Sunday, May 3, 2020

कोई अपनों से मिलने आया था तो कोई काम से दूसरे शहर गया था, महीनेभर से जहां हैं वहीं फंसे

लॉकडाउन-कर्फ्यू के कारण जो जहां है वो वहीं फंस गया है। इलाज करवाने आए लोगों से लेकर बेटी से मिलने आए या फिर किसी काम से आए लोगों को अब जाने की अनुमति नहीं मिल रही। ठीक इसी तरह जो लोग इंदौर से बाहर गए, उनकी भी यही स्थिति है। लॉकडाउन आगे भी चलेगा। ऐसे में अब लोगों की दिक्कत भी बढ़ रही है। इंदौर में मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद से सख्ती और ज्यादा हो गई है। लॉकडाउन के बाद से रोजाना 2000-2200 लोग अनुमति के लिए आवेदन कर रहे हैं। इनमें से पांच-सात लोगों को बहुत जरूरी होने पर अनुमति जारी हो रही है। अनुमति भी भोपाल से जारी हो रही है। जिन लोगों की अनुमति जारी हो रही है, प्रशासन उन्हें मैसेज कर सूचना दे रहा है। शहर में फिलहाल जिन मरीजों की अस्पताल से छुट्टी हुई है उनको और किसी के यहां मृत्यु की दशा में ही निकटतम परिजन को बाहर जाने की अनुमति मिल रही है।

औरंगाबाद में फंसे 400 बच्चे, इन्हें घरों पहुंचाने की मांग
औरंगाबाद के आईएचएम कॉलेज के हाेस्टल में फंसे 400 बच्चों को सुरक्षित घर पहुंचाने की मांग डॉ. निखिल सक्सेना ने की है। इनमें 23 बच्चे मप्र और करीब पांच बच्चे इंदौर के हैं। इन्हें लाने के लिए एक बस को सैनिटाइज कर रखा है। ड्राइवर भी अपना टेस्ट करा चुका है, पर मंजूरी नहीं मिल रही।

जब घर से निकले तो पता नहीं था कि ऐसा हो जाएगा, अब सिर्फ इंतजार

इलाज करवाने आए थे, यहीं रह गए, तीन बार आवेदन निरस्त

जौनपुर से इलाज करवाने एक व्यक्ति यहां आए थे। निजी अस्पताल में उपचार करवाया। घर जाना था, लॉकडाउन के कारण जा नहीं सके। तीन बार आवेदन किया। हालांकि ये आवेदन भोपाल से स्वीकृत नहीं हुआ। अब इंतजार कर रहे हैं कि जल्द लॉकडाउन खुले या फिर दोबारा अनुमति मिले तो वे घर जाएंगे। इधर, गुना से पति-पत्नी बेटी से मिलने आए थे।

रिश्तेदार के यहां खंडवा गए थे, तब से वहीं पर फंस कर रह गए

विद्या पैलेस कॉलोनी निवासी शशि रिश्तेदार के यहां खंडवा गई थीं। उसके बाद से लॉकडाउन के कारण वहीं रह रही हैं। उनके बेटे हिमांशु ने कहा कई बार कोशिश की लेकिन कर्फ्यू-लॉकडाउन के कारण अनुमति नहीं मिली। लॉकडाउन के बाद ही वे इंदौर आएंगी। इसी तरह प्रियंका माता-पिता के यहां बुरहानपुर गई थीं, वे भी महीनेभर से ज्यादा समय से वहीं हैं।

आठ साल की बेटी नानी के यहां, आने की जिद कर रही

राजेंद्र नगर निवासी शिशिर सिलुकर की आठ साल की बेटी एक महीने से ज्यादा समय से नानी के यहां हैं। वह आने की जिद कर रही लेकिन परिजन कर्फ्यू के कारण नहीं ला पा रहे हैं। दरअसल, लॉकडाउन के पहले वे परिवार के साथ घर गए थे। ऑफिस होने से सुबह जल्दी इंदौर आ गए थे। बेटी को एक-दो दिन बाद लेकर आने वाले थे।

परीक्षा देने छिंदवाड़ा से इंदौर आई थी, तब से यहीं रह रही हैं

छिंदवाड़ा से रितू बीएड की एग्जाम देने इंदौर आई थी। वह मार्च के पहले सप्ताह में इंदौर आ गई थीं। इसके बाद लॉकडाउन-कर्फ्यू के कारण यहीं रह गई। अभी वो एक रूम पर रह रही हैं। इसी तरह अलग-अलग होस्टल और अन्य जगहों पर भी 500 से ज्यादा छात्र एक महीने से यहीं रह रहे हैं। घर जाना चाहते हैं लेकिन अनुमति नहीं मिल रही है।

ससुर की मौत हुई तो ससुराल गए थे, तब से वहीं, बच्चे यहां

इंदौर निवासी संदीप के ससुरजी का निधन होने पर वे और उनकी पत्नी खंडवा गए थे। उसके बाद जब वे इंदौर आने लगे तो उनको अनुमति ही नहीं मिली। वे और उनकी पत्नी 26 दिन से खंडवा में ही हैं, जबकि उनके दोनों बच्चे इंदौर में दादा-दादी के पास। उन्होंने कहा दो बार अनुमति के लिए आवेदन किया, लेकिन ई-पास नहीं बना।

लखनऊ के छात्र फंसे, खाने की दिक्कत, फूड पैकेट के भरोसे

गीता भवन के पास दो छात्र पढ़ाई के लिए आए थे। वे रहने वाले लखनऊ के हैं। लॉकडाउन के बाद से घर नहीं जा पाए। अब सब दुकानें बंद होने के बाद उनको खाने की परेशानी भी हो गई। इसके बाद सामाजिक संगठनों तक जानकारी लगी
तो फूड पैकेट अौर बाद में राशन
पहुंचाया गया। उन्होंने कहा वे अपने
घर जाना चाहते हैं।



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एमआर टीबी अस्पताल में सभी कोरोना पॉजिटिव मरीज भर्ती हैं। यहां से मरीज स्वस्थ होकर भी लौट रहे हैं। इलाज के साथ यहां मरीजों को योग, प्राणायाम भी कराया जा रहा है, ताकि मरीजों का इम्यून पॉवर बढ़ाया जा सके। फोटो: संदीप जैन


source https://www.bhaskar.com/local/mp/indore/news/when-someone-came-to-meet-his-loved-ones-he-went-to-another-city-for-work-where-he-is-stuck-for-a-month-127269857.html

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