एक ओर जहां युवा अच्छी पढ़ाई कर सुकून वाली नौकरी की तलाश कर अपना जीवन जीने की चाहत रखता है, वहीं नगर के एक युवा ने इंजीनियरिंग की शिक्षा हासिल करने के बाद सेना में जाने का फैसला लिया। नगर के युवा अश्विन सिंह राजपूत ने सेना में जाने की ठानी और आज उसे उच्च पद पर पहुंचने में सफलता भी मिली। देहरादून में शनिवार को सेना की पासिंग आउट परेड का आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम में सेना के समस्त वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। पूर्व के आयोजन अनुसार इसमें परिवार के सदस्य उपस्थित रहते हैं और वे ही अपने बालक को कंधों पर सितारे लगाते हैं, लेकिन कोरोना के कारण इस आयोजन में परिवार का कोई सदस्य उपस्थित नहीं हो सका, तो सेना अधिकारियों ने अपने परिवार के साथ देश के नए योद्धाओं के लिए सितारे लगाए। इस आयोजन में देश के 333 जेंटलमेन केंडीडेट का चयन करके उन्हें सेना का लेफ्टिनेंट बनाया गया है।
इस बार घर जाने की इजाजत नहीं मिली
इस आयोजन के बाद चयनित युवाओं को घर जाने की इजाजत मिलती थी, लेकिन देश की विपरीत परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें सीधे ड्यूटी पर जाने के निर्देश दिए गए। अश्विन सिंह राजपूत नगर के गौरीशंकर वार्ड में रहने वाले जल संसाधन संभाग दमोह के उपयंत्री महेश राजपूत के इकलौते पुत्र है। मां मुक्ता राजपूत गृहिणी हैं। हाल ही में उन्होंने कोरोना काल के दौरान करीब 3 हजार मास्क का निशुल्क वितरण किया है।
अश्विन की बड़ी बहन मनाली सिंह विदिशा के इंजीनियरिंग कालेज एसएटीआई में प्रोफेसर हैं। वहीं छोटी बहन मृणाल सिंह बैंगलोर में इंजीनियर हैं। अश्विन की प्रारंभिक शिक्षा हटा के निजी स्कूल में हुई, इसके बाद कम्प्यूटर साइंस से बीटेक डिग्री जेपी इंजीनियरिंग कालेज गुना से प्राप्त की। जनवरी 2019 में भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून से प्रशिक्षण प्राप्त किया। आज पासिंग आउट परेड के बाद उसे देश की सेवा के लिए भेजा गया। परिजनों को इस आयोजन में शामिल नहीं हो पाने का मलाल तो है लेकिन खुशी इस बात की ज्यादा है कि मेरा लाल अब पूरे देश का सपूत बन गया है। आयोजन का लाइव कार्यक्रम परिजनों ने टीवी चैनल पर देखा।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/sagar/hata/news/haths-ashwin-became-lieutenant-in-the-army-127408066.html
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