Wednesday, June 10, 2020

स्वसहायता समूहों के बनाए मास्क बेचने के लिए रूमाल या गमछा लगाए लोगों पर भी कर रहे 50 रु. का जुर्माना

कोरोना संक्रमण से बचने के लिए मास्क लगाना जरूरी है। मास्क न होने पर गमछा या रूमाल का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। इसके निर्देश राज्य शासन जारी भी कर चुका है लेकिन श्योपुर में प्रशासन के अपने नियम हैं। यहां बाजार में गमछा व रूमाल से चेहरा ढंककर आने-जाने वाले लोगों के 50-50 रुपए के चालान बनाए जा रहे हैं और इसके बदले में उन्हें एक मास्क दिया जा रहा है।
शहर में मास्क को लेकर तीन दिन से सख्ती की जा रही है। प्रशासनिक अफसर, पुलिस व नपा अमले के साथ बिना मास्क के घूमने वाले लोगों के साथ ही उन लाेगाें पर भी जुर्माना लगा रहे हैं जो गमछा-रूमाल लगाकर निकल रहे हैं। प्रत्येक व्यक्ति से 50 रुपए जुर्माना वसूला जा रहा है। तीन दिन में नगर पालिका के माध्यम से अफसर सिर्फ शहर में करीब 30 हजार रुपए जुर्माना वसूल चुके हैं। इसे लेकर सलापुरा के नौशाद मोहम्मद, रामबास ने फेसबुक पर जुर्माने की पर्ची डालते हुए लिखा कि यहां प्रशासन के शासन से हटकर अलग ही नियम हैं। गमछा व रूमाल लगाए होने के बाद भी जुर्माने किए जा रहे हैं और विरोध पर अफसर पुलिस की धमकी दे रहे हैं। जब इस संबंध में नगर पालिका सीएमओ से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उन्हें तो वरिष्ठ अफसरों के अनुसार ही चलना पड़ रहा है। उनके कर्मचारी वरिष्ठ अधिकारियों के साथ होते हैं और अफसर जिसका चालान बनाने के लिए कहते हैं, उनका चालान काट देते है। इधर कलेक्टर खुद को पूरे मामले से अनजान बता रहे हैं।

वरिष्ठ अफसरों के निर्देश पर काटे चालान
हम क्या कर सकते हैं, हमारे कर्मचारी तो वरिष्ठ अधिकारियों के साथ होते हैं। वह जिसका कहते हैं, उसका चालान काट देते हैं। यह कार्रवाई तहसीलदार व अन्य वरिष्ठ अफसरों द्वारा की जा रही है। वरिष्ठ अफसरों से निर्देश के बाद ही हमने चालान बनाए हैं।
आनंद शर्मा, सीएमओ, श्योपुर

गमछा या रूमाल लगाने पर जुर्माना नहींं
सरकार के नियमों के अनुसार ही कोविड-19 की रोकथाम की जाएगी। अब तक मेरे संज्ञान में यह मामला नहींं आया है। किसके जुर्माने ऐसे हुए हैं, मैं दिखवाता हूं। गमछा व रूमाल लगाने वाले किसी व्यक्ति के जुर्माने नहीं होंगे।
राकेश कुमार श्रीवास्तव, कलेक्टर, श्योपुर

सोशल मीडिया पर विरोध: लोग जुर्माना की रसीद की फोटो डाल कर प्रशासन को कोस रहे

प्रशासन द्वारा लगातार गमछा व रूमाल लगाने वालों पर भी की जा रही जुर्माने की कार्रवाई का विरोध सोशल मीडिया पर जमकर हो रहा है। फेसबुक पर आम लोग इस कार्रवाई का विरोध करते हुए शासन-प्रशासन के खिलाफ लिख रहे है। साथ ही जुर्माने की रसीद व प्रशासन द्वारा दिए गए मास्क के भी फोटो अपलोड कर रहे हैं। कांग्रेस के प्रदेश सचिव गिर्राज चौधरी ने भी अपनी फेसबुक पर इसका विरोध किया। उन्होंने लिखा कि आज लोग बेरोजगार हैं और यहां गरीबों को भी जुर्माने से नहींं बख्शा जा रहा है।

यह है हकीकत... 11 रुपए का मास्क 50 रुपए में बिक सके, इसलिए जुर्माने पर दिया जा रहा है जोर

दरअसल हकीकत यह है कि एनआरएलएम के स्व-सहायता समूहों द्वारा कोविड-19 के तहत पीपीई किट और मास्क बनाए गए हैं। इन्हें क्वालिटी खराब होने पर जब मार्केट में 11 रुपए में भी दुकानदारों व लोगों ने नहींं खरीदा तो पहले इन्हें स्वास्थ्य विभाग को बेचने का प्रयास किया गया। एक पीपीई किट 600 रुपए में देने के लिए स्वास्थ्य विभाग से एनआरएलएम के अफसरों ने अन्य अफसरों से दबाव डलवाकर ऑर्डर भी हासिल कर लिया है।

इसी तरह कैप व मास्क का भी ऑर्डर जबरन ले लिया गया, लेकिन यहां सीमित मात्रा में ही माल एनआरएलएम बेच पाया। इसे बाजार में भी मेडिकल स्टोर संचालकों को बेचने के लिए तहसीलदारों से मार्केटिंग कराई गई, लेकिन किसी भी मेडिकल स्टोर संचालक ने ऑर्डर नहींं दिया। ऐसे में अधिक मात्रा में बन चुके इन मास्क को बेचने की जिम्मेदारी नगर पालिका को दे दी गई। जब नगर पालिका भी इसे स्टॉल लगाकर नहींं बेच पाई तो प्रशासनिक अफसरों ने जुर्माने के नाम पर इन्हें बेचना शुरू कर दिया। यही कारण है कि गमछा व रूमाल लगाने के बाद भी 50-50 रुपए के चालान नगर पालिका द्वारा करवाए जा रहे हैं और लोगों को समूहों द्वारा बनाया गया एक मास्क थमाया जा रहा है।



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To sell masks made by self-help groups, people are also doing 50 rupees on handkerchiefs or hotbed. Penalty of


source https://www.bhaskar.com/local/mp/gwalior/sheour/news/to-sell-masks-made-by-self-help-groups-people-are-also-doing-50-rupees-on-handkerchiefs-or-hotbed-penalty-of-127397624.html

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