कोरोना वायरस के साथ लापरवाही का संक्रमण भी हमारे सिस्टम को बीमार कर रहा है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की गाइडलाइन होने के बावजूद कोरोना से संक्रमित मरीजों के परिजन और करीबियों के सैंपल न लेकर जहां इस बीमारी को खतरनाक तरीके से बढ़ाने वाली लापरवाही की जा रही है तो वहीं जिन संदिग्ध लोगाें के सैंपल जिला अस्पताल में लिए जा रहे हैं, उसमें भी सही तरीका न अपनाकर डॉक्टर न सिर्फ खुद को खतरे में डाल रहे बल्कि पूरा स्वास्थ्य सिस्टम इससे प्रभावित हो सकता है।इस रिपाेर्ट में पढ़िए प्रशासनिक लापरवाही के चार सैंपल...
कोरोना के संदिग्ध मरीजों के सैंपल लेने के संबंध में बनाई गई गाइडलाइंस की ग्वालियर में अनदेखी की जा रही है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) द्वारा बनाई गई गाइडलाइन के अनुसार जिन मरीजों में कोरोना वायरस के संक्रमण की पुष्टि हुई, उनके साथ रहने वाले सभी परिजनों के भी सैंपल लेने का उल्लेख किया गया है। ये सैंपल उस परिस्थिति में भी लिए जाएंगे, जब उनमें बीमारी के कोई लक्षण नहीं दिखाई दे रहे हों। लेकिन ग्वालियर में तीन संक्रमित मरीजों के नजदीकी संपर्क में रहने वाले परिजन व पड़ोसियों के सैंपल अभी तक नहीं लिए गए हैं। यही कारण है कि ग्वालियर में अब तक महज 1100 संदिग्धों के ही सैंपल लिए जा सके हैं। जबकि भोेपाल, इंदौर में यह संख्या ग्वालियर की तुलना में दाेगुनी से भी ज्यादा है।
अभिषेक मिश्रा : मकान मालिक के घर के एक भी सदस्य का सैंपल नहीं लिया
24 मार्च को चेतकपुरी निवासी अभिषेक मिश्रा की सैंपल रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इस कारण उनकी पत्नी का भी सैंपल लिया गया। लेकिन जिस मकान में वह किराए से रहते हैं। वहां के किसी भी सदस्य का सैंपल नहीं लिया गया। केवल होम क्वारेंटाइन का नोटिस चस्पा कर परिजनों को घर में ही रहने की सलाह दी गई।
बबीता वर्मा : एक ही घर में रहने वाले बड़े बेटे-बहू व उनके बच्चों का नहीं लिया सैंपल
ढोलीबुवा का पुल निवासी बबीता वर्मा की सैंपल रिपोर्ट 7 अप्रैल को पॉजिटिव आई। इसके बाद उनके पति वीरेंद्र, छोटे बेटे वीरेंद्र, यहां तक की पास ही में रहने वाले गुड्डू सोनी के सभी परिजन का सैंपल लिया। लेकिन बड़े बेटे जीतू, बहू पायल और 7 वर्षीय पोते व 3 वर्षीय पौत्री का सैंपल नहीं लिया। ये दोनों बच्चे दादी के साथ खेलते थे।
लता प्रभारी : जहां किराए पर रहती हैं, उस मकान के मालिक व पड़ोसियों के सैंपल नहीं लिए
जेएएच के ट्रामा सेंटर में नर्स लता प्रभारी के मामले में अस्पताल प्रबंधन ने केवल अपने स्टाफ की चिंता की और जो लोग ड्यूटी के दौरान लता के संपर्क में रहे। उन सभी के सैंपल लिए। साथ ही ट्रामा सेंटर में भर्ती मरीजों के सैंपल भी लिए। लेकिन जिसके मकान में लता किराए से रहती है, न तो उनके परिजनों के सैंपल लिए गए। न ही लता के कमरे के बगल से किराए में रह रहे भाई व बहन के सैंपल लेना जरूरी समझा गया। यहां तक की दोनों भाई-बहन जब सैंपल देने खुद ही जेएएच पहुंच गए तो उन्हें यह कहते हुए वापस भेज दिया कि जब संक्रमण के लक्षण दिखें, तब आना।
