Wednesday, March 11, 2020

मध्यावधि चुनाव की हलचल से मालवा-निमाड़ की 66 सीटों पर दोनों पार्टियों के नेताओं में मची खलबली

इंदौर(पंकज भारती). प्रदेश में चल रहे सियासी घमासान के बीच यदि मध्यावधि चुनाव की स्थिति बनती है तो यह कांग्रेस, भाजपा और कांग्रेस से इस्तिफा दे चुके विधायकों के लिए बेहतर स्थिति नहीं रहेगी। कांग्रेस के सिटिंग विधायक को मुख्यमंत्री कमलनाथ से मध्यावधि चुनाव का मना कर चुके हैं। सूत्रों के अनुसार सिंधिया खेमे के 10 से अधिक विधायक भी चुनाव का सामना नहीं करना चाहते हैं। यही स्थित भाजपा में भी है। इसके बावजूद यदि मध्यावधि चुनाव होते हैं तो मालवा-निमाड़ की 66 सीटो पर भाजपा को थोड़ा फायदा मिल सकता हैं।


मालवा-निमाड़ में इंदौर, आगर मालवा, नीमच, मंदसौर, रतलाम, उज्जैन, धार, झाबुआ, आलीराजपुर, बड़वानी, खरगौन, बुरहानपुर, खंडवा, देवास और शाजापुर आते हैं जो एक तरह से भाजपा के गढ़ माने जाते हैं। हालांकि विधानसभा चुनाव 2018 में यहां भाजपा को 28 सीटो का नुकसान हुआ था और उसे सिर्फ 28 सीट पर जीत मिली थी। वहीं कांग्रेस ने यहां 35 सीटें जीती थी जो की पिछले चुनाव के मुकाबले 24 अधिक थी।


राजनैतिक विश्लेषक अरविंद तिवरी कहते हैं कि वर्तमान परिदृष्य में यदि मध्यावधि चुनाव होते हैं तो मालवा निमाड़ में कांग्रेस को नुकसान हो सकता है। कई सीट इस प्रकार की है जो 2018 के चुनाव में भाजपा काफी कम अंतर से हारी थी। सिंधिया के भाजपा में शामिल होने से भाजपा को हारी हुई सीटे जीतने में सहायता मिलेगी।


राजनैतिक जानकारों के अनुसार इंदौर की 9 विधानसभा सीटों में से सांवेर विधानसभा सीट को छोड़कर शेष पर सिंधिया का कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा। पहली बात यह है कि सिंधिया गुट के विधायकों ने अब तक भाजपा में जाने का निर्णय नहीं लिया है। और दूसरी बात यह कि क्या भाजपा में शामिल होने के बाद सिंधिया गुट के विधायकों को भाजपा टिकट देगी? और यदि भाजपा ने इन्हें अपना उम्मीदवार घोषित भी किया तो स्थानीय नेता और भाजपा के कार्यकर्ता क्या उन्हें स्विकार कर पाएंगे। सिंधिया के खास समर्थक तुलसी सिलावट सांवेर से विधायक है और मप्र सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रह चुके है। भाजपा के राजेश सोनकर को हराकर वे विधायक बने थे। सोनकर और सिलावट के मध्य तनातनी चलती रहती है ऐसे में सिलावट के लिए भाजपा में स्थिति बहुत अच्छी बनती दिखाई नहीं दे रही है।


इसके अलावा धार (7 सीट), झाबुआ (3 सीट), आलीराजपुर (2 सीट), बड़वानी (4 सीट), खरगोन (6 सीट), बुरहानपुर (2 सीट), खंडवा (4 सीट), देवास (5 सीट), शाजापुर (3 सीट) आगर मालवा (2 सीट), नीमच (3 सीट), मंदसौर (4 सीट), रतलाम (5 सीट) और उज्जैन (7 सीट) पर सिंधिया के बजाय दिग्विजय सिंह का होल्ड अधिक है। मालवा-निमाड़ में सिंधिया के समर्थक तो काफी हैं लेकिन उनके भाजपा में जाने के बाद यह समर्थन बना रहेगा इस पर संशय है।


बना रहेगा कैलाश का दबदबा
मालवा-निमाड़ की सभी 66 सीटो पर भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय का दबदबा है। शिवराज सरकार के समय भी मालवा-निमाड़ की कमान विजयवर्गीय के हाथ में ही थी। मप्र की भाजपा में शिवराज को यदि नंबर वन नेता माना जाए तो विजयवर्गीय नंबर 2 पर है। इसके बाद कृष्णमुरारी मोघे और अन्य नेताओं का नंबर आता है। ऐसे में भाजपा में शामिल होने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया को नंबर तीन की पोजिशन के लिए भी संघर्ष करना पड़ सकता है।


भाजपा ने टिकट नहीं दिया तो राजनीतिक कॅरियर संकट में आ जाएगा
सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़ने वाले 22 विधायकों को क्या भाजपा फिर से टिकट देगी। यह सवाल इस्तिफा देने वाले विधायकों से लेकर कांग्रेस और भाजपा के नेताओं के मन में भी है। फिलहाल इस बात की चर्चा जोरो पर है कि उपचुनाव या मध्यावधि होने पर इन कांग्रेस विधायकों को उनकी परंपरागत सीट से चुनाव लड़ाएगी। इन्हें टिकट देकर भाजपा के नेताओं को घर बैठा दिया जाएगा तो ऐसे में भाजपा के अंदर भी विद्रोह हो सकता है। और क्या ऐसे में वे कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं को चुनाव में सहयोग करेंगे। इसका फायदा कमलनाथ और दिग्विजय कैंप को मिल सकता है। सूत्रों के अनुसार सिंधिया के साथ गए नेताओं में इस बात को लेकर घबराहट है कि कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद भाजपा से चुनाव नहीं लड़ पाएंगे तो उनका राजनीतिक कॅरियर समाप्त हो जाएगा।

इस्तीफे का दौर :सिंधिया के कांग्रेस से इस्तीफे के बाद उनके समर्थकों ने भी इस्तीफा देना प्रारंभ कर दिया। इंदौर शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रमोद टंडन ने कांग्रेस छोड़ दी। इंदौर लोकसभा से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुके सत्यनारायण पटेल, इंदौर-2 विधानसभा से कांग्रेस के उम्मीदवार रहे मोहन सेंगर ने भी कांग्रेस छोड़ दी। देवास के हाटपिपलिया से कांग्रेस विधायक मनोज चौधरी ने भी इस्तीफा दे दिया। इसके अलावा विपिन खुजनेरी, संदीप मेहता, मंजूर बेग, प्रकाश तिवारी, पवन जायसवाल, विनोद कुशवाह आदि भी कांग्रेस को अलविदा कह चुके है।


मालवा-निमाड़ की सीटें
इंदौर (9 सीट) :
इंदौर-1, इंदौर-2, इंदौर-3, इंदौर-4, इंदौर-5, देपालपुर, महू , राऊ, सांवेर
उज्जैन (7 सीट) : नागदा-खाचरौद, महिदपुर, तराना, घटिया, उज्जैन नार्थ, उज्जैन साउथ, बड़नगर
रतलाम (5 सीट) : रतलाम ग्रामीण, रतलाम शहरी, सैलाना, जावरा, आलोट
मंदसौर (4 सीट) : मंदसौर, मल्हारगढ़, सुवासरा, गरोठ
नीमच (3 सीट) : मनासा, नीमच, जावद
धार (7 सीट) : सरदारपुर, गंधवानी, कुक्षी, मनावर, धरमपुरी, धार, बदनावर
झाबुआ (3 सीट) : झाबुआ, थांदला, पेटलावद
आलीराजपुर (2 सीट) : आलीराजपुर, जोबट
बड़वानी (4 सीट) : सेंधवा, राजपुर, पानसेमल, बड़वानी
खरगोन (6 सीट) : भीकनगांव, बड़वाह, महेश्वर, कसरावद, खरगोन, भगवानपुरा
बुरहानपुर (2 सीट) : नेपानगर, बुरहानपुर
खंडवा (4 सीट) : मंधाता, हरसूद, खंडवा, पंधाना
देवास (5 सीट) : सोनकच्छ, देवास, हाटपिपल्या, खातेगांव, बागली
शाजापुर (3 सीट) : शाजापुर, शुजालपुर, कालापीपल
आगर मालवा (2 सीट) : सुसनेर, आगर



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Due to the midterm elections, the leaders of both parties in 66 seats of Malwa-Nimar created a stir.


source https://www.bhaskar.com/mp/indore/news/due-to-the-midterm-elections-the-leaders-of-both-parties-in-66-seats-of-malwa-nimar-created-a-stir-126949070.html

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