आलोट अनुविभाग क्षेत्र में सरकारी जमीनों के निजीकरण का बड़ा खेल चल रहा है। हाल ही में निपानिया राजगुरु में 100 बीघा भूमि को निजी करने का मामला उजागर हुआ था। ये भूमि 3 सितंबर को एसडीएम ने वापस सरकारी घोषित कर दी जो मिलीभगत का प्रमाण है। इसी गांव के चौकीदार ने भी सरकारी सेवा भूमि को निजी करवाकर लोन ले लिया। तीसरा मामला ग्राम पाटन का सामने आया है। यहां करीब 60 बीघा सरकारी जमीन के निजीकरण की शिकायत हुई है। नवागत एसडीएम ने जांच की बात कही है। वहीं कलेक्टर ने मामलों की डीई (विभागीय जांच) के भी आदेश दिए है।
सरकारी जमीनों की धांधली किस तरह हो रही, इसकी पड़ताल में पता चला कि मिलीभगत वाले अधिकारी-कर्मचारी मूल सर्वे नंबर को नहीं छेड़ते हैं बल्कि कम्प्यूटर रिकाॅर्ड में बटांकन कर देते हैं। फिर उस सरकारी नंबर वाले रकबे को शून्य या कम करके बटांकन वाले निजी नाम के खसरे में चढ़ा देते हैं। इस तरह रिकाॅर्ड में सरकारी सर्वे नंबर अपनी जगह बना रहता है और बटांकन में नया निजी नंबर दर्ज हो जाता है।
जो भूमाफिया सांठगांठ से इन सरकारी जमीनों को निजी करवाते हैं, वे मौके पर ना फसल लगाते हैं और ना हंकाई करते हैं ताकि किसी को शक नहीं हो कि मौके पर कोई कब्जा है। वे सिर्फ सरकारी से निजी हुए रकबे और बटांकन वाले नए सर्वे नंबर की नकल निकालकर बैंकों में सांठगांठ करके केसीसी लोन ले लेते हैं। इससे लाखों रुपए मिलते हैं, वे लेकर ऐश करते हैं और इसी में से कुछ धन मिलीभगत वालों को भी बंट जाता है।
बटांकन वाले नंबरों पर सरकारी बैंकें लोन नहीं देती हैं तो ये लोग प्राइवेट बैंकों से संपर्क करते हैं, जहां पर थोड़े-बहुत लेनदेन पर फर्जी फसल बुआई रिपोर्ट बन जाती है और उसी आधार पर बैंक लोन दे देती है। निपानिया राजगुरु के मामलों मंे ऐसी ही जानकारी सामने आई। वहां चौकीदार रोडमल पिता कचरूलाल ने तो 8.82 लाख लोन ले भी लिया था, जो खसरा नकल में भूमि बंधक दिखाने से स्पष्ट हो गया। वहीं 100 बीघा भूमि के मामले में भी पता चला है कि जावरा की एक प्राइवेट बैंक से इन लोगों ने लोन लिया है। हालांकि मामला जांच में है, इसलिए अधिकारी अभी लोन की पुष्टि नहीं कर रहे लेकिन भूमि निजी हुई थी, यह सिद्ध है।
किसान के खेत का रास्ता रोका व शिकायत हुई तो खुली पाटन की पोल
निपानिया की तरह पाटन में भी करीब 60 बीघा सरकारी जमीन काे रिकाॅर्ड में हेरफेर करके निजी करने की शिकायत पर जांच शुरू हो गई है। दरअसल पाटन निवासी कानसिंह पिता मेहताबसिंह राजपूत के खेत तरफ जाने का परंपरागत शासकीय रास्ता कुछ दिनों पहले गांव के ही बालूसिंह, रामसिंह, नरवरसिंह आदि ने रोक दिया था।
ऐसी शिकायत कानसिंह ने एसडीएम से लेकर आलोट पुलिस थाने में लिखित में की है। इसमें बताया कि उक्त लोगों के नाम पर सर्वे नंबर 1898/1, 1898/2, 1898/3 का कुल रकबा 3.157 हेक्टेयर था। ये इनकी निजी भूमि है लेकिन पटवारी की सांठगांठ से एक और सर्वे नंबर 1898/4 चढ़ाते हुए इसमें 2.1040 हेक्टेयर रकबा भी बढ़वा लिया। यह रकबा सरकारी रकबे का हिस्सा है। शिकायतकर्ता के अनुसार ये तो महज 2.1040 हेक्टेयर भूमि का घालमेल है लेकिन गांव में ऐसी करीब 60 बीघा सरकारी भूमियों का हेरफेर हुआ है।
जिन्होंने जांच शुरू की उनका 5वें ही दिन ट्रांसफर हो गया, अब नए एसडीएम ने ली जिम्मेदारी
आलोट में बुधवार को नवागत एसडीएम राजेश कुमार शुक्ला ने ज्वाइन किया। इनके पहले यहां एसडीएम एमएल आर्य ने इन सरकारी भूमि की हेराफेरी की जांच शुरू की थी और 3 सितंबर को 100 बीघा भूमि वापस सरकारी घोषित करते हुए रिकाॅर्ड दुरुस्त करवाया था।
इसके पांचवें दिन सोमवार देरशाम उनका ट्रांसफर रतलाम ग्रामीण एसडीएम के रूप में हो गया। हालांकि इसे कार्य विभाजन व स्वेच्छिक ट्रांसफर बताया जा रहा है लेकिन जमीन घोटालों की जांच के दौरान ट्रांसफर भी सवालों के घेरे में है। अब नवागत एसडीएम शुक्ला का कहना है कि मैंने बुधवार को ही कार्यभार संभाला। इन सभी मामलों की जांच गंभीरता से की जाएगी। पाटन मामले की जांच तो गुरुवार से ही शुरू करवा देंगे। जो भी जिम्मेदार होगा, कार्रवाई की जाएगी।
तत्कालीन तहसीलदार व पटवारी के खिलाफ विभागीय जांच का प्रस्ताव
निपानिया राजगुरु की 100 बीघा सरकारी भूमि की हेराफेरी मामले में जिन लोगों के नाम भूमि हुई, उनका तो कुछ नहीं बिगड़ा लेकिन एसडीएम ने तत्कालीन तहसीलदार अनिल कुशवाह व पटवारी एबी भुवान के खिलाफ विभागीय जांच के लिए कलेक्टर को पत्र लिखा था, जिस पर डीई शुरू हो गई है।
जिम्मेदारोें पर कार्रवाई होगी जांच शुरू की
आलोट क्षेत्र में जो भी सरकारी जमीन निजी हुई है, उनकी गंभीरता से जांच करवाई जा रही है। तत्कालीन तहसीलदार व पटवारी के खिलाफ विभागीय जांच के लिए रतलाम ग्रामीण एसडीएम एमएल आर्य को जांच अधिकारी बनाया है। जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी।
गोपालचंद डाड, कलेक्टर, रतलाम
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/ratlam/aalot/news/private-land-is-doing-government-land-under-the-pretext-of-bantakan-kcc-loan-is-game-order-for-investigation-127704156.html
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