Wednesday, May 13, 2020

मुनिश्री साैरभसागरजी 1600 किमी पदयात्रा कर पहुंचे पुष्पगिरी, अपने गुरु पुष्पदंतसागरजी से 11 साल बाद मिले

देवभूमि देहरादून से पुष्पगिरी तीर्थ की ओर मैं अंधकार में दीपक की ज्योति के भांति जलता आया हूं। आज अपने गुरु से मिलकर अपना अंधकार खत्म करता हूं। क्योंकि अब जीवन प्रकाशमयी हो गया है। बहुत रह लिया अकेला, अब जीवन में खुशियां आई हैं। चतुर्वित संघ के साथ रहूंगा।

यह बात पुष्पगिरी प्रणेता गणाचार्य पुष्पदंतसागरजी महाराज के शिष्य संस्कार प्रणेता मुनिश्री सौरभसागरजी महाराज ने 11 वर्ष बाद 1600 किमी की पदयात्रा कर बुधवार सुबह 5.26 बजे पुष्पगिरि पर अपने गुरु से मिलन के दौरान कही। गुरु शिष्य मिलन की यह अद्भुत बेला देख भक्त भाव-विभोर हो गए। अपने प्रिय शिष्य से मिलने आचार्यश्री पुष्पगिरी छोड़ 2 किमी दूर तक उनकी अगवानी के लिए पहुंचे। जैसे ही शिष्य सौरभसागर ने अपने गुरु को देखा आंखाें में आंसू छलक आए और उनके चरणों में प्रणाम कर पुण्यार्जन किया। गुरु ने भी शिष्य काे अपने हाथों से उठाकर आंसू पोछते हुए अपने गले लगा कर कहा 11 वर्ष बाद अपने प्रिय बेटे से मिलकर मन आनंदित हो गया। साथ ही शिष्य ने कहा कि प्रभु सौरभ तो सदा पुष्प में ही रहता है। इसके बाद तीर्थ पर विराजमान क्षुल्लक पर्वसागर महाराज ने मुनि सौरभसागर के चरणवंदन किए। भक्तों ने संतों की जय घोष लगाई।

लॉकडाउन का पालन कर ई-पास बनवाकर किया तीर्थ में प्रवेश

इन दिनों देश कोरोना महामारी से जूझ रहा है। इसी कारण प्रधानमंत्री ने कहा था कि जो जहां है वहीं रहेगा। इसका पालन भी महाराजश्री ने किया, लेकिन एक और गुरु का भी आदेश था कि आपको तीर्थ पर आना है। ऐसे में महाराजश्री धर्मसंकट में फंस गए थे। इसी बीच उन्होंने कई जानकारों से चर्चा की व लॉकडाउन का पालन करते हुए मात्र 5 लोगों को अपने साथ लेकर पुष्पगिरी के लिए विहार कर दिया। इस दौरान सौरभसागरजी ने विभिन्न जिलों में प्रवेश करने से पहले वहां का ई-पास भी बनवाया। लॉकडाउन होने से सौरभसागरजी ने सोनकच्छ नगर में प्रवेश नहीं किया व मंगल प्रवेश की अगवानी के कार्यक्रमों को विराम देने का कहा। इस दौरान न तो कोई ढोल था न ही बैंड था। सादगी से अपने गुरु से मिले व पुष्पगिरि तीर्थ पर मंगल प्रवेश किया।

सौरभसागरजी को आचार्य पद देने का संस्कार भी चातुर्मास में होगा
पुष्पगिरी तीर्थ पर 29 नवंबर 2019 को पहली बार आचार्य पुष्पदंतसागरजी ने अपने चार शिष्यों को आचार्य की पदवी दी थी। इसी कार्यक्रम में समाधि उपरांत क्रांतिकारी राष्ट्र संत तरुणसागरजी को आचार्य पद की पदवी दी गई और आचार्यश्री ने गणाचार्य बनने के बाद घोषणा की कि प्रज्ञासागरजी व सौरभसागरजी को भी संदेश भेज दिया जाए कि उन्हें उनके गुरु ने याद किया है उनका शृंगार करने के लिए। अब सौरभसागरजी चातुर्मास (वर्षायोग) यहीं पर करेंगे। ऐसे में इन्हीं महीनों में एक आयोजन कर सौरभसागरजी को आचार्य पद की पदवी से उनका शृंगार करेंगे। आगामी दिनों में शिष्य सौरभसागर का 26वां मंगल चातुर्मास पुष्पगिरी तीर्थ पर होना है। इसके लिए मुनिश्री देहरादून से अपना मंगल विहार कर पुष्पगिरी तीर्थ पहुंचे।




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Pushpagiri, Munishree Saarbhasagri, reached 1600 km padyatra, met his guru Pushpdantasagarji after 11 years


source https://www.bhaskar.com/local/mp/indore/sonkutch/news/pushpagiri-munishree-saarbhasagri-reached-1600-km-padyatra-met-his-guru-pushpdantasagarji-after-11-years-127299649.html

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