34 साल से प्रदेश के सहायक शिक्षक एक पद पर काम करने के लिए मजबूर हैं। हजारों सहायक शिक्षक हर साल बिना पदोन्नति के सेवानिवृत्त होते जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने दो वर्ष पूर्व 2018 में सहायक शिक्षकों को एकमुश्त पदोन्नत कर पदनाम देने का वादा किया था। लेकिन आज तक शिक्षक पदनाम नहीं दिया है। जिससे शिक्षक हतोत्साहित हो रहे हैं। अगर जल्द ही पदनाम नहीं मिला तो प्रदेश के शिक्षक आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
यह चेतावनी मप्र शिक्षक संघ ने गुरुवार को मुख्यमंत्री के नाम छः सूत्रीय ज्ञापन सौंपते हुए कलेक्टर अनुराग वर्मा को दी है। इस दौरान जिलाध्यक्ष डॉ नरेश सिंह सिकरवार के नेतृत्व में सात सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल ने कलेक्टर से मुलाकात की। ज्ञापन सौंपने के बाद जिला अध्यक्ष सिकरवार ने बताया कि प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षकों को पुरानी पेंशन व्यवस्था का लाभ नहीं दिया गया है। काल्पनिक वेतन वृद्धि की जगह वास्तविक वेतन वृद्धि में परिवर्तित कर एरियर का भुगतान भी नहीं किया गया है।
लंबित मंहगाई भत्ता की किश्तों का भुगतान होने से शिक्षक परेशान हैं। सातवें वेतनमान की अंतिम किश्त का भुगतान मई 2020 में होना था, जो अभी तक नहीं हुआ है। जिले के 50 प्रतिशत स्कूल प्राचार्य व प्रधानाध्यापक विहीन है। ऐसे में छात्रों की शैक्षणिक गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने वालों में रामबरन सिंह पायथा, रामबरन सिकरवार, रामौतार पटेल, विमलेश यादव, रामावतार सिकरवार, रामबरन सिकरवार, सतंजय मिश्रा, रघुराज परमार, डॉ हरेंद्र तोमर आदि प्रमुख रूप से शामिल थे।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/gwalior/morena/news/not-a-single-promotion-in-34-years-of-service-teachers-will-agitate-if-demand-is-not-met-127951966.html
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