लॉकडाउन का सबसे ज्यादा असर शहर के उद्योगों पर हुआ है। इससे 153 उद्योग पिछले 23 दिन से बंद हैं और इनमें काम करने वाले 2 हजार से ज्यादा श्रमिक बेकार हो गए हैं। उद्योगों ने मार्च का भुगतान तो फिर भी श्रमिकों को जैसे-तैसे कर दिया है। लेकिन आय का कोई साधन नहीं होने से कई उद्योगों के सामने परमानेंट कर्मचारियों को अप्रैल की सैलरी बांटने का भी संकट खड़ा हो गया है।
इधर कई उद्योगों को मार्च में भेजे गए माल का भुगतान भी अब तक नहीं हो पाया है। ऐसे में यदि उद्योग शुरू करने को लेकर यदि जल्द कोई फैसला नहीं लिया तो कई श्रमिक भूखे मरने को मजबूर हो जाएंगे।
शहर का औद्योगिक ग्राफ
- शहर में 167 उद्योग हैं।
- इप्का को छोड़कर अन्य एमएसएमई उद्योग हैं।
- इप्का, अचार, आटा, बेसन सहित 14 उद्योग चल रहे हैं। शेष सभी बंद हैं।
उद्योगों की है ये समस्याएं
- अधिकतर उद्योगों ने लोन ले रखा है। कई बैंक ने ईएमआई काट ली है। वहीं अगली ईएमआई कैसे भरेंगे, इसको लेकर उद्योगपति चिंतित हैं।
- कई उद्योगों को मार्च का बिल भुगतान करना है।
- उद्योगों को ईएसआईसी भी भरना है।
इन शर्तों के साथ सरकार उद्योगपतियों को संचालन की अनुमति दे तो श्रमिकों को मिल सकता है रोजगार
- उद्योगों के संचालन में सोशल डिस्टेंसिंग रखी जाए।
- सफाई और सैनिटाइजर की व्यवस्था हो।
- आसपास के कर्मचारियों को घर जाने की छूट हो लेकिन दूर से आने वाले कर्मचारियों उद्योग में ही रहें।
- उद्योगों में रहने वाले कर्मचारियों के खाने और पीने की व्यवस्था उद्योगपति ही करें।
सरकार यदि ये सुविधाएं दे तो और बेहतर हो सकता है उद्योगों का संचालन
- बिजली बिल के फिक्स चार्जेस को शून्य किया जाए।
- ईएसआईसी का भुगतान राज्य शासन द्वारा किया जाए।
- राज्य कर को एक वर्ष के लिए शून्य किया जाए।
- अन्य विभागों द्वारा उद्योग मित्र की भावना से कार्य किया जाए।
- सभी अनुमतियों को ऑनलाइन जारी किया जाए।
- उद्योग संगठनों एवं उद्योगपतियों से संवाद किया जाए।
- संसाधनों की पूर्ति हेतु सरलीकृत एकीकृत व्यवस्था हो।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/ratlam/news/153-industries-lock-in-the-city-two-thousand-workers-are-sitting-idle-127169876.html
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