हमेशा व्यस्त रहने वाले एमएलबी रोड पर जनता कर्फ्यू से एक दिन पहले ही सन्नाटा पसरा रहा।
ब्लैक आउट के समय शहर के युवाओं को जोश देखने वाला था। दिन में युवाओं की टोलियां शहर भर में घूमकर लोगों को ब्लैक आउट का संदेश देकर देशप्रेम की भावना जगाती थी। ब्लैक आउट के दौरान स्कूटर व कारों की हेडलाइट पर काला रंग इस तरह पोता जाता था कि यदि रात में कहीं जाना भी पड़े तो रोशनी की केवल एक लकीर दिखाई दे। इस युद्ध में अंचल के हजारों सैनिकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। युद्ध के बाद बंदी बनाए गए पाकिस्तानी सैनिकों को मुरार में बनाई गई खुली जेल में रखा गया था।
प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के संदेश पर पूरा देश एक हो गया था। अस्पतालों से लेकर घरों तक परफेक्ट ब्लैक आउट किया गया। उस समय मैं एमबीबीएस फोर्थ ईयर की स्टूडेंट थीं और मेरी ड्यूटी कमलाराजा अस्पताल में रहती थी। रात के समय कमलाराजा सहित शहर के सभी अस्पतालों की खिड़कियों को अखबार व गत्ते की टुकड़ों से कवर्ड किया गया था। डॉक्टर व स्टाफ रोशनी की एक किरण भी बाहर नहीं जाने देते थे। न तो घरों में बिजली जलती थी और न ही सड़कों पर। अस्पताल से घर भी अंधेरे में ही जाते थे।
मैं उस समय नई सड़क स्थित महारानी लक्ष्मीबाई स्कूल में शिक्षक था। युद्ध के दौरान अचानक आॅल इंडिया रेडियो पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ब्लैक आउट का आह्वान किया। हमें अपने नागरिक दायित्वों को निभाना था। उस समय आज की तरह टीवी, मोबाइल इंटरनेट कुछ नहीं था। मैं भागा-भागा खासगी बाजार स्थित घर से सराफा बाजार आया तो देखा कि युवाओं की टोली घर -घर दस्तक देकर रात को बल्ब, चिमनी व कांच छिपाने की जानकारी दे रही थी। अचानक हम लोग इतन संगठित हो गए कि एक दूसरे की जरूरतों का ख्याल रखने लगे।
दिनभर शहर में घूमती थीं युवाओं की टोलियां
अस्पतालों से घरों तक परफेक्ट ब्लेक आउट
इंदिरा का संदेश सुनने के लिए लगती थी भीड़
डॉ.राम विद्रोही
इतिहासकार एवं वरिष्ठ पत्रकार
डॉ.अमृता मेहरोत्रा
पूर्व डीन गजराराजा मेडिकल कॉलेज
जगदीश तोमर साहित्यकार व प्रेमचन्द्र सजृन पीठ के पूर्व निदेशक
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source https://www.bhaskar.com/mp/gwalior/news/mp-news-remembered-blackout-due-to-public-curfew-071211-6891959.html
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