Tuesday, September 29, 2020

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के नाम पर खपा रहे नकली दूध, प्रशासन नहीं कर रहा कार्रवाई

कोरोना काल में रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने के लिए दूध की बढती मांग को देखते हुए शहरवासियों को दूध के नाम पर मीठा जहर परोसा जा रहा है, यह नकली दूध गांव से लेकर शहर तक धड़ल्ले से बनाया जा रहा है। ज्ञात रहे कि नकली दूध बनाने वाले मोटा मुनाफा कमाने के चक्कर में लोगों कि जिंदगी से खिलवाड कर रहे हैं। अगर जल्दी ही सरकार और प्रशासन ने इस अवैध कारोबार को रोकने के ठोस कदम नहीं उठाए तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

नकली दूध से बने पनीर, खोवा, दूध और दूध से बनी मिठाईयां जहां ग्वालियर, मुरैना, शिवपुरी, पिनाहट, आगरा सप्लाई की जा रही हैं, वहीं इनका प्रयोग अंबाह में भी खूब हो रहा है। वैसे तो हर चीज में मिलावट आम हो गई है, लेकिन दूध में मिलावट करने वाला तंत्र इनदिनों कुछ अधिक ही सक्रिय हैं। मिलावट करने वाले लोग जमकर खूब मुनाफा कमा रहे हैं, खुले आम चल रहे इस धंधे से लगभग पांच सैकड़ा लोग जुड़े हैं, इन मिलावट खोरों ने धन कमाने के चक्कर में मानवीय संवेदना को तार-तार कर दिया है। इलाके में देखा जाए तो आजकल सिंथैटिक दूध (कृत्रिम दूध) बनाने वालों का धंधा जोरों पर चल रहा है।

साथ ही इस दूध से बना पनीर, खोवा, दूध और दूध से बनी मिठाईयां भी धड़ल्ले से बाजार में बिक रही हैं, वहीं नकली दूध और खोवा पनीर दिल्ली सहित अनेक जगह भेजा जा रहा है। वहीं स्वास्थय विभाग और प्रसाशन हाथ पर हाथ धरे बैठा है। वहीं सिंथैटिक दूध से क्या नुकसान हैं यह बताते हुए डॉक्टर डीएस यादव कहते है कि इस मिलावटी दूध से जहां इंसान को कई किस्म की बीमारियां हो सकती हैं, वहीं यह मर्दो को नपुंसक बना देता है। इसके अलावा इस का सीधा असर आतों, गुर्दो व आंखों की रोशनी पर पडता है।

कई गांवों में चल रहा नकली दूध बनाने का कारोबार
हम आप को बता दें कि अंचल में एक-दो जगह नहीं बल्कि ज्यादातर गांवों में यह नकली दूध बनाया जा रहा है। इस कारोबार में दूधिया वर्ग भी संलिप्त है। साथ ही इन दूधियों से दूध की खरीद करने वाले बड़े दूध डेरी मालिक भी शामिल हैं, जो अपने टैंकरों से इस मीठे जहर को अन्य जगह पहुंचाने का काम करते हैं। दूध सेंटरों के मालिकों और दूधियों ने अब नए-नए तरीके इजाद कर लिए हैं, जो जांच में खासी परेशानी पैदा करते हैं। सरसरी जांच में तो इस नकली दूध में फेट, घी और क्रीम पूरा मिलता है, गहराई से जांच के बाद ही इसका खुलासा हो सकता है।

मिलावट किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी
समय-समय पर दूधियों की सैंपलिंग की जाती है और दूध डेरियों पर छापा मार कर सैंपल लिए जाते हैं। होटल और रेस्टोरेंटों पर भी दूध से बनी मिठाई व अन्य खाद्य पदार्थ के सैंपल लेकर कार्रवाई की जाती है। दूध, पनीर, खोवा, मिठाई आदि में अगर मिलावट हो रही है तो किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऐसे लोगों की जानकारी जुटाई जाएगी।
अनिल परिहार, निरीक्षक खाद्य एवं औषधि विभाग अंबाह



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दूध का परिवहन करने वाले वाहनों में ही कृत्रित दूध बनाने की पूरी सामग्री मौजूद रहती है।


source https://www.bhaskar.com/local/mp/gwalior/ambah/news/fake-milk-is-being-consumed-in-the-name-of-increasing-immunity-administration-is-not-taking-action-127765010.html

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