Wednesday, March 18, 2020

जबेरा विधानसभा: वनांचल में बसे ग्राम सुरेखा में शुरू हुआ तालाब का निर्माण


जबेरा विधानसभा की अंतिम सीमा पर बसे वनांचल की ग्राम पंचायत भजिया के बोधा मानगढ़ (सुरेखा) गांव के लोग बीते 25 वर्ष से पेयजल जैसी बुनियादी समस्या से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों को वर्ष के 8 माह पेयजल के लिए जंगल के पोखरों से पानी लाना पड़ता है। सबसे ज्यादा परेशानी गर्मियों में होती है, जब जंगली पोखरों में भी नाममात्र का पानी रहता है। ऐसे में लोगों को पानी के लिए दिन रात संघर्ष करना पड़ता है, तब कहीं जाकर वह अपने परिवार के लिए एक दिन के पानी का इंतजाम कर पाते हैं। दूसरी ओर वन्य जीव एवं मवेशी गर्मियों में पानी नहीं मिलने के कारण प्यास से मौत हो जाती है।

इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए ग्रामीणों द्वारा बीते 25 बर्षों से तालाब की मांग की जाती रही थी। जिसके चलते पूर्व विधायक प्रताप सिंह द्वारा ग्रामीणों को इस मांग की पूर्ति के लिए लंबे समय से प्रयास किए जा रहे थे। जिसके बाद शासन द्वारा सुरेखा में 30 लाख की लागत से बनने वाले तालाब की स्वीकृति प्रदान की है। जिसका भूमि पूजन होने के दस दिन बाद ही तालाब निर्माण कार्यों की शुरूवात की गई है। 90 वर्षीय पुन्नू आदिवासी बताया कि तालाब निर्माण होने पर जहां पेयजल की समस्या का समाधान होगा, वहीं प्यास के मारे वन्य जीव मवेशियों की मौतों का सिलसिला रुक जाएगा। इसके अलावा तालाब निर्माण होने से वॉटर लेबल बढ़ने से सूखे पड़े जलस्रोतों जल स्तर बढ़ने से बंजर भूमि पर खेती का रास्ता खुलने से खेती करके वनवासियों का जीवन स्तर में सुधार आएगी। जिससे लोग जीविकोपार्जन के लिए गांव में रहकर खेती करने लगेंगे। और 80 प्रतिशत आवादी का पलायन भी रुक जाएगा।

इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए ग्रामीणों द्वारा बीते 25 बर्षों से तालाब की मांग की जाती रही थी। जिसके चलते पूर्व विधायक प्रताप सिंह द्वारा ग्रामीणों को इस मांग की पूर्ति के लिए लंबे समय से प्रयास किए जा रहे थे। जिसके बाद शासन द्वारा सुरेखा में 30 लाख की लागत से बनने वाले तालाब की स्वीकृति प्रदान की है। जिसका भूमि पूजन होने के दस दिन बाद ही तालाब निर्माण कार्यों की शुरूवात की गई है। 90 वर्षीय पुन्नू आदिवासी बताया कि तालाब निर्माण होने पर जहां पेयजल की समस्या का समाधान होगा, वहीं प्यास के मारे वन्य जीव मवेशियों की मौतों का सिलसिला रुक जाएगा। इसके अलावा तालाब निर्माण होने से वॉटर लेबल बढ़ने से सूखे पड़े जलस्रोतों जल स्तर बढ़ने से बंजर भूमि पर खेती का रास्ता खुलने से खेती करके वनवासियों का जीवन स्तर में सुधार आएगी। जिससे लोग जीविकोपार्जन के लिए गांव में रहकर खेती करने लगेंगे। और 80 प्रतिशत आवादी का पलायन भी रुक जाएगा।

ग्रामीणों द्वारा स्वेच्छा से किया जा रहा श्रमदान: खास बात यह है कि इस तालाब के निर्माण को लेकर ग्रामीणों में इतनी अधिक उत्सुकता है कि लोगों द्वारा स्वयं ही तालाब के निर्माण में श्रमदान किया जा रहा है। क्योंकि लगातार पच्चीस वर्षों से संघर्ष करने के बाद प्रशासन द्वारा तालाब निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई है।

बनवार। सुरेका तालाब में ग्रामीणों द्वारा भी श्रमदान किया जा रहा है।



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Banwar News - mp news jabera vidhan sabha construction of the pond started in village surekha settled in vananchal


source https://www.bhaskar.com/mp/damoh/news/mp-news-jabera-vidhan-sabha-construction-of-the-pond-started-in-village-surekha-settled-in-vananchal-062537-6870550.html

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