लॉकडाउन को एक माह पूरा हो गया है। हर कोई इससे परेशान है लेकिन अच्छा पहलू यह भी है कि जिलेवासियों ने एक माह में इतना वायु प्रदूषण कंट्रोल किया। जितना तमाम प्रयास व बड़ी राशि खर्च करके 2 साल में भी कम नहीं कर पाते। लॉकडाउन के दौरान जिले में 8 फीसदी तक पेट्रोल व डीजल की खपत रह गई है। इससे एक माह में 2 करोड़ 19 लाख 33हजार किलो कार्बन डाइ ऑक्साइड हवा में घुलने से रुक गया। यही नहीं इतने पेट्रोल व डीजल से करीब 2 करोड़ 56 लाख 50 हजार किमी चार पहिया वाहन चलते जिससे धूल हवा में उड़ती। एक माह के लॉकडाउन ने हमने प्रदूषण को दो साल पीछे कर दिया।
भारत सरकार द्वारा कोरोना की रोकथाम के लिए लगाए लॉकडाउन में अर्थव्यवस्था खत्म-सी हो गई, लोग घरों में रहते हुए परेशान होने लगे हैं। पुलिस-प्रशासन व स्वास्थ्य अमला दिन-रात ड्यूटी करके पूरी तरह से थक गया। इन सबके बीच एक अच्छी खबर यह भी है कि नीमच जिले में हमने वायु प्रदूषण को करीब 2 साल पीछे कर दिया है। एक माह में हमने इतना प्रदूषण कंट्रोल किया जितना हम चाहकर भी 2 साल में नहीं कर पाते। पेट्रोल पंप संचालक व जिले के सेल्स मैनेजर से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार जिले में पेट्रोल-डीजल की खपत ना के बराबर रह गई है। जिले के 57 पेट्रोल पंप है जहां सामान्य दिनों में हर दिन करीब 1 लाख 71 हजार लीटर पेट्रोल और 3 लाख 99 हजार लीटर डीजल की खपत होती थी।
पेट्रोल करीब 1 करोड 33 लाख 38 हजार रुपए का और डीजल करीब 2 करोड़ 75 लाख 31 हजार रुपए का होता है। यह खपत 10-15 फीसदी रह गई है। 30 से 31 लाख रुपए का ही पेट्रोल-डीजल बिक रहा है। हर दिन करीब साढ़े 3 करोड़ 46 लाख 10 हजार 400 रुपए की बचत हो रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक एक लीटर पेट्रोल व डीजल के जलने पर वाहनों से 1.7 किलो कार्बन डाइ ऑक्साईड निकलती है। जिलेवासियों ने 1 लाख 31 हजार लीटर पेट्रोल और 3 लाख 53 हजार 400डीजल रोज कम जला रहे है तो उससे एक माह में करीब 2 करोड़ 19 लाख 33 हजार किलो कार्बन डाइ ऑक्साईड का उत्सर्जन कम हो रहा है।
लॉकडाउन में नहीं मना सके त्योहार: नवरात्रि से लेकर गुड़ी पड़वा व गुडफ्राइडे तक नहीं मना पाए : लॉकडाउन के कारण धार्मिक व सामाजिक कार्यक्रम पर राेक है। इस कारण चैत्र नवरात्रि, गुड़ीपड़वा, बैसाखी पूर्व, गुडफ्राइडे, शब-ए-बरात, रामनवमी, गणगौर व्रत-पूजन, महावीर जयंती, हनुमान जयंती घर पर मनाई।
ट्रेनें, फैक्ट्रियां व पॉवर प्लांट से होने वाला प्रदूषण भी रुका
1.प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार एक चार पहिया वाहन एक किमी चलती है तो वह एक से सवा किलो धूल को हवा में उड़ाता है। एक लीटर में चार पहिया वाहन औसत 15 किमी चलता है तो 5 लाख 70 हजार लीटर पेट्रोल व डीजल में वाहन करीब 85 लाख 50 हजार किमी चलता है। इससे इतनी किलो ही धूल हवा में उड़ाती है। इस लॉकडाउन से यह धूल हवा में घुलने से रुक गई। यही नहीं इसके अतिरिक्त ट्रेनें, फैक्ट्रियां व पॉवर प्लांट से होने वाला प्रदूषण भी कम हुआ। इससे आने वाले समय में फायदा मिलेगा।
पौधों की ग्रोथ में तेजी आने लगी
