कोरोना वायरस के संक्रमण से दो दिन पहले सुदामा नगर निवासी 47 वर्षीय मरीज की मौत हो गई। मंगलवार रात को उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई, जिसके बाद परिवार को क्वारेंटाइन किया जाना था। परिजन लगातारस्वास्थ्य विभाग में संपर्क करते रहे, लेकिन बुधवार को खबर लिखे जाने तक परिवार के सैंपल नहीं लिए जा सके। बताया जा रहा है कि मृतक के माता-पिता भी अस्पताल में ही भर्ती हैं।
एंबुलेंस सर्दी और जुकाम के मरीज को अरबिंदो अस्पताल लेकर पहुंच गई
एमआर टीबी अस्पताल और अरबिंदो मेडिकल कॉलेज में सिर्फ कोरोना संक्रमित मरीजों का ही इलाज चल रहा है। सर्दी-जुकाम जैसे लक्षणों वाले मरीजों के लिए येलो-कैटेगरी के अस्पतालों को चिह्नित किया गया है। इसके बावजूद बुधवार को एंबुलेंस 108 एक पॉजिटिव मरीज के परिजन को अरबिंदो अस्पताल ले गई। वहां कहा गया- येलो जोन के अस्पताल ले जाओ। वे निजी अस्पताल जाना चाहते थे, लेकिन एंबुलेंस उन्हें एमआर टीबी अस्पताल ले गई। यहां से एमटीएच महिला अस्पताल जाने के लिए कह दिया गया, लेकिन बाद में एमवाय अस्पताल छोड़ दिया। ऐसी ही परेशानियां अन्य अस्पतालों में सामान्य मरीजों को हो रही हैं। कई जगह तो उन्हें इलाज ही नहीं मिल रहा है।
वहीं अरिहंत अस्पताल और गोकुलदास अस्पताल को येलो जोन में चिह्नित किया गया है, लेकिन यहां स्टाफ ही नहीं आ रहा, जबकि सर्दी-जुकाम, बुखार के मरीजों का इलाज इन्हीं श्रेणी के अस्पतालों में होना चाहिए। इसके अलावा श्रेणी में बांटे गए अन्य निजी अस्पतालों में भी मरीजों को चक्कर काटने पड़ रहे हैं। उन्हें इलाज से मना कर अस्पतालों से वापस लौटा दिया जाता है।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/indore/news/youth-died-of-corona-health-department-team-did-not-reach-to-collect-family-samples-even-on-third-day-127132246.html
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