अगर आप के अंदर कोई बुराई, दोष, दुर्गुण है तो आपने गुरु के वचनों पर विश्वास नहीं किया है। जिस घर में पुरुष स्त्री को अपमानित करता है उस घर मे दरिद्रता आती है। स्त्री घर की लक्ष्मी है। यह बातें कथा वाचक पं. भगवती प्रसाद तिवारी ने पेड़ीघाट स्थित श्रीसिद्ध गणेश मंदिर मंे श्रीमद् भागवत सत्संग में साेमवार काे कहीं। कथा मंे शुकदेवजी महाराज ने कथा प्रसंगों को समझाया। कंस वध, गुरु सांदपनी मुनि के आश्रम पर बलराम, श्रीकृष्ण, विद्या प्राप्त करने गए। उद्धव गोपी संवाद, जरासंध वध, द्वारकापुरी निर्माण, माता रुक्मणि के विवाह प्रसंग का वर्णन आध्यात्मिक ढंग से किया। उन्हाेंने कहा कि भोग में क्षणिक सुख है पर त्याग में अनंत सुख है। कंस को मृत्यु का भय है। मरने से बचने के लिए बाल हत्या का महापाप किया। जिसका जन्म हुआ है उसको मरना ही पड़ता है। मरने के लिए ही जन्म होता है। जन्म और मरण का बंधन जल्दी नहीं छूटता है। जन्म लेने के लिए ही मरण है। महापुरुष मरण का निवारण नहीं करते हैं। मरण को सुधारने का प्रय|, पुरुषार्थ, सुमरण, भजन, ध्यान से करो। जिसका मरण मंगलमय होता है उसका फिर से जन्म नहीं होता है। जिसका मरण बिगड़ता है उसी का फिर से जन्म होता है। मरण को मंगलमय बनाअाे। जो सुख और दुख से ऊपर है उसे ही आनंद कहते हैं।
हरदा। कथा में शामिल महिलाएं। इनसेट: कथा का वाचन करते पं. तिवारी।
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source https://www.bhaskar.com/mp/harda/news/mp-news-kans-committed-child-murders-to-avoid-dying-pt-tiwari-072147-6857979.html
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