Saturday, April 4, 2020

तथ्यों को छुपाकर और व्यर्थ की याचिका दायर करने के 28 मामलों में साढ़े दस लाख रुपए का जुर्माना


तथ्यों को छुपाकर याचिका दायर करने के मामले में हाईकोर्ट का रुख काफी सख्त रहा है। याचिका चाहे मप्र शासन की ओर से पेश की गई हो या फिर निजी पक्षकार के द्वारा। जिस भी मामले में यह पाया गया कि तथ्यों को छुपाकर या तोड़-मरोड़कर याचिका पेश की गई। उन सभी मामलों में न केवल कोर्ट ने याचिका खारिज की, बल्कि सबक सिखाने के लिए जुर्माना भी लगाया। यहां तक की निज हित को साधते हुए जनहित याचिका लगाने वालों पर भी कोर्ट ने खासी सख्ती दिखाई। अधिकांश मामलों में कोर्ट ने ऐसी याचिकाओं को समय की बर्बादी बताते हुए भारी जुर्माना लगाया। अप्रैल 2018 से लेकर जनवरी 2020 तक कुल 28 मामलों में हाईकोर्ट ने कुल साढ़े दस लाख रुपए जुर्माना लगाया। यह राशि मप्र हाईकोर्ट की स्टेट सर्विसेज अथारिटी में जमा कराई गई है।

अपने हित के लिए लगाई जनहित याचिका, 25 हजार जुर्माना भरना पड़ा

कृष्णदत्त शर्मा ने जनहित याचिका दायर करते हुए मुरैना स्थित ग्राम मुढ़िया खेड़ा में तालाब की जमीन पर हुए अतिक्रमण को हटाने की मांग की। याचिका में कुछ लोगों पर अतिक्रमण करने का आरोप भी लगाया। हालांकि, कोर्ट ने माना कि राजस्व अभिलेख के परीक्षण से स्पष्ट है कि जमीन की सरकारी नहीं है और न ही उस पर अतिक्रमण किया गया है। इससे यह सिद्ध होता है कि निजी हित को साधने के लिए याचिका दायर की गई। कोर्ट ने याचिकाकर्ता पर 25 हजार रुपए जुर्माना लगाया।

गलत जानकारी देने पर निगमायुक्त पर लगाया 50 हजार का जुर्माना: ग्वालियर में अवैध होर्डिंग्स पर कार्रवाई की मांग करते हुए जनहित याचिका दायर की गई। इस मामले में कोर्ट ने निगमायुक्त संदीप माकिन से जवाब पेश करने के लिए कहा। निगमायुक्त ने जो जवाब पेश किया, उसे सही नहीं मानते हुए कोर्ट ने कहा, गलत जानकारी देकर गुमराह करने का प्रयास किया गया है। ऐसा लगता है कि निगम के जिम्मेदार अधिकारी अपने कर्तव्यों का सही तरीके से पालन नहीं कर रहे हैं। इस पर कोर्ट ने निगमायुक्त पर 50 हजार रुपए भरने का आदेश दिया।

जानकारी एक नजर में: {कोर्ट को गुमराह करने के कुल 9 मामलों में 6.05 लाख जुर्माना लगा। {व्यर्थ की याचिका दायर के कुल 14 मामलों में 3.10 लाख जुर्माना लगा। { शासन पर व्यर्थ की अपील पेश करने के 5 मामलों में 1.35 लाख जुर्माना लगा।


तथ्य छुपाने पर लगाया दो लाख का रुपए का जुर्माना, 30 दिन में भरने का था आदेश

अमित कुमार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए कलेक्टर शिवपुरी की कार्रवाई को चुनौती दी, जिसमें कलेक्टर द्वारा उनके ट्रक को अवैध रेत उत्खनन के मामले में जब्त किया था। याचिका में बताया गया कि जिस समय प्रशासन ने ट्रक पकड़ा,उस समय ट्रक खाली था। जबकि शासन ने अपने जवाब में बताया कि जिस समय प्रशासन की टीम ने कार्रवाई की, उस समय ट्रक में रेत भरी हुई थी। बाद में कलेक्टर के आदेश में याचिकाकर्ता ने कंपाउंडिंग के लिए सहमति प्रदान की। कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता ने तथ्य को छुपाकर याचिका पेश की, जिस कारण कोर्ट का कीमती समय बर्बाद हुआ। इस कारण कोर्ट ने 30 दिन के भीतर याचिकाकर्ता को 2 लाख रुपए जुर्माना भरने का आदेश दिया था।



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source https://www.bhaskar.com/mp/gwalior/news/mp-news-penalty-of-rupees-one-and-a-half-million-rupees-in-28-cases-of-concealing-facts-and-filing-a-futile-petition-070606-6972480.html

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