पीला मोजेक, अफलन तो कहीं अतिवृष्टि के कारण सोयाबीन समेत अन्य खरीफ फसलें खराब हो गई हैं। कई किसानों ने तो फसल काटना शुरू कर दी है लेकिन प्रशासन की तरफ से सर्वे ही शुरू नहीं हुआ। कलेक्टर ने तो चार दिन पहले ही जिलेभर की टीमें बनाकर सर्वे के आदेश दे दिए थे और तीन दिन में रिपोर्ट तलब की थी लेकिन यहां कई गांवों में इसकी शुरुआत तक नहीं हुई। किसान खेतों में उनका इंतजार कर रहे और पटवारी समेत अन्य अधिकारी-कर्मचारी पहुंचे ही नहीं। इस तरह की शिकायतें लगातार एसडीएम-तहसीलदार के पास आ रही हैं। बुधवार को ही कुछ आवेदन आए।
शाम 4 बजे एसडीएम राहुल धोटे व तहसीलदार नित्यानंद पांडेय ने नपा सभागृह में सभी 70 हलकाें के पटवारियों की बैठक ली।
सर्वे पूरा नहीं होने पर आरआई से लेकर पटवारियों को फटकार लगाई। साथ ही सोमवार तक समग्र फसल नुकसानी की रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए। लापरवाही की स्थिति में कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। सर्वे के दौरान सिर्फ अतिवृष्टि ही नहीं बल्कि पीला मोजेक, अफलन या जिस भी किसी कारण से फसल खराब हुई है तो उसकी बिंदुवार जानकारी पेश करना है। तहसीलदार पांडेय ने बताया अब तक पीला मोजेक आरबीसी में शामिल नहीं था लेकिन अब इसे भी सरकार ने आरबीसी में शामिल कर लिया है। इसलिए नुकसानी पर क्षतिपूर्ति मिल सकती है।
बीमा कंपनी प्रतिनिधि के साथ करना है फसल कटाई प्रयोग
चूंकि कई किसानों ने जून के पहले सप्ताह में ही फसल बुआई कर दी थी इसलिए आगे बोवनी वाली फसलें पककर तैयार हैं बल्कि कटाई शुरू हो गई है। तहसीलदार ने निर्देश दिए कि गुरुवार से ही पटवारी ग्राम सेवक एवं बीमा कंपनी प्रतिनिधि के साथ खेतों में जाकर फसल कटाई प्रयोग करें और नुकसानी रिपोर्ट तैयार करें। बता दें कि इसी आधार पर पिछले पांच साल के औसत उत्पादन आंकड़े निकाले जाएंगे। फिर उससे तुलना करके नुकसानी आकलन होगा। उसी अनुसार बीमा क्लेम मिलेगा।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/ratlam/jaora/news/farmers-waiting-in-the-fields-but-did-not-go-to-patwari-sdm-tehsildar-reprimanded-127704153.html
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