देश के दूसरे राज्यों से मप्र में मजदूरों और छात्रों आदि के आने का सिलसिला जारी है। शनिवार को दो ट्रेनें आईं। इनमें गुजरात और पंजाब में रहने वाले मजदूरों को अंचल में भेजा गया है। पंजाब से कटनी जाने वाली ट्रेन 16 मई की रात एक बजे 327 मजदूरों को लेकर आई। दूसरी ट्रेन गुजरात के सुरेंद्र नगर से 469 यात्रियों को लेकर आई। यह ट्रेन पहले दोपहर दो बजे आना थी। लेट होने की वजह से ट्रेन शाम को 5 बजे आई।
रेलवे स्टेशन पर जिला प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, रेलवे और नगर निगम ने अपने पूरे बंदोबस्त करके रखे थे। जैसे ही ट्रेन प्लेटफार्म पर रुकी। उद्घोषणा कर यात्रियों को कुछ समय के लिए प्लेटफार्म पर उतरने से रोका गया, फिर एक-एक यात्री को सुरक्षा के साथ उतारा गया। इसके बाद जांच की गई। वीआईपी गेट से निकलने वालों में ज्यादातर दतिया के रहे। जबकि टिकट काउंटर गेट से निकले यात्रियों में भिंड और ग्वालियर के यात्री थे। ट्रेन से आई भिंड की सुधा ने बताया कि भोजन की तलाश में भटकना पड़ता था। ट्रेन से ग्वालियर भेजने की खबर आई। तब जाकर परिवार को खुशी हुई।
मजदूरों को बसों से अंचल और प्रदेश के दूसरे शहरों में पहुंचाया
पंजाब और गुजरात से आए यात्रियों को उनके घर तक पहुंचाने की व्यवस्था राज्य सरकार ने की थी। परिवहन विभाग ने दोनों ट्रेनों के आने पर पर्याप्त बसों का इंतजाम किया था। इनके माध्यम से ग्वालियर के मालवा कॉलेज के अलावा भिंड, दतिया, मुरैना, गुना और शिवपुरी सहित अन्य जिलों में पहुंचाया गया।
रात में डस्टबिन में डाल गए पीपीई किट
पंजाब से रात में आई ट्रेन को अटेंड करने आए विभिन्न विभाग के स्टाफ ने पीपीई किट सुरक्षा के लिहाज से पहन रखी थी। उनमें से कुछ लोग रात में सुनसान स्टेशन का फायदा उठाकर किट को वीआईपी गेट के पास लगी डस्टबिन में डालकर चले गए। दिनभर किट उसी में डली रहीं। जब किट के फोटो खींचे गए, तब नगर निगम ने सेनिटाइजेशन किया। इसके बाद भी किट डस्टबिन में पड़ी रहीं।
आयुक्त ने नंगे पैर चल रहे मजदूरों को 500 जोड़ी जूते-चप्पल बांटे
कोरोना काल में मजदूरों का पलायन चल रहा है। मजबूर मजदूर घर जाने के लिए भरी दोपहरी में पैदल परिवार के साथ सड़कों पर चल रहा है। इनमें अधिकांश नंगे पैर हैं। उनके पैरों में छाले तक पड़ गए हैं। मई की दोपहरी में मजूदरों के पैर न जलें, इसके लिए आयुक्त नगर निगम संदीप माकिन शनिवार को झांसी रोड हाईवे पर पहुंचे। यहां पर उन्होंने 500 लोगों को जूते-चप्पल बांटे।
महाराष्ट्र से आई महिलाओं को सीमा पर रोका, कराया क्वारेंटाइन
महाराष्ट्र, गुजरात और अलग-अलग प्रदेशों में फंसे लोगों का आना लगातार जारी है। महाराष्ट्र से आई महिलाओं को सीमा पर रोका गया। पुलिस ने इन्हें क्वारेंटाइन कराया है। दो दिन पहले नागपुर से आई कुछ महिलाओं को भी होम क्वारेंटाइन कराया गया है। मोहना चेक पोस्ट पर महाराष्ट्र और गुजरात से आने वाले लोगों को रोका जा रहा है। बदनापुरा की जो महिलाएं नागपुर में थीं, वह भी आ रही हैं। इनमें सेक्स वर्कर भी शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक कुछ महिलाएं दो दिन पहले भी नागपुर से आई थीं। इन्हें चेकिंग पॉइंट पर पुलिस ने रोक लिया था, तब पता लगा था कि इनमें से कुछ सेक्स वर्कर भी हैं। इसके बाद इन्हें क्वारेंटाइन कराया गया। महाराष्ट्र से एक बस शनिवार को भी आई। इनमें से जो लोग ग्वालियर के थे, उन्हें क्वारेंटाइन सेंटर भेजा गया। वहीं जो लोग धौलपुर और अन्य शहरों के थे, उन्हें सीमा से आगे रवाना कर दिया गया। नागपुर से आई महिलाओं ने अपनी पीड़ा बताई। लॉकडाउन की वजह से इन्हें खाना तक नहीं मिला था। इसके बाद भी बस से जो लोग इन्हें यहां लेकर आए, उन्होंने मनमाना किराया वसूला। नागपुर की सामाजिक कार्यकर्ता हेमलता लोहावे ने इनके राशन और खाने का इंतजाम किया। कुछ महिलाओं को रुपए और दवा तक देकर उन्होंने मदद की।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/gwalior/news/796-laborers-arrived-from-two-trains-from-punjab-gujarat-sent-after-investigation-127310343.html
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