Saturday, June 20, 2020

10 राज्यों से लौटे 21 हजार मजदूर, सिर्फ 2800 के बने जॉब कार्ड, बिना काम पेट भरने का संकट

कोरोना महामारी के कारण देश में किए गए लॉकडाउन के दौरान अलग-अलग राज्यों से लौटे प्रवासी मजदूरों को अब घर पर दो वक्त की रोटी जुटाना मुश्किल हो रहा है। लगातार बिना काम के रहने से वे अपना और परिवार का पेट भरने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। प्रदेश सरकार ने दूसरे प्रदेशों से लौटे इन प्रवासी मजदूरों को संबल योजना में पंजीयन, जॉब कार्ड बनाने और स्किल मैपिंग कराने के निर्देश दिए थे ताकि ये प्रवासी मजदूर बाहर जो काम करते थे, वही काम उन्हें यहां मिल सके, लेकिन जिले में स्किल मैपिंग तो दूर न सभी के जॉब कार्ड बने बने न श्रमिक पंजीयन किए गए। दूसरे प्रदेशों से जिले में 21 हजार से अधिक प्रवासी मजदूर लौटे हैं। पिछले एक महीने में सिर्फ 12 हजार 872 प्रवासी मजदूरों के पंजीयन किए गए हैं। अब तक मात्र 2 हजार 860 प्रवासी मजदूरों के जॉब कार्ड बनाए गए हैं।
बता दें कि कोरोना वायरस को लेकर 25 मार्च से देश में लॉकडाउन किया गया था जिससे पूरे देश में फैक्ट्रियां सहित सभी काम धंधे बंद हो गए थे। यात्री सेवाएं बंद हुईं तो बाहर रहने वाले प्रवासी मजदूर परिवार के साथ अपने सामानों की पोटली लेकर पैदल ही घर के लिए निकल पड़े थे। जिला प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार लॉकडाउन लगने से वर्तमान तक जिले में 21 हजार 461 प्रवासी श्रमिकों की वापसी हुई। इनमें से भांडेर जनपद में 6946, दतिया जनपद में 5139 एवं सेवढ़ा जनपद में 9376 श्रमिक लौटकर आए हैं। अपने-अपने काम धंधे छोड़कर आए इन प्रवासी मजदूरों को घर प, गृह जिले में रोजगार सुलभ कराने के लिहाज से जिले के सभी प्रशासनिक अमले को प्रवासी मजदूरों के पंजीयन कराने और जॉब कार्ड बनवाने के आदेश दिए थे। हालात यह हैं कि प्रदेश सरकार इन मजदूरों को मनरेगा में काम देने का दावा करती रही है लेकिन हकीकत यह है कि अब तक मात्र 2 हजार 860 प्रवासी मजदूरों के ही जॉब कार्ड बने हैं। इन्हें भी नियमित काम नहीं मिल रहा है। एेसे में मजदूर संघर्ष कर रहे हैं।

मैपिंग का काम भी धीमा
मप्र शासन ने प्रवासी मजदूरों को रोजगार देने के लिए रोजगार सेतु पाेर्टल शुरू किया है। इस पोर्टल पर प्रवासी मजदूरों के पंजीयन कर मैपिंग की जानी थी ताकि प्रवासी मजदूर जिले से बाहर दूसरे शहरों में रंगाई, पुताई, बिल्डिंग निर्माण, शिक्षा, कारखानों, उद्योगों, साफ सफाई आदि जो भी काम करता हो, उसके नाम व काम की जानकारी पोर्टल पर अपलोड की जानी है। इसके अलावा निर्माण एजेंसियों, ठेकेदारों, उद्यमियों की भी स्किल मैपिंग होना है ताकि जिस निर्माण एजेंसी, ठेकेदार, कंपनी अपने हिसाब से मजदूरों को भर्तियां निकालकर रोजगार दे सकें। हाल में ही कलेक्टर रोहित सिंह ने निर्माण एजेंसी पीडब्ल्यूडी, पीआईयू व अन्य एजेंसियों को अपने ठेकेदारों की शत प्रतिशत मैपिंग करने के निर्देश भी दिए थे लेकिन मैपिंग का कार्य काफी धीमा हो रहा है।

एक महीने में 60% मजदूरों का ही हो सका पंजीयन

जिले में एक महीने में अब तक 12872 लोगों का ही पंजीयन किया जा सका। इनमें से जनपद पंचायत दतिया में 3632 श्रमिकों, जनपद पंचायत सेवढ़ा में 4935 श्रमिकों, जनपद पंचायत भांडेर में 3679 श्रमिकों, नगरीय निकाय दतिया में 230, नगरीय निकाय सेवढ़ा में 215, नगरीय निकाय भांडेर में 199, नगरीय निकाय इंदरगढ़ में 137 और नगरीय निकाय बड़ौनी में 43 श्रमिकों का ही पंजीयन हो सका है। जिले में 8589 लोगों को अभी भी श्रमिक पंजीयन का इंतजार है।

राजस्थान से लाैटने के बाद एक माह से काम नहीं मिला
मैं रैवाड़ी राजस्थान में कलर बनाने वाली फैक्ट्री में काम करता था। लॉकडाउन के बाद घर आ गया और तब से मुझे रोजगार नहीं मिला। गांव में काम मिल नहीं रहा है। परिवार कहां से चलाएं कुछ समझ नहीं आ रहा है। -राजेश जाटव, प्रवासी मजदूर, ग्राम अटरा

मैं तंगी से जूझ रहा हूं
मुंबई में फैक्ट्री में काम करता था। वहां जो कमाता था उसी से परिवार का खर्च, बच्चों की पढ़ाई लिखाई का काम चलता था। एक महीने से काम नहीं मिला जिससे आर्थिक तंगी से जूझ रहा हूं। सरकार हमें यहीं काम दिलाए।
किशोरी शरण प्रजापति, प्रवासी मजदूर, ग्राम हमीरपुर

जिले में जॉब कार्ड बनाने का काम तेजी से चल रहा
जिले में जॉब कार्ड बनाने और श्रमिक पंजीयन का काम तेजी से किया जा रहा है। अब तक हमारी प्रगति 90 प्रतिशत तक हो गई है। कुछ और लोग रह गए हैं जिनकी जल्द ही मैपिंग हो जाएगी।
धनंजय मिश्रा, प्रभारी सीईओ, जिला पंचायत, दतिया



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21 thousand laborers returned from 10 states, job cards made of only 2800, crisis without filling stomach


source https://www.bhaskar.com/local/mp/gwalior/datiya/news/21-thousand-laborers-returned-from-10-states-job-cards-made-of-only-2800-crisis-without-filling-stomach-127431897.html

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