विक्रम विश्वविद्यालय को आखिरकार क्यों देश के टॉप-200 विश्वविद्यालयों में भी जगह नहीं मिल पाई, इसका जवाब हाल ही में जारी किए एमबीए के रिजल्ट में साफ हो जाता है। विश्वविद्यालय में रिजल्ट बनाने वाली कंपनी ने सॉफ्टवेयर में गलत स्कीम लगाकर एमबीए के प्रथम और तृतीय सेमेस्टर का रिजल्ट घोषित कर दिया। इस गलती के बाद त्रुटिपूर्ण रिजल्ट ही विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर भी अपलोड कर दिया। विद्यार्थियों ने ही रिजल्ट देखने के बाद जब गलती दिखाई तो ताबड़तोड़ रिजल्ट को वेबसाइट से हटाया गया। अब रिजल्ट में सुधार किया जा रहा है।
विश्वविद्यालय ने 19 जून को ही एमबीए के प्रथम और तृतीय सेमेस्टर के रिजल्ट जारी किए थे। इस रिजल्ट को विवि की वेबसाइट पर अपलोड किया तो रिजल्ट देखकर विद्यार्थियों के अलावा एमबीए पाठ्यक्रम संचालित करने वाले कॉलेज प्रबंधक चौंक गए। गलत रिजल्ट की जानकारी जब विवि प्रशासन तक पहुंची तो वेबसाइट से रिजल्ट हटा दिया गया।
गलत रिजल्ट का नतीजा
100 से अधिक विद्यार्थियोंको एग्रीगेट एटीकेटी की बजाय औसत में फेल बताया। एमबीए प्रथम और तृतीय सेमेस्टर में 1800 से अधिक विद्यार्थी शामिल हुए थे। उज्जैन में ही चार कॉलेजों में एमबीए पाठ्यक्रम संचालित किया जाता है। विश्वविद्यालय परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले अन्य जिलों में भी एमबीए पाठ्यक्रम चलता है। विद्यार्थियों ने बताया एमबीए में पास होने के लिए प्रत्येक प्रश्न पत्र में न्यूनतम 36 अंक लाना अनिवार्य है। वहीं सभी प्रश्न पत्रों के अंकों को मिलाकर कुल औसत 48 प्रतिशत होना चाहिए। जिन विद्यार्थियों का औसत कम होता है तो उन्हें एग्रीगेट एटीकेटी (औसत अंक के आधार पर पूरक) दी जाना चाहिए थी, जबकि रिजल्ट तैयार करने वाली कंपनी ने एटीकेटी की बजाय औसत प्रतिशत पूरा नहीं होने पर औसत में फेल दर्शाने की स्कीम के आधार पर रिजल्ट तैयार कर दिया। विद्यार्थी जब गलत रिजल्ट निकलने की जानकारी लेकर विश्वविद्यालय पहुंचे तो गोपनीय विभाग में अधिकारियों ने ही उन्हें यह जानकारी दी।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/ujjain/news/results-of-first-and-third-semester-of-mba-released-by-applying-wrong-scheme-in-software-127452202.html
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