Saturday, June 13, 2020

रक्षक बने भक्षक: बाघ के नाखून निकाले, जला दिया शव

पैसे कमाने और अमीर बनने के लालच में टाइगर की मूंछ के बाल, नाखून व दांत के माध्यम से तंत्र पूजा करने के मामले में नया खुलासा हुआ है। इसमें चार और वन कर्मियों को गिरफ्तार किया है। रक्षक से भक्षक बने इन वन कर्मियों ने मिलकर टाइगर के दांत, नाखून, मूंछ के बाल व कुछ अंग निकाले और फिर उसके शव को जला दिया था। सभी इस तरह का श्वांग रच रहे थे कि उन्हें घटना की जानकारी ही नहीं है। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक घटना के मुख्य सूत्रधार वनरक्षक सुनील मर्सकोले पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया था। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वनपाल ढिमरू वारेलाल, वनरक्षक दीपक धुर्वे, सुरक्षा श्रमिक झनकलाल उइके व टीकाराम वैद्य भी उसके साथ इस कुकृत्य में शामिल रहे हैं। अभी वन अपराध के इस मामले की विवेचना जारी है। गिरफ्तार किए गए लोगों की संख्या अब 8 हो गई है, जिनमें 5 आरोपी वन विभाग के ही शामिल हैं।

सुबह-सुबह जलाया शव - गिरफ्तार वनकर्मियों से पूछताछ में सामने आया है कि पिंडरई के राजस्व क्षेत्र में एक बाघ का शव पड़े होने की सूचना एक ग्वाला द्वारा वनरक्षक सुनील मर्सकोले को दी गई थी। इसके बाद वह ढिमरू, दीपक, झनकलाल व टीकाराम के साथ रात को मौके पर पहुंचा, जहां टाइगर का शव पाया गया, जिसके शरीर पर चमड़ा नहीं था। मौके पर सभी ने शव जालने का निर्णय लिया। दूसरे दिन सुबह-सुबह पांचों ने मौके पर जाकर टाइगर का शव जला दिया। शव जलाने के पहले वनरक्षक मर्सकोले ने टाइगर के पंजे से 2 नाखून निकलवा लिए थे।

पूजा करते वक्त दबोचा
खवासा वन परिक्षेत्र के रिड्डी गांव के पास रात को शिव मंदिर में पैसा कमाने के लालच में झड़ती पूजा करते हुए वन विभाग की टीम ने 4 लोगों को गिरफ्तार किया था। मौके से पुलपुला बीट में पदस्थ वनरक्षक सुनील मर्सकोले, खेमराज सलामे, रामकशोर सलामे व राजू बरकड़े नामक ग्रामीणों को गिरफ्तार किया गया था, जबकि बालाघाट से बुलाया गया तांत्रिक फरार हो गया था। इस मामले में सभी आरोपियों पर वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की घारा 39(2,3,3ख), 48क, 50(4,5,6) 51,52 के तहत मामला दर्ज किया गया था। अब गिरफ्तार लोगों की संख्या 8 हो गई है, वहीं जांच का क्रम जारी है।
किसी को नहीं लगी भनक
पेंच नेशनल पार्क व उससे लगे जंगलों में एक के बाद एक टाइगर सहित अन्य वन्य प्राणियों के शव पाए जा रहे हैं। उनका लगातार शिकार किया जा रहा है। पूर्व में कई मामले सामने आ चुके हैं। शव पाए जाने पर जिम्मेदारों द्वारा तरह-तरह की बातें की जाने लगती हैं। अब तो वनकर्मियों द्वारा ही टाइगर के शव को जलाकर उसके अंग निकालने का मामला सामने आ गया है। आश्चर्य तो इस बात का है कि गश्ती दल अपनी ड्यूटी किस तरह बजा रहे हैं वहीं इससे अफसरों की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। अफसर फील्ड पर जाकर औचक जांच करने की बजाय जिला मुख्यालय में बैठकर ही खानापूर्ति कर रहे हैं।
इनका
कहना है
इस मामले में चार अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पूछताछ में सामने आया है कि पिंडरई राजस्व क्षेत्र में इनके द्वारा पूर्व में गिरफ्तार वनरक्षक के साथ मिलकर टाइगर के शव को जला दिया गया था। मामले में जांच जारी है।
- आरएस कोरी,
सीसीएफ, सिवनी



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source https://www.bhaskar.com/local/mp/jabalpur/news/guardians-become-eater-tiger-nails-removed-burnt-corpse-127408068.html

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