Monday, March 16, 2020

मेहनत की कमाई के लिए रिटायर्ड सूबेदार की जंग

क्या था मामला

दीनदयाल नगर में रहने वाले 72 साल के इंटर भाटिया गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं। रिश्वत के तौर पर दी गई इनकी मेहनत की कमाई सरकारी नियमों में फंस गई है। 1969 से 1997 तक आर्मी में सूबेदार रहे इंदर भाटिया अपने परिवार के साथ डीडी नगर में रहते हैं। हालांकि दो हजार रुपए उनके लिए बड़ी रकम नहीं है, लेकिन इंसाफ की खातिर वे ये पैसा वापस चाहते हैं। डीबी स्टार ने जब इस संबंध में लोकायुक्त एसपी संजीव सिंहा से बात की तो उन्होंनेे कहा कि रिश्वत में दिया पैसा साक्ष्य के रूप में केस खत्म होने तक कोर्ट में जमा रहता है। ये शासन का नियम है, हम इसमें कुछ नहीं कर सकते।

नियम बना परेशानी

केस खत्म होने तक साक्ष्य के रूप में जमा रहते है रिश्वत के नोट

लोकायुक्त ट्रैप केस में फरियादी द्वारा ही रिश्वत के पैसे दिए जाने का नियम है। यह पैसे तभी वापस होते हैं जब केस खत्म होता है। केस चलने तक पैसा साक्ष्य के रूप मंे जमा रहता है। श्री भाटिया के केस में अब तक फैसला नहीं हुआ है, इस कारण उन्हें पैसा वापस नहीं मिल पाया है।

छह साल में भी वापस नहीं मिला रिश्वतखोर को ट्रैप कराने के लिए दिया पैसा

आर्मी में नौकरी के दौरान इंदर भाटिया।

मैंने रिश्वतखोर को ट्रैप कराया लेकिन सजा मुझे मिल रही है। 72 साल का हो गया हूं, बीमार हूं। चाहता हूं कि जीते जी मेरी मेहनत की कमाई मुझे वापस मिल जाए।
इंदर भाटिया, शिकायतकर्ता

इंदर भाटिया को अपनी दीनदयाल नगर स्थित दुकान का नगर निगम से नामांकन करवाना था। जब वे जनमित्र केंद्र पर पहुंचे तो वहां पदस्थ टीसी राम नारायण बंसल ने उनसे दो हजार रुपए की रिश्वत मांगी। जिंदगीभर ईमानदारी से नौकरी करने वाले श्री भाटिया को यह बात रास नहीं आई और उन्होंने रिश्वतखोर को लोकायुक्त से ट्रैप कराने की बात ठान ली। लोकायुक्त पुलिस में आवेदन देने पर अफसरों ने उनसे ट्रैप करने के लिए दो हजार रुपए लाने को कहा। श्री भाटिया ने 14 मार्च 2014 को टीसी राम नारायण बसंल को पांच-पांच सौ के चार नोट दिए, उसी समय लोकायुक्त ने राम नारायण बसंल को पकड़ लिया। तभी से इंदर भाटिया रिश्वत में दिए दो हजार रूपए की वापसी के लिए लोकायुक्त के चक्कर काट रहे हैं।

नगर निगम के भ्रष्ट कर्मचारी को ट्रैप कराने वाले सेना के रिटायर्ड सूबेदार इंदर भाटिया छह साल से अपना पैसा मिलने का इंतजार कर रहे हैं। श्री भाटिया ने वर्ष 2014 में 2000 रुपए लोकायुक्त पुलिस के अफसरों को रिश्वतखोर काे ट्रैप करने के लिए दिए थे। ट्रैपिंग के बाद ये पैसा सरकारी खजाने में जमा हो गया। दो हजार रुपए की रकम वापस पाने के लिए श्री भाटिया मोतीमहल के कई चक्कर काट चुके हैं लेकिन अब तक इनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ है।




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Gwalior News - mp news retired subedar39s battle for hard earned money
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