सफाई...भविष्य में गाइडलाइन का ध्यान रखेंगे
अभिषेक के केस में उसके ड्राइवर व पत्नी के सैंपल लिए थे। लेकिन अन्य लोगों के सैंपल नहीं लिए गए। यह जानकारी आपके माध्यम से हमारे संज्ञान में लाई गई है। भविष्य में आईसीएमआर की गाइडलाइन का अक्षरश: पालन किया जाएगा और संक्रमित मरीज के संपर्क में आए सभी लोगों के सैंपल लिए जाएंगे। -डाॅ. एसके वर्मा, सीएमएचओ, ग्वालियर
ग्वालियर| जिला प्रशासन ने डॉक्टरों को कोरोना के संक्रमण से बचाने के लिए कोरोना सैंपल बूथ तैयार कराकर दे दिए हैं लेकिन इनका उपयाेग नहीं हाे रहा है। डाॅक्टर मरीज का सैंपल लेते वक्त उसके काफी करीब हाेते हैं। भले ही वह पर्सनल प्राेटेक्शन किट पहने रहते हैं लेकिन फिर भी संक्रमण का खतरा बना रहता है। डाॅक्टराें का तर्क है कि एेसा करने से समय बचता है और सैंपल भी ठीक से ले पाते हैं, जबकि कांच वाले बूथ में लगे दस्ताने काफी सख्त होने के कारण सैंपल लेने में परेशाानी आरही है। डॉक्टरों ने अधिकारियों को सुझाव दिया है कि अगर कोरोना सैंपल बूथ में लगे दस्ताने ऐसे लगाए जाएं जो सख्त नहीं हों तो सैंपल आसानी से लिया जा सकेगा। काेराेना संदिग्ध मरीजाें के सैंपल जिला अस्पताल मुरार, जेएएच की ओपीडी और क्वारेंटाइन सेंटर पर लिए जा रहे हैं।
इस तरह लिया जाता है सैंपल
मरीज जब अस्पताल पहुंचता है तो वहां मौजूद डॉक्टर उसको अलग कमरे में ले जाते हैं। मरीज काे सेनिटाइज करने के बाद डाॅक्टर उसके नाक और गले से एक स्टिक के जरिए स्राव लेता है। इस स्राव को वह सैंपल की सीसी में रखता है।
इसके बाद मरीज को पुन: सेनिटाइज करके उसे बाहर भेजता है। मरीज के जाने के बाद डॉक्टर उस चेयर को सेनिटाइज करता है जहां मरीज बैठा था। इस प्रक्रिया में डाॅक्टर और मरीज के बीच दूरी नहीं रहती। हालांकि सैंपल लेने में 2 मिनट लगते हैं।
ऐसे लिया जाना चाहिए सैंपल
डाॅक्टर काे अस्पताल में तैयार बूथ के भीतर जाना चाहिए। बाहर बैठने वाले मरीज के नाक अाैर गले से स्राव लेने के लिए डाॅक्टर काे बूथ के बाहर लटके दस्तानाें में अपने हाथ डालकर एक लंबी स्टिक के जरिए सैंपल कलेक्ट करना चाहिए। एेसा हाेने पर डाॅक्टर, मरीज के सीधे संपर्क में नहीं आएगा, लेकिन यहां ऐसा नहीं हाे रहा है। इसके पीछे डाॅक्टराें का तर्क है कि दस्ताने सख्त हैं और इस प्रक्रिया से सैंपल लेने में कम से 5 से 7 मिनट लगेंगे। इससे मरीज काे भी तकलीफ हाे सकती है।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/gwalior/news/negligence-from-the-sample-collection-of-the-suspect-to-the-selection-delaying-the-report-and-not-even-worrying-about-telling-it-to-the-patient-127195220.html
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