िश्वशांति के लिए 25 किलो हवन सामग्री का यज्ञ करते हुए आहुति दीं
कोरोना वायरस से दुनिया को बचाने के सकल जैन समाज द्वारा आचार्य सौभाग्य सागर और आचार्य सुर| सागर के सानिध्य में श्रीदिगंबर जैन महामृत्युंजय तीर्थक्षेत्र चंबल नदी तट पर पहली बार श्रीमहामृत्युंजय जिनेंद्र महाशांतिधारा कार्यक्रम आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम के चौथे दिन शुक्रवार को जैन संत और सैकड़ों श्रद्धालुओं के द्वारा 25 किलो हवन सामग्री के साथ यज्ञ किया गया। साथ ही महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया गया।
गौरतलब है कि शुक्रवार को श्रीमहामृत्युंजय जिनेंद्र महाशांतिधारा कार्यक्रम के तहत सुबह 10 बजे आचार्य सौभाग्य सागर और आचार्य सुर| सागर और अन्य जैन संतों ने श्रद्घालुओं के साथ विश्वशांति के लिए 25 किलो हवन सामग्री का यज्ञ करते हुए आहुतियां दी। जिसके बाद श्रद्घालुओं ने भगवान शांतिनाथ और महावीर स्वामी का शांतिधारा अभिषेक किया गया। वहीं दोपहर 1 बजे से शाम 4 बजे तक जैन संत और श्रद्घालुओं ने महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया।
आखिरी दिन होगा 108 कुंडीय यज्ञः श्रीदिगंबर जैन महामृत्युंजय तीर्थक्षेत्र चंबल नदी तट पर 35 दिवसीय श्रीमहामृत्युंजय जिनेंद्र महाशांतिधारा कार्यक्रम 17 मार्च से शुरू हुआ है, जो 20 अप्रैल तक आयोजित होगा। कार्यक्रम के आखिरी दिन 20 अप्रैल को मंदिर परिसर में 108 कुंडीय महायज्ञ का आयोजन होगा। भिंड में इस प्रकार का धार्मिक आयोजन पहली बार आयोजित हो रहा है।
भगवान-संत किसी समाज विशेष के नहीं होते हैंः विराग सागर
मेहगांव | भगवान और संत किसी पक्ष, पार्टी, समाज, देश और गांव के नहीं होते हैं। यही कारण है कि हर समाज, हर नगर, गांव, पार्टी वाले और हर देश के व्यक्ति उनके चरणों में झुकते हैं। वे सूरज, चांद के समान के होते हैं। वे सभी के होते है, सभी को समान प्रकाश प्रदान करते हैं। इन को सीमा में नहीं बांध सकते हैं। इसलिए वे असीमित हैं। उक्त वचन शुक्रवार को जैन मंदिर मेहगांव में आयोजित धर्मसभा में गणाचार्य विराग सागर महाराज ने कहे। उन्होंने कहा कि सत्य जीवन का महत्वपूर्ण अगं, आत्मा की वास्तविकता है, सत्य वचन तो सीमित होते हैं। लेकिन सत्य धर्म असीमित होता है। जिंदगी भर भी सत्य धर्म को बोला जाए फिर भी उसका अंत नहीं हो सकता। सत्य तो अनंत आकाश की तरह होता है। जिसका कोई ओर-छोर नहीं है। लोग समुद्र की गहराई को नाप सकते हैं। लेकिन वे सत्य की गहराई को नहीं नाप सकते हैं। क्योंकि उसकी गहराई अनंत है। एक बार बोले गये झूठ का परिणाम भी व्यक्ति के जीवन को तबाह कर सकता है। एक दिन का झूठ जीवन के लिए खतरनाक हो जाता है। जो लोग अपने जीवन में कई झूठ बोलते हैं।
महामृत्युंजय मंत्र जप से होता है कष्टों का निवारण
कार्यक्रम में प्रवचन देते हुए आचार्य सौभाग्य सागर ने बताया कि महामृत्युंजय मंत्र के जप मात्र से सभी रोग और कष्टों का निवारण होता है। जैन धर्म के अलावा अन्य धर्म में भी इस महामृत्यंजय मंत्र का महत्व बहुत अधिक मानते है। सभी की क्रियाएं अलग अलग होती है। लेकिन कार्य वही है। आचार्यश्री ने आगे कहा कि कर्म दो प्रकार के होते है एक वे जो भगवान, गुरु की भक्ति मात्र से पलायन कर जाते है एक वे कर्म होते है हम भक्ति करते है लेकिन फिर भी कष्ट देकर जाते हैं, शास्त्र गुरु की भक्ति करें जिससे कर्मों का नाश हो हमें सद्बुद्धि मिले। श्रीमहामृत्युंजय जिनेंद्र महाशांतिधारा कार्यक्रम में जैनों के अलावा अजैन लोग भी शामिल होने के लिए आ रहे हैं। यह जैन धर्म किसी जाति विशेष का नहीं बल्कि जन जन का होता है। जिसकी जैसी आस्था होती है। वह वही जाता है जैन समाज के लोग जैन धर्म की क्रियाओं को जानते है वह कहते है कि भगवान महावीर हमारे है लेकिन वो ऐ नहीं जानते कि भगवान प्राणी मात्र के है धर्म की अहिंसा है।
जैन श्रद्घालु भगवान महावीर स्वामी का अभिषेक करते हुए।
मेहगांव जैन मंदिर में श्रद्घालु पूजा-पाठ करते हुुुुुुुए।
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source https://www.bhaskar.com/mp/bhind/news/mp-news-jain-saints-recite-mahamrityunjaya-mantra-to-save-the-world-from-corona-offering-in-havan-062709-6885289.html
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