कोरोना वायरस के संक्रमण से शहर को बचाने के लिए ड्यूटी में लगी पुलिस इस कठिन समय में लोगों की मदद भी कर रही है। एक जगह आधी रात को प्रसव पीड़ा से तड़प रही महिला को पुलिस ने अपनी एफआरवी से अस्पताल भिजवाया। एंबुलेंस को आने में देर लग रही थी, इसलिए पुलिस खुद ही प्रसूता को लेकर अस्पताल पहुंच गई। दूसरी जगह घर में अकेली वृद्धा, जिनका बेटा औरगांबाद में फंस गया है, उनके घर तक दवा पहुंचाई।
समय पर अस्पताल न ले जाते तो घर पर हो जाती डिलीवरी
हजीरा स्थित चार शहर का नाका के रहने वाले अजय सिंह चौहान की पत्नी को साढ़े आठ माह का गर्भ था। शुक्रवार रात करीब 1 बजे अचानक प्रसव पीड़ा उठी। घर के बाहर न कोई ऑटो थी न कोई अन्य इंतजाम। अजय ने पहले एंबुलेंस को कॉल लगाया। एंबुलेंस को आने में देर लग रही थी। अजय ने 100 नंबर डायल किया। एफआरवी के कंट्रोल रूम से तुरंत हजीरा थाने की एफआरवी को मैसेज मिला। टीआई हजीरा आलोक परिहार ने बताया कि एफआरवी स्टाफ ने अजय से फोन पर संपर्क किया। उसके घर पहुंच गए। प्रसूता को तत्काल अस्पताल ले गए। अस्पताल में कुछ देर बाद उसने बच्चे को जन्म दिया। अगर कुछ देर महिला को अस्पताल न ले जाते तो डिलीवरी घर पर ही हो जाती। अजय ने पुलिसकर्मियों को धन्यवाद दिया।
बेटे ने औरंगाबाद से पुलिस को किया फोन तो घर पर पहुंचाई दवा
गोला का मंदिर स्थित अमलतास कॉलाेनी के रहने वाले संजीव शुक्ला औरंगाबाद में नौकरी करते हैं। लॉकडाउन की वजह से वहीं फंस गए हैं। सीमा लॉक होने की वजह से आ नहीं पा रहे। घर में उनकी मां अकेली रहती हैं। उनकी दवा खत्म हो गई। जब संजीव काे पता लगा तो उन्होंने अपने एक दोस्त से बात की। दोस्त के जरिये सीएसपी महाराजपुरा रवि भदौरिया का नंबर मिला। संजीव ने सीएसपी भदौरिया को कॉल किया। सीएसपी भदौरिया ने बताया कि कॉल आने के बाद वाट्सएप पर पर्चा मांगा। लेकिन संजीव ने उनकी मां के डॉक्टर से फोन पर बात की थी। दवाओं के नाम ऑडियो रिकॉर्डिंग में थे। यह ऑडियो रिकॉर्डिंग उन्होंने वाट्सएप पर भेजी। सिपाही को भेजकर यह दवा मंगवाई। इसके बाद उनकी मां तक पहुंचाई।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/gwalior/news/a-woman-suffering-from-childbirth-is-rushed-to-the-hospital-given-medicine-to-a-lonely-old-woman-at-home-127151134.html
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