2.जानकारों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि मानव प्रकृति का दोहन तेजी से कर रहा है। वह पृथ्वी को डिग्रेड कर रहा है। सदियों से एक बात चली आ रही कि जब-जब प्रकृति पर संकट आएगा तो प्राकृतिक प्रकोप व प्रलय आएंगे। इसे इसी से जोड़कर देख सकते हैं। यह प्रकृति का पलटवार है। प्रदूषण कम होने से पौधों की पत्तियों व फूलों की ग्रोथ में तेजी आने लगी है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि हाेगी
3.प्रदूषण नियंत्रित होने से निश्चित ही प्रकृति व ग्लोबल वार्मिंग में काफी राहत मिलेगी। इसका असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी देखने को मिलेगा। सीएमएचओ डॉ. संगीता भारती ने बताया वायु प्रदूषण कम होने से सबसे अधिक फायदा अस्थमा के रोगियों को मिलेगा। उन्हें समस्या कम होगी व बीमारी का खतरा भी कम होगा। वहीं वायु प्रदूषण के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, जिसमें वृद्धि आएगी। इससे आने वाले समय में बीमारियों का खतरा भी कम होगा।
पर्यावरण व लाेगों के लिए राहत की बात
नीमच जिले में 2 करोड़ 19 लाख 33हजार किलो से ज्यादा कार्बनडाइ आक्साइड का उत्सर्जन कम हुआ। वहीं रोजाना 85 लाख 50 हजार किलो से ज्यादा धूल हवा में नहीं मिली। इसी तरह देश व दुनिया में बड़े स्तर पर प्रदूषण को कम किया। इसे हम कंट्रोल करके दो साल में भी कम नहीं कर पाते वह एक माह के लॉकडाउन में कम हो गया है।
9 मुक्तिधाम में 34 दिन में 46 शव का अंतिम संस्कार हुआ
शहर के 9 मुक्तिधाम में 34 दिन में 46 शव का अंतिम संस्कार-2 लावारिस भी : शहर में छोटे-बड़े 9 मुक्तिधाम है। लॉकडाउन में 22मार्च से लेकर 24अप्रैल तक 34 दिन में 46 मृतकों का अंतिम संस्कार 9 मुक्तिधाम में हुआ। नीमच सिटी रोड स्थित मुक्तिधाम में 25, ग्वालटोली मुक्तिधाम में 5, बघाना मुक्तिधाम में 9 और नीमच सिटी क्षेत्र के 4 मुक्तिधाम में 7 मृतकों का अंतिम संस्कार हुआ।
छोटे दुकानदारों के सामने रोजी-रोटी का संकट
लॉकडाउन में छोटे दुकानदार व गुमटियां लगाकर घर-परिवार चलाने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 1 माह से काम बंद है। इनमें कुछ लोगों से चर्चा कि तो बोले रोजी-रोटी का संकट तो है, लेकिन समाज में रहना है। कैसे बोले कि हमारी स्थिति खराब है। लंबे समय का व्यवहार काम आ रहा है, दुकानदार के साथ दोस्त भी उधार देकर मदद कर रहे हैं। कुछ का कहना था कि समाज के लोग भी हम जैसे परिवारों की मदद कर रहे हैं।
ट्रैफिक : 31 दिन में 4 हादसे
नीमच जिले में सड़क हादसे 97 प्रतिशत कम हो गए। एएसपी राजीव मिश्रा ने बताया हर महीने 80 से 90 सड़क हादसे होते थे। प्रतिवर्ष 84 से 94 लोग जान गंवाते थे। लॉकडाउन लागू के बाद 22 मार्च से 23 अप्रैल तक 31 दिन में सिर्फ 4 हादसे हुए इसमें 1 व्यक्ति की मौत हुई और 3 लोग घायल हुए।
पुलिस: अपराधों में कमी आई
सामान्य दिनों में होने वाले अपराध व लघु अधिनियम के तहत पुलिस द्वारा की जाने वाली कार्रवाई में काफी अंतर आ गया। एसपी मनोज कुमार राॅय ने बताया 1 जनवरी से 21 मार्च तक भारतीय दंड विधान की विभिन्न धाराओं में 443 व लघु अधिनियमों में 460 केस दर्ज हुए। लॉकडाउन में 22 मार्च से 23 अप्रैल यह घटकर 144 व 20 रह गए।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/ratlam/neemuch/news/219-lakh-kg-of-carbon-dioxide-did-not-dissolve-in-air-in-a-month-due-to-locking-of-vehicles-pollution-down-127235069.html
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