Saturday, November 28, 2020

दूसरे हाथी की तलाश के लिए ड्रोन कैमरों के साथ 100 लोगों की टीम कर रही सर्चिंग

शुक्रवार को मोहास के पास करंट भरे तारों की चपेट में आकर हाथी की मौत के बाद वन विभाग ने कान्हा-पेंच के एक्सपर्ट बुलाकर दूसरे हाथी की तलाश शुरू की। 100 कर्मचारियों की 10 अलग-अलग टीमें जंगल की खाक छानने में जुटी हुईं हैं, इसके अलावा ड्रोन कैमरों से लापता हाथी की तलाश की गई, जिसकी पहली लोकेशन शुक्रवार की रात 2 बजे तक बरगी-मंडला के बीच नर्मदा तट पर मिली थी, रात में ही वह नदी पार करके मंडला जिले में चला गया था।

उसकी आखिरी लोकेशन शनिवार की शाम 7 बजे तक मंडला वन मंडल के बीजाडांडी से लगे कोंड्रा तालाब के पास दर्ज की गई। दूसरे हाथी के जिंदा रहने पर वन विभाग के अफसर काफी राहत महसूस कर रहे हैं, लेकिन लोगों का कहना है कि काश ये सारी कवायद और सक्रियता अफसरों ने पहले कर ली होती तो शायद पहला हाथी जिंदा होता।

साथी की मौत से बेखबर हो सकता है दूसरा हाथी
विशेषज्ञों के अनुसार हाथी सबसे ज्यादा समझदार और भावुक वन्य प्राणी होता है। वह जंगल में घूमने के दौरान सामान्य वॉक करता है, मस्ती के दौरान वह अपनी सूँड और सिर हिलाकर अपने ग्रुप को संदेश देता है, लेकिन जब हाथी किसी परेशानी या बेचैनी की हालत में होता है तो वह काफी तेजी से भागता है।

ड्रोन कैमरों में जो वीडियो और ऑडियो कैद हुए, उनमें हाथी तेज गति से भाग रहा है। ड्रोन कैमरों में कैद हुईं उसकी कुछ आवाजें सुनकर अनुमान लगाया जा रहा है कि वो शायद अपने साथी की मौत से बेखबर है। उसे लग रहा है कि उसका साथी भटक गया है, इसलिए वो लगातार उसे कॉल कर रहा है।

शनिवार की शाम मंडला रेंज के कालपी डिपो के पास कुछ ग्रामीणों का तेजी से चल रहे हाथी से सामना भी हुआ, लेकिन हाथी बिना रुके आगे बढ़ता चला गया। जानकारों का मानना है कि जिंदा हाथी को वो रूट मिल गया है, जहाँ से वह अपने साथी के साथ जबलपुर पहुँचा था।

घंटों बाद भी वही सवालः दूसरा हाथी सुरक्षित है भी कि नहीं?
एक हाथी की मौत के बाद ही यह सवाल उठने लगा कि दूसरे गजराज कहाँ हैं। घंटों बाद वन विभाग ने पहले यह दावा किया कि ड्रोन कैमरे से लापता हाथी को मंडला जिले में बीजाडांडी के पास ट्रैस किया गया है, लेकिन बाद में जब उनसे इसके साक्ष्य माँगे गए तो वही अधिकारी यह कहने लगे कि सिर्फ सूचना मिली है, जिसे पुख्ता किया जा रहा है। कुल मिलाकर अभी भी यह सवाल, सवाल ही है कि दूसरा हाथी सुरक्षित है भी कि नहीं।

दो शिकारी गिरफ्तार, एक फरार
इधर हाथी की मौत के मामले में वन विभाग ने करंट भरे तार बिछाने वाले दो शिकारियों को गिरफ्तार किया है। वन विभाग के अनुसार पकड़े गए शिकारियों में डुंगरिया मोहास निवासी पंचम आदिवासी और मुकेश पटेल शामिल हैं। दोनों ने जंगली सुअरों के शिकार के लिए तार बिछाने की बात कबूल की है, लिहाजा दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया है, वहीं एक अन्य की तलाश की जा रही है।

हालाँकि वन विभाग की इस स्क्रिप्ट पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। कुछ ग्रामीणों का आरोप है कि करंट के तार सुअरों के लिए नहीं, बल्कि हाथी के लिए ही बिछाए गए थे, लेकिन घायल होने के बाद हाथी मुँह के बल गिरा और उसके दाँत जमीन में धँस गए थे, जिसके कारण शिकारी दाँत निकालने में सफल नहीं हो पाए।

डेढ़ फीट झुलसी थी सूँड
मृत हाथी का पीएम करने वाले चिकित्सक दल के अनुसार करंट सूँड में लगा था, जिससे डेढ़ फीट सूँड करंट से झुलस गई थी। करंट लगने के बाद हाथी लगभग 200 मीटर आगे आकर गिरा था। दोनों हाथी साथ-साथ चल रहे थे। ऐसे में आशंका जताई जा रही थी कि दूसरा हाथी भी करंट की चपेट में आकर किसी अनहोनी का शिकार न हो गया हो, लेकिन उसकी जीवित लोकेशन मिलने पर सभी लोग राहत महसूस कर रहे हैं।

हाथी की मौत को लेकर होंगे रिसर्च
स्कूल ऑफ वाइल्ड लाइफ फाॅरेंसिक लैब जबलपुर में हाथी की मौत को लेकर कई तरह के रिसर्च होंगे, वहीं उसका बिसरा जाँच के लिए सागर लैब को भेजा जाएगा। इससे पता चलेगा कि मौत की वजह सिर्फ करंट ही था या इसके साथ कोई जहरीला पदार्थ तो नहीं खिलाया गया था। हाथी के दाँतों को प्रोटोकॉल के तहत सरकारी खजाने में जमा कराया जाएगा।

डीएफओ की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
सबसे ज्यादा सवाल डीएफओ अंजना सुचिता तिर्की की कार्यप्रणाली पर खड़े किए जा रहे हैं, क्योंकि जबलपुर आने से पहले वे कान्हा टाइगर रिजर्व जैसे नेशनल पार्क की डायरेक्टर थीं। वन्य जीवों की सुरक्षा और उनके रेस्क्यू से जुड़ीं सभी जानकारियाँ भी उन्हें होंगी, लेकिन उनकी तरफ से पहले ऐसे कोई प्रयास क्यों नहीं किए गए यह बड़ा प्रश्न है।



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Searching team of 100 people with drone cameras to search for another elephant


source https://www.bhaskar.com/local/mp/jabalpur/news/searching-team-of-100-people-with-drone-cameras-to-search-for-another-elephant-127960560.html

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