Tuesday, June 9, 2020

बहुत दिनों बाद तुम्हारा सपना मुझको कल आया था, सदियों बाद आंख भर रोयी थी: जोशी

हिंदी लेखिका संघ भोपाल के तत्वावधान में प्रांतीय अध्यक्ष अनीता सक्सेना की पहल पर ऑनलाइन अंतराष्ट्रीय कवि सम्मेलन हुआ। जिसमें भारत के विभिन्न राज्यों की कवयित्रियों सहित अमेरिका की कवयित्रियों ने शामिल होकर कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि कथाकार पद्मश्री मेहरुन्निसा परवेज, पद्मश्री मालती जोशी थीं। अध्यक्षता हिंदी लेखिका संघ की पूर्व प्रांतीय अध्यक्ष ऊषा जयसवाल ने की। सरस्वती वंदना महिमा श्रीवास्तव ने प्रस्तुत की।
अमेरिका से सुधा ओम ढींगरा ने कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए अपनी रचना जीवन की आपा धापी से भाग, जब भी उस चारपाई पर लेटती हूं तो वह मौसी का वदन बन मनुहार और दुलार देती है। अमेरिका की गीता कौशिक ने आयोजन से आनंदित होते हुए कहा पुकारे तुमको जो कोई दिल से, पलट कर आन ले साथ चलना। संस्था अध्यक्ष अनीता सक्सेना ने ओढ रात की काली चादर आसमान जब सोया था, एक किरण ने उसके अंदर बीज प्यार का बोया था। मेहरुन्निसा परवेज ने अपनी रचना अगर अम्मा जिंदा होतीं तो कहतीं, कितनों की दुआ सुनेगा, सारी दुनिया की फरियाद सुन सुन वह भी तो थक जाता होगा न।

मालती जोशी ने कहा बहुत दिनों बाद तुम्हारा सपना मुझको कल आया था, सदियों बाद आंख भर रोयी थी। राजश्री रावत ने पढ़ा-नसीब में तेरे कुछ है तो मिल ही जाना है, ये और बात जमाना तो फिर जमाना है। दमोह से पुष्पा चिले ने कहा देश में अनगिनत उग आए हैं कटीले सर, रेतने भरोसे के हाथ कहां से लाएं। दमोह से डॉ. प्रेमलता नीलम ने आओ इस गांव चाहे जाओ उस गांव, सूखी नदिया में उल्टी पड़ी है नाव। पुष्पलता मुजफ्फरनगर ने जिंदगी दर्द से बनी होगी, पास उसके कोई नदी होगी। पटल पर बड़ी संख्या में बहनों की उपस्थिति रहीं। संचालन सुनीता यादव व आभार नमिता जौहरी ने व्यक्त किया।



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source https://www.bhaskar.com/local/mp/sagar/damoh/news/after-a-long-time-my-dream-came-to-me-yesterday