केंद्र सरकार ने नयागांव स्थित सीमेंट कार्पोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) सीमेंट फैक्टरी को बेचने की तैयारी कर ली है। 23 जुलाई को केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा देश के 28 उपक्रमों को निजी हाथों में सौंपने की घोषणा की थी। इसमें सीसीआई फैक्टरी भी शामिल है।
इसके पूर्व 02 मार्च 2019 को केंद्र सरकार ने एक विज्ञप्ति भी जारी की थी। बंद पड़ी फैक्टरी निजी हाथों में सौंपने को लेकर केंद्र सरकार की नीति उजागर हो गई है। मंदसौर-नीमच के सांसद सुधीर गुप्ता सीमेंट फैक्टरी को शुरू करवाने का दावा कर रहे थे। वहीं दूसरी तरफ उनकी सरकार ने फैक्टरी बेचने की पूरी तैयारी कर ली।
यह बात जिला इंटक महामंत्री भगत वर्मा तथा अध्यक्ष भंवरलाल शर्मा ने कही। उन्होंने कहा कि आरटीई के तहत जानकारी में इसका खुलासा हो गया है। 1976 में फैक्टरी की स्थापना हुई थी। उस समय इसकी लागत 460 करोड़ रुपए आंकी गई थी। 11 अक्टूबर 1980 को फैक्टरी में उत्पादन शुरू हुआ था। सरकार की विफलता के कारण यह बंद हो गई।
अब इसे सार्वजनिक विज्ञप्ति में 200 करोड़ में बेचने का उल्लेख किया है। चुनाव के समय सांसद ने फैक्टरी चालू करवाने के लिए व्यक्तिगत रूचि लेने का दावा किया था। चुनाव जीतने के बाद उन्होंने नीमच के विकास पर ध्यान नहीं दिया। इंटक नेताओं ने कहा कि फैक्टरी को किसी हालत में बिकने नहीं देगें। उन्होंने सांसद पर निष्क्रियता का आरोप लगाया।
प्रतिदिन 12 मैट्रिक टन सीमेंट उत्पादन होता था- इंटक के जिलाध्यक्ष शर्मा एवं महामंत्री वर्मा ने कहा कि फैक्टरी में प्रतिदिन 12 मैट्रिक टन सीमेंट का उत्पादन होता था।
1997 में बिजली बिल बकाया होने पर कनेक्शन काट दिया और फैक्टरी बंद हो गई। इससे हजारों कर्मचारी बेरोजगार हो गए। सीसीआई प्लांट के पास 400 हेक्टेयर जमीन नयागांव तथा 160 हेक्टेयर जमीन गांव खेड़ा राठौड़ में है। इस क्षेत्र में सबसे उच्च क्वालिटी का चूना पत्थर है, जिसे एशिया का सबसे अच्छा पत्थर माना जाता है।
सीसीआई फैक्टरी एशिया की सबसे बड़ी सीमेंट फैक्टरी थी। वर्तमान में फैक्टरी चालू करने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी, बेहतर खनिज, परिवहन के लिए रेल व सड़क मार्ग है। सभी सुविधा होने के बाद भी फैक्टरी बंद करना केंद्र सरकार तथा सीसीआई का गलत निर्णय है। प्रदेश के मुख्यमंत्री को वस्तु स्थिति से अवगत कराया जाएगा।
उद्योगपतियों की निगाहें फैक्टरी की जमीन पर
वर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाना चाहती है। उद्योगपतियों की निगाहें फैक्टरी के आसपास की जमीन पर है। इंटक इसका विरोधी करेगी। यह फैक्टरी नीमच जिले की धरोहर है। इस फिर से शुरू करवाने के लिए राजनीतिक, गैर राजनीतिक कर्मचारी संगठनों, सामाजिक संगठनों को जोड़कर आंदोलन शुरू किया जाएगा। फैक्टरी को किसी भी परिस्थिति में बेचने नहीं देंगे। इसके पहले भी सीसीआई को बेचने का विरोध इंटक किया गया था।
9.65 करोड़ रुपए बकाया होने पर काट दी थी बिजली
फैक्टरी की मालि हालत के चलते 13 मई 1997 को सीसीआई प्लांट बंद हुआ। उस वक्त प्लांट पर बिजली कंपनी का 9 करोड़ 65 लाख रुपए तक बकाया था। बकाया राशि को लेकर बिजली कंपनी ने प्लांट की बिजली काट दी थी। इसके बाद फैक्टरी बंद हो गई थी। उस समय स्थायी, अस्थायी 900 श्रमिक बेरोजगार हुए थे।
नीति आयोग के फैसले का भारत सरकार पालन कर रही है
नीति आयोग के फैसले है। उसका भारत सरकार पारदर्शी तरीके से पालन कर रही है। कांग्रेस व इंटक नेताओं ने ही इस फैक्टरी को बंद किया था। केंद्र सरकार की पॉलिसी स्पष्ट है। हमारी कोशिश रहेगी कि क्षेत्र को इस का अधिक लाभ मिले। जो इसे चलाने की संभावनाओं पर काम करेगा भारत सरकार उसको यह फैक्टरी सौंपेगी।
सुधीर गुप्ता, सांसद, मंदसौर-नीमच संसदीय क्षेत्र
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/ratlam/neemuch/news/preparations-to-sell-cci-factory-for-200-crores-movement-will-intensify-127697402.html
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