कोरोना संक्रमण से बचने का एक ही उपाय है आप घरों में रहें। कुछ लोग लॉकडाउन के बावजूद अनावश्यक घूमने निकल रहे। वहीं कुछ है जो बेहद जरूरी काम होने पर भी लॉकडाउन का पालन कर रहे है। मंगलवार को जावरा, ताल व ढोढर में तीन लोगों की अंतिम यात्राएं निकली। इनके परिजन ने लॉकडाउन की गंभीरता समझी और प्रशासन की अनुमति से महज 7 या 15 लोग अंतिम यात्रा लेकर मुक्तिधाम पहुंचे। परिजन ने दैनिक भास्कर को बताया निधन सामान्य है लेकिन परिस्थितियों के चलते कम लोगों के साथ दिवंगत को अंतिम सफर तय करना पड़ा। ये स्थितियां किसी अन्य के साथ निर्मित ना हो, इसलिए परिस्थिति सामान्य होने तक संयम रखें और अपने घरों में ही रहंे।
नगर पालिका के वाहन में महज 7 लोग मुक्तिधाम गए और किया अंतिम संस्कार
गुरुनानक मोहल्ला निवासी मधुसुदन श्रीवास्तव (67) का सोमवार शाम निधन हो गया था। मंगलवार सुबह 9.30 बजे अंतिम यात्रा निकली। इन्होंने सिटी थाने में सूचना दी तो वहां से 7 लोगों की अनुमति मिली। परिजन ने गंभीरता समझी और नपा के मोक्ष वाहन में 7 लोग ही पार्थिव देह लेकर मुक्तिधाम पहुंचे और अंतिम संस्कार किया। इसमें केवल भाई दशरथ, सतीश, बेटे दिलकुश, लखन, रिश्तेदार आशीष व दो पड़ोसी शामिल थे। मंगलवार शाम पिपलौदा रोड निवासी सुरेशचंद्र श्रीवास्तव (75) का निधन हो गया। बुधवार सुबह 8.15 बजे अंतिम यात्रा निकलेगी। बेटे प्रवीण श्रीवास्तव ने बताया हम लॉकडाउन का पालन करेंगे, आमजन भी करें क्योंकि जीवन है तो जहान है।
घाटिया परिवार ने समझी गंभीरता, चंद लोगों ने दी अंतिम विदाई
ताल | किराना व्यापारी तेजपाल घाटिया का सोमवार शाम निधन हो गया। लॉकडाउन के कारण आसपास के ही कुछ रिश्तेदार ही पहुंचे। मंगलवार सुबह 10.30 बजे बस स्टैंड से अंतिम यात्रा निकली। लॉकडाउन की गंभीरता समझते हुए शव वाहन में परिवार के केवल पांच सदस्य बैठे और बाकी सारी रस्म घर पर ही पूरी। फिर चंबल नदी मुक्तिधाम पहुंचे। जहां सिर्फ 15-20 लोगों की मौजूदगी में पुत्र दिलीपकुमार, मुकेश कुमार घाटिया ने मुखाग्नि दी। अमुमन यहां हर शवयात्रा में कम से कम 200 से ज्यादा लोग शामिल होते ही है।
समझाइश के बाद सात लोग ही अंतिम यात्रा में शामिल हुए
ढोढर | ग्राम ढोढर में समाजसेवी बगदीराम राठौड़ (80) का मंगलवार सुबह निधन हो गया। सूचना पर रिंगनोद थाना प्रभारी निमेष देशमुख ने परिजन को समझाया कि कोरोना के खतरे को देखते हुए ज्यादा लोग इकट्ठा नहीं हो। फिर परिजन ने भी गंभीरता समझी और सात लोग ही शांतिवन पहुंचे। वहां पुत्र भंवरलाल, पप्पूलाल ने मुखाग्नि दी।
ताल में शव वाहन में बैठकर पांच परिजन ही मुक्तिधाम पहुंचे।
ढोढर में जहां अंतिम यात्रा में 100 से ज्यादा लोग रहते है, वहीं सात लोग शामिल हुए।
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source https://www.bhaskar.com/mp/ratlam/news/mp-news-commendable-three-last-journeys-in-javra-tal-and-dhodhar-took-place-in-the-presence-of-just-7-to-15-people-073010-6909946.html
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