इस बार मार्च का नारा- ‘मेरा जिस्म, मेरी मर्ज़ी’
मौलवियों और कट्टरपंथियों के विरोध और धमकियों के बावजूद पाकिस्तान की महिलाओं ने महिला दिवस पर \'औरत मार्च\' निकालने को तैयार हैं। वो भी हर कीमत पर। इस बार की थीम- मेरा जिस्म, मेरी मर्ज़ी है। कराची में महिला अधिकारों के लिए काम करने वाली प्रोफेसर शमा दोसा कहती हैं- धार्मिक दल हो या मुल्ला-मौलवी, हमें अपने अधिकारों को लेकर आवाज उठाने से कोई नहीं रोक सकता। हमने सारी तैयारियां पूरी कर ली हैं। भास्कर ने मार्च का विरोध कर रहे चर्चित धर्म गुरू और जमियत उलेमा इस्लाम के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान से बात की तो उन्होंने इसे अश्लील बताते हुए कहा, यह क्या है- मेरा जिस्म, मेरी मर्जी। पाकिस्तान का संविधान, कानून और सभ्यता इस तरह की अश्लीलता फैलाने की इजाजत नहीं देते। यह पश्चिमी देशों का एजेंडा है। शमा दोसा इन आरोपों को सिरे से खारिज करती हैं। कहती हैं- इसे वे इस्लाम से कैसे जोड़ सकते हैं। हम पुरुषों के वर्चस्व वाले समाज में अपना हक ही तो मांग रहे हैं। उन्हें खतरा क्यों महसूस हो रहा है। इसे धर्म से मत जोड़िए। मौलाना कहते हैं- यह विदेशी एजेंडा है। इस्लाम ने महिलाओं को विरासत, संपत्ति और आजीविका दी है। उन्हें और क्या चाहिए। उन्होंने हर कीमत पर इस मार्च को रोकने की धमकी दी है। वहीं मानवाधिकार कार्यकर्ता मारवी सरमद कहती हैं- हर कीमत पर मार्च होगाे, चाहें कुछ हो जाए। एक्टिविस्ट गजाला शफीक ने कहा- हम हिंदू लड़कियों के जबरन धर्मांतरण और निकाह का मामला भी उठाएंगे।
पूरे पाकिस्तान में औरत मार्च की चर्चा
इस बार औरत मार्च की चर्चा कुछ ज्यादा है। टीवी चैनलों पर बहस छिड़ी है। समर्थक और विरोधी अपने-अपने तर्क दे रहे हैं। पिछली बार विरोध करने वाले कई सेलेब्रिटीज इस बार शांत हैं। मशहूर कवयित्री किश्वर नाहिद पूछती हैं, ये क्या है- मेरा जिस्म, मेरी मर्जी? प्रमुख धार्मिक दल जमात-ए-इस्लामी और जेयूआई-एफ की महिला विंग औरत मार्च के विरोध में हैं।
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source https://www.bhaskar.com/mp/dhar/news/mp-news-women-will-conduct-39mahila-march39-despite-threats-from-clerics-religious-parties-070611-6802029.html
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