवार को भी रजिस्ट्रेशन शाखा में पदस्थ यूडीसी किशोर कुमार भोइटे ने अपने थंब इंप्रेशन से कंप्यूटर लॉगिन किया और दलाल बैठकर फाइलें निपटाते रहे। जबकि केंद्र और राज्य सरकारों ने बायोमेट्रिक के इस्तेमाल पर रोक लगा रखी है।
सीसीटीवी और मशीन से कैद हुए सबूत
इस मामले में परिवहन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी जांच का बहाना बना रहे हैं, लेकिन असल में परिवहन कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरों में यह पूरी गतिविधि कैद हुई है। अगर इसे भी नजरअंदाज कर दिया जाए, तो कंसोल में बायोमेट्रिक अटेंडेंस दर्ज कराकर किए गए लॉगिन की जानकारी सर्वर में कैद हो चुकी है। इसे मिटाया नहीं जा सकता है। ऐसे में अफसर इच्छाशक्ति दिखाकर अधिकतम एक दिन में इन सबूतों के आधार पर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं।
कोरोनावायरस की दहशत के चलते किए गए लॉकडाउन के बावजूद आरटीओ कार्यालय में कमीशनबाजी के लिए बाबूओं और दलालों की जुगलबंदी का खेल चल रहा है। अतिआवश्यक सेवा को छोड़कर बाकी शासकीय एवं निजी संस्थान बंद करने के आदेश दिए गए हैं, लेकिन आरटीओ कार्यालय में गत सोमवार को आधा दर्जन से अधिक कर्मचारी और दलाल मिलकर रजिस्ट्रेशन की फाइलें निपटाने में लगे हुए थे। इसका खुलासा हुआ है डीबी स्टार टीम की पड़ताल में।
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source https://www.bhaskar.com/mp/gwalior/news/mp-news-employees-and-brokers-are-active-in-the-rto-office-in-lockdown-071507-6942871.html
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