डीबी स्टार टीम ने गूगल पर कॉलेजों का पता ढूंढा, तो उसमें सिर्फ एरिया का नाम लिखा हुआ था। न तो कॉलेजों की वेबसाइट है और बिल्डिंग कहा है? कालेज कहां संचालित होता है? इसका कोई जिक्र नहीं है। ऐसे कई कॉलेज फर्जी पतों पर चल रहे है। बैंक में जब खातों को चेक किया, तो स्टाफ ने डीबी स्टार टीम को ऑफ रिकार्ड बताया कि इन खातों में लेन-देन के चेक प्राथमिक शिक्षक प्रशांत सिंह परमार, उनकी प|ी शशि परमार, ससुर नरेंद्र सिंह के हस्ताक्षर से आते हैं। इन कॉलेजों को संचालित करने वाली समिति में सचिव या अन्य पदाधिकारी की हैसियत से हस्ताक्षर करता है। कुछ कॉलेजों में उसके परिजन हैं।
एक महीने का यूएसए टूर
प्रशांत सिंह परमार ने प्राथमिक शिक्षक जैसे पद पर रहते हुए दिसंबर 2015 से लेकर जनवरी 2016 तक पूरा एक महीना यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका में गुजारा। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मिली जानकारी में खुलासा हुआ है कि श्री परमार ने विभाग से विदेश यात्रा के लिए कोई परमिशन नहीं ली थी। यह जानकारी मिलने के बाद जब विभाग में शिकायत दर्ज कराई गई, तो अफसरों ने इसे दबा दिया।
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क्या है बीएड-डीएड का धंधा: -बीएड की एक सीट 80 हजार तथा डीएड की एक सीट 70 रुपए की बिकती है। इनमें एडमिशन लेने वाले छात्रों की हाजिरी से लेकर प्रैक्टिकल नंबर व परीक्षा में नकल व पास तक की गारंटी के लिए 10 हजार प्रति स्टूडेंट अलग से वसूल किए जाते हैं। ग्वालियर-चंबल संभाग में इसका धंधा कितना फला-फूला है, इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता कि पूरे प्रदेश में कुल 1329 डीएड-बीएड कॉलेज हैं उनमें से 473 ग्वालियर चंबल संभाग में हैं।
}कैसे एक शिक्षक 30 कॉलेज चला सकता है?
हम इस मालमे की जांच करा रहे हैं। कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, पर सत्यता तो जांच में ही पता चलेगी।
}क्या कार्रवाई संभव है?
देखिए जांच में ही सब पता चलेगा। मैं इसकी जानकारी लेता हूं, क्योंकि अभी तो सभी तथ्यों की सूक्ष्म विवेचना की जानी है।
}इतने कॉलेज खोलने के लिए लगभग 100 करोड़ के पूंजी निवेश की जरूरत पड़ती है, पैसा कहां से आया?
जरूरत पड़ी तो इनकम टैक्स या अन्य विभागों को सूचना देंगे, पर पहले जांच पूरी होने दें।
}सरकारी शिक्षक प्राइवेट कॉलेज चला सकता है?
नहीं। सेवा भर्ती नियमों में सपष्ट प्रावधान है कि कोई भी सरकारी कर्मचारी-अधिकारी ऐसा नहीं कर सकता है।
}फिर शिक्षक प्रशांत सिंह परमार कैसे 30 डीएड-बीएड कॉलेज चला रहा है?
-मैं खुद हैरान हूं। हाल में इसकी शिकायत मिली है। हमने जवाब मांगा है। प्रथम दृष्टया उपलब्ध सबूतों के आधार पर तो बर्खास्तगी या दीर्घशास्ति जैसी सजा की कार्रवाई इस शिक्षक के खिलाफ की जाएगी। बाकी एसटीएफ भी इस मामले की जांच कर रही है।
शिक्षक 420 }एसटीएफ व स्कूल शिक्षा विभाग के अफसर हैरान
जीतेश गर्ग, एसपी स्पेशल टास्क फोर्स
विकास जोशी, जिला शिक्षा अधिकारी
प्रशांत सिंह परमार, प्राइमरी शिक्षक
अभी जांच चल रही है
हां, बर्खास्त करेंगे
विभाग को दे रखी है जानकारी
कई कॉलेजों में प्रशांत स्वयं या उनकी प|ी पदाधिकारी हैं और खातों का संचालन करते हैं। इसमें पुष्पलता नंदनी समाज कल्याण समिति-आईसीआईसीआई बैंक खाता नंबर 0197010009216, अंजुमन तरक्की अल्पसंख्यक शिक्षा प्रसार समिति-आईसीआईसीआई बैंक खाता क्रमांक 019701008863, रश्मि शिक्षा समिति आईसीआईसीआई बैंक खाता नंबर 019705009081 सहित विभिन्न बैंकों में 18 से अिधक खाते हैं।
ये हैं खाते
}आरोप है कि आप सरकारी नौकरी में होने के बावजूद डीएड-बीएड कॉलेज चला रहे हैं?
ऐसा नहीं है। मैं नौकरी में 2008 में आया हूं और उससे पहले कॉलेज ही चलाता था। पुरानी समितियां मेरे नाम पर थीं, लेकिन नौकरी में आने के बाद मैं उनसे हट गया।
}लेकिन इन समितियों के खाते आप ही संचालित करते हैं। इनमें आपके ही साइन चलते हैं?
कुछ खाते मैं चलाता हूं, लेकिन लाभ के पदों पर नहीं हूं।
}फिर आपकी जाचें क्यों चल रही हैं?
कुछ लोगों के साथ मैंने पार्टनरशिप में कॉलेज खोला था, लेकिन बाद में उनकी नीयत खराब हो गई। ।
}यानि आप मानते हैं कि आप कॉलेजों में पार्टनर हैं?
हां, तो बिजनेस करने में क्या गलत है। मैंने इसकी सूचना विभाग को दे रखी है।
}आप पर बिना अनुमति विदेश यात्रा करने और अकूत संपत्ति रखने का भी आरोप है?
ऐसा कुछ भी नहीं है। ये आरोप गलत हैं और इनकी जांच भी चल रही है।
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source https://www.bhaskar.com/mp/gwalior/news/mp-news-government-teacher-opened-30-private-colleges-071510-6891962.html
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