राघवेंद्र बाबा.एमवाय अस्पताल का नर्सिंग स्टाफ। आप सुरक्षित रहें, इसलिए आठ घंटे तक बिना पानी पीये कोरोना से युद्ध लड़ रहा। समर्पण भी ऐसा कि अपने डेढ़ साल, दो साल के मासूमों को दादी-नानी-बुआ के यहां छोड़ दिया है। क्योंकि मरीजों के लिए लड़ाई लड़ने के साथ परिवार की सुरक्षा का ध्यान रखना भी इनकी जिम्मेदारी है। साथ ही खुद को भी संक्रमण से बचाना बड़ी चुनौती है, इसलिए ड्यूटी के वक्त न पानी पीते हैं और न कुछ खाते।
बेटा 18 महीने का, खरगोन में दादी के पास छोड़ कर रहीं ड्यूटी
नर्स नताशा परिहार। मैं सुबह 8 बजे अस्पताल पहुंच जाती हूं। ओपीडी में कोरोना के सैंपल लेने की जिम्मेदारी है। जाते ही पीपीई किट पहन लेती हूं। ड्यूटी दोपहर 2 बजे तक है, लेकिन कागजी कार्रवाई और घर पहुंचते 4 बज जाते हैं। ड्यूटी के वक्त पानी तक नहीं पीते, क्योंकि संक्रमण का खतरा है। यदि स्टाफ का कर्मचारी गर्म पानी ला दे तो वह एक बार ही पी सकते हैं। मेरे दो बेटे हैं। एक 18 माह और दूसरा 4 साल का है। दोनों को दादी व बुआ के पास खरगोन में छोड़ दिया है। 18 माह का बेटा रह नहीं पाता, लेकिन दिल पर पत्थर रखकर कोरोना की जंग लड़ रही हूं। मेरे पति डॉक्टर हैं। वह खरगोन में पदस्थ हैं और फील्ड में जाकर सैंपल लेते हैं, इसलिए वह भी बच्चों से दूर होटल में रह रहे। मैं 4 बजे नेहरू नगर स्थित अपने घर पहुंचती हूं तो मकान मालकिन गर्म पानी रख देती हैं। सबसे पहले खुद को सैनिटाइज करती हूं और नहाने के बाद ही खाना-पीना हो पाता है।
खुद को दूसरे कमरे में कर लेती हूं कैद, डेढ़ साल के बेटे को गोद भी नहीं लेती
नर्स गीता कुकलोरिया। न्यू रानी बाग से रोज एमवायएच आती हूं। रात 9.30 के बाद ही घर पहुंच पाती हूं। मेरा डेढ़ साल का बेटा है। सास और पति उसे संभालते हैं। अस्पताल से लौटकर मैं परिवार और बेटे से अलग दूसरे कमरे में कैद हो जाती हूं। बेटा मुझे देखकर रोता है, लेकिन जानती हूं कि आठ घंटे अस्पताल में रहने के बाद घर लौटी हूं। इसलिए उसे गोद में भी नहीं उठाती। संक्रमण के खतरे को देखते हुए अस्पताल में पानी पीने और कुछ भी खाने से बचते हैं, इसलिए घर से भी इतना पानी पीकर निकलते हैं, ताकि बीच में जरूरत न पड़े।
ड्यूटी भी करनी है, परिवार को भी खतरे से बचाना है, इसलिए घर में अलग रहती हूं
नर्स दीप्ति राय.देवगुराड़िया से ड्यूटी के लिए आती हूं। मैं ही सबसे पहले मरीजों को फेस करती हूं। फिर सैंपल लिए जाने के बाद उन्हें कैरी करना, पेशेंट के लिए एम्बुलेंस करवाना, उन्हें शिफ्ट करवाना और दवाई देने से लेकर अन्य कागजी कार्रवाई पूरी करना मेरी जिम्मेदारी है। ज्यादा पानी पी लें तो टॉयलेट आएगी और किट उतारना पड़ेगी। ज्यादा प्यास लगती है तो किसी कर्मचारी से पेपर से पकड़कर बॉटल खुलवाकर दो घूंट पानी पी लेती हूं। मेरे भी दो छोटे बच्चे हैं। ड्यूटी के बाद घर जाती हूं तो सबसे पहले खुद को सैनिटाइज करती हूं, नहाने के बाद ही पानी पीती हूं। बच्चों को गोद में भी नहीं उठाती हूं। परिवार से अलग कमरे में रहती हूं।
‘ये 21 दिन लॉकडाउन ब्लैकआउट जैसा हो, तभी हालात संभलेंगे’
गौरव शर्मा.एमवायएच की ड्यूटी डॉक्टर ने कहा ‘जब से कोरोना आया है, तब से लगातार ड्यूटी कर रही हूं, बिना छुट्टी के। कभी 10-12 घंटे तो कभी उससे भी ज्यादा। दिनभर कोरोना संक्रमित मरीजों के बीच ही रहते हैं। अभी जो स्थिति है, हम अपने घरवालों से ही 25 दिन से नहीं मिले। ड्यूटी के बाद आने-जाने के दौरान जो बात मुझे सबसे ज्यादा डरा रही है वो है लोगों द्वारा लॉकडाउन का पालन नहीं करना। भंवरकुआं से हॉस्पिटल तक लोगों की आवाजाही दिखाई देती रहती है। दवा बाजार के बाहर तो गाड़ियों की भीड़ दिखाई देती है। यहां की दुकानों पर भी कोई सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं। राशन की तरह घरों तक दवाइयां भी पहुंचाई जाना चाहिए। ये बात इसलिए भी कह रही हूं कि जानकारी लगी कि पिछले दिनों एमवाय में एक गर्भवती के साथ कुछ लोग आए, बाद में पता चला कि उनमें से एक पॉजिटिव निकला। जब इंदौर हॉट स्पॉट बन गया, तेजी से कोरोना संक्रमण फैल रहा, जिस शहर में अब लॉकडाउन का सख्ती से पालन होना चाहिए, वहां पर एेसी स्थिति खतरनाक है। मैं यह इसलिए भी कह रही हूं, क्योंकि कोरोना संक्रमित मरीजों के बीच कई केस एेसे हैं, जो सिर्फ दूध-सब्जी लेने ही घर से निकले थे। अब तो इंदौर में लॉकडाउन ब्लैकआउट की तरह होना चाहिए। ये 21 दिन तक एेसा ही, तब जाकर स्थिति नियंत्रण में आएगी। अौर कोरोना शहर से खत्म होगा। अभी यहां जितनी सख्ती होना चाहिए, उतनी नहीं है। शहर में कोरोना खत्म करने के लिए लॉकडाउन के सख्ती से पालन के साथ जरूरत है डोर-टू-डोर स्क्रीनिंग हो। उसके लिए मेडिकल स्टाफ, डेंटिस्ट अौर अन्य सभी की टीम लगाई जाना चाहिए। स्टाफ भी पर्याप्त है, हम करने को भी तैयार हैं।’
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/indore/news/children-leaving-food-and-water-these-nurses-are-fighting-with-corona-so-that-we-can-be-safe-127214742.html
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