ग्वालियर सहित प्रदेश के सभी जिलों में कोरोना महामारी से लोगों को बचाने के लिए फील्ड व ऑफिस में 24 घंटे कार्य कर रहे 19 हजार से अधिक नेशनल हेल्थ मिशन के अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ मप्र सरकार धोखा कर रही है। इन कर्मचारियों के नियमितीकरण की जगह अफसरों ने केवल तीन महीने का अनुबंध बढ़ाया है। यही नहीं 28 महिला कर्मचारी (एएनएम) को बाहर कर दिया है।
केंद्र सरकार ने दिया वेतन न काटने का अादेश
केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने 20 मार्च 2020 को एडवाइजरी जारी कर सरकारी व प्राइवेट नौकरी कर रहे अधिकारी व कर्मचारी का वेतन नहीं काटने के लिए कहा है चाहे वह नौकरी पर जा रहा हो या लॉकडाउन की वजह से घर पर ही हो। ऐसे में मप्र नेशनल हेल्थ मिशन के अफसरों ने संविदा कर्मचारियों में तीन महीने के अनुबंध को लेकर अंसतोष है।
नेशनल हेल्थ मिशन के संविदा कर्मचारियों के अनुबंध संबंधी आदेश को चेक कराएंगे। मामले को देखकर आगामी निर्णय लिया जाएगा।
मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव, मुख्यमंत्री मप्र
कांग्रेस की प्रदेश सरकार तो एनएचएम संविदा कर्मचारियों को नियमित करने की प्रक्रिया में थी। अगर भाजपा सरकार इन कर्मचारियों को हटाने का काम करती है तो हम संविदा कर्मचारियों के साथ उनके हर संघर्ष में आगे रहेंगे।
डॉ. गोविंद सिंह, पूर्व मंत्री सामान्य प्रशासन विभाग व वरिष्ठ कांग्रेस नेता
मप्र एनएचएम अफसरों ने संविदा कर्मचारियों को इनाम की जगह सजा दी है। हर जगह डॉक्टरों व स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए पीएम खुद ताली बजाकर सम्मान कर रहे हैं वहीं प्रदेश के अफसर हमें नौकरी से बाहर करने का प्रयास कर रहे हंै।
सौरभ सिंह चौहान, प्रदेशाध्यक्ष,संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ मप्र
हमें नौकरी से बाहर करने का प्रयास है
कर्मचारियों के संघर्ष में हम साथ देंगे
}पीएम व सीएम सराहना कर रहे हैं और एनएचएम सेवा समाप्त?
कोविड -19 के कारण कर्मचारियों का तीन महीने का अनुबंध बढ़ा दिया है। जून के बाद हम हर साल वाली प्रक्रिया अपनाएंगे।
}पर घोषणा पत्र में तो नियमित करने का वादा है?
शासन स्तर पर जो प्रक्रिया होगी उसे अमल में लाएंगे।
} जब इनकी तीन माह बाद सेवा समाप्त होना है तो शेष का भविष्य क्या?
सब कुछ पहले जैसे ही है। बस इस वित्त वर्ष को मार्च की जगह जून तक माना गया है। हम किसी को हटा नहीं रहे है। कर्मचारी इससे भयभीत न हों।
स्वाति मीणा नायक, एमडी, एनएचएम
_photocaption_कर्मचारियों को हटाया नहीं जा रहा
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सिंगरौली की एएनएम नौकरी से बाहर
कोरोना से बचाव में जुटी ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में फील्ड वर्क कर रही मप्र के सिंगरौली जिले की 28 संविदा एएनएम की सेवा समाप्त कर दी गई है और मंदसौर जिले से भी 14 एएनएम नौकरी से बाहर कर दी गई है। यहां एएनएम की भर्ती वर्ष 2014-15 में जिला स्वास्थ्य समिति के माध्यम से की गई थी। इनको हटाने के पीछे कारण यह है कि सभी ने प्राइवेट नर्सिंग कॉलेजांंे से नर्सिंग की डिग्री की है। अब नई भर्ती कर यह पद भरे जाएंगे।
सालभर के बजाए तीन माह का ही बढ़ाया अनुबंध
नियमितीकरण के मुद्दे पर शुरू हुआ था टकराव
गुना में एक जनसभा में तत्कालीन कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कमलनाथ सरकार को वचन पत्र का पालन करते हुए अतिथि विद्वानों के नियमितीकरण की आवाज उठाई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांग पूरी नहीं हुई तो वे सड़क पर उतर आएंगे तो इसके जवाब में तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ ने उन्हें उतर जाने के लिए कहा। इस विवाद ने आग में घी का काम किया और सरकार गिर गई हालांकि चलते-चलते सरकार संविदा कर्मचारियों एवं अतिथि विद्वान को नियमित करने जा रही थी, लेकिन वित्त मंत्री तरुण भनोट के बेंगलुरु में होने के कारण अंतिम कैबिनेट में यह प्रस्ताव नहीं आ पाया। उसके बाद सरकार गिर गई और सिंधिया के सहयोग से शिवराज सिंह सीएम बन गए।
}प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं संभाल रहे कर्मचारियों के साथ धोखा**
लॉकडाउन में कर्मचारियों को दी गई तीन माह का अनुबंध बढ़ाने की सूचना
28 संविदा एएनएम की सेवा समाप्त करने संबंधी आदेश।
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}पीएम व सीएम सराहना कर रहे हैं और एनएचएम सेवा समाप्त?
नहीं, इस मामले में एनएचएम के अफसरों से बात करेंगे
}पर सरकार के घोषणा पत्र में तो नियमित करने का वादा है?
मैंं केवल यह कह सकता हूं कि संविदा कर्मचारियों की मदद करेंगे
}जब इनकी तीन माह बाद सेवा समाप्त होना है तो शेष का भविष्य क्या?
- हम किसी भी कर्मचारी को परेशान नहीं होने देंगे
}एनएचएम के कर्मचारी अधिकारी डरे हुए हैं?
उन्हें डरने की जरूरत नहीं है। हम उनके साथ हैं।
तुलसी सिलावट, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री मप्र
_photocaption_संविदा कर्मचारियों की मदद करेंगे
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source https://www.bhaskar.com/mp/gwalior/news/mp-news-nhm-contract-employees-get-punishment-instead-of-honors-071206-6942869.html
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