सिंचाई विभाग के 15 आवासों में शिक्षा विभाग के शिक्षक, कर्मचारियों का कई सालों से कब्जा है। खुद के आवास होने के बाद भी शिक्षक सरकारी आवासों में रह रहे हैं। मामला तब उजागर हुआ जब कार्यपालन यंत्री विनोद कुमार श्रीवास्तव ने शिक्षा जलकर व बिजली का बिल का बकाया पैसा जमा कराने के लिए शिक्षा अधिकारी को पत्र कहा।
आवास आवंटन के मामले में जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता के आदेश हैं कि विभागीय कर्मचारियाें के अलावा अन्य किसी महकमे के कर्मचारियों काे सिंचाई विभाग के आवास आवंटित किए जाएं। इस आदेश की अनदेखी करते हुए कार्यपालन यंत्री ने शिक्षा विभाग के 15 कर्मचारियों को कॉलोनी के सरकारी आवास आबंटित कर दिए । यहां बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है कि जिन लोगों के खुद के आवास मध्यप्रदेश में हैं उनको सरकारी आवासों में रहने का लाभ दिया गया है।
आलम यह है कि 15 आवासों को शिक्षक व बाबुओं के नाम आवंटित कर दिए जाने से विभाग के कर्मचारियों को रहने के लिए आवास नहीं मिल पा रहे हैं। हालांकि यह मामला दबा हुआ था लेकिन जब शासकीय प्राथमिक विद्यालय जारौली में पदस्थ शिक्षक राहुल चतुर्वेदी को एसडीएम की अनुशंसा के बाद भी सिंचाई कॉलोनी में आवास आबंटित नहीं किया गया तो उन्होंने सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांग कर यह खुलासा किया कि जल संसाधन विभाग के आवास 15 शिक्षक व बाबुओं को नियम विरुद्ध तरीके से आवंटित किए गए हैं।
वहीं जल संसाधन विभाग भोपाल के प्रमुख अभियंता के आदेश के मुताबिक, विभागीय आवास आवंटन समिति की बैठक का यह है कि जल संसाधन विभाग के द्वारा निर्मित आवासी अथवा गैर आवासीय भवनों को केवल जल संसाधन विभाग के मूल अधिक कर्मचारी व अधिकारियों कोई आवंटित किए जाएं। अगर पूर्व में अन्य विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों को आवासीय भवन आवंटित किए गए हैं तो उन्हें तत्काल निरस्त किया जाए लेकिन विभाग के अधिकारियों ने ऐसे लोगों को आवास आवंटित किए हैं जिनके स्वयं के घर सबलगढ़ में ही बने हुए हैं जिन्हें वह किराए से चला रहे हैं लेकिन निवास जल संसाधन विभाग के आवासीय भवन में कर रहे हैं जो कि नियम के विरुद्ध है। उदाहरण के तौर पर शिक्षक हरनाम रावत, कैलाश चंद शर्मा व सुभाष शर्मा के खुद के आवास सबलगढ़ में बने हैं लेकिन उनके नाम सिंचाई विभाग के आवास भी आवंटित हैं।
जानिए...ऐसे हुआ आवास आवंटन की गड़बड़ी का खुलासा
जल संसाधन विभाग सबलगढ़ के कार्यपालन यंत्री विनोद श्रीवास्तव ने 30 सितंबर को शिक्षा विभाग को लेटर बनाकर भेजा कि जो शिक्षक व शिक्षा विभाग के कर्मचारी जल संसाधन विभाग के आवासीय भवनों में निवासरत हैं वह जलकर एवं भवन कर का पैसा 3 दिन में जमा कराएं। लेकिन कुछ ने पैसा जमा कराया और कुछ अभी तक डिफाल्टर चल रहे हैं। ईई के उक्त पत्र से स्पष्ट हो गया कि उन्होंने प्रमुख अभियंता के आदेश की अवहेलना होकर उनका कृत्य नियम विरुद्ध है। इस संबंध में जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री वीके श्रीवास्तव ने बताया कि अन्य विभाग के अधिकारी व कर्मचारी जल संसाधन विभाग के आवासीय भवनों में निवासरत है उन्हें हम नोटिस जारी करेंगे और जल्द ही भवनों को खाली कराया जाएगा।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/gwalior/morena/news/even-after-the-ban-of-enc-the-executive-engineer-allocated-15-accommodation-teachers-of-irrigation-department-127952014.html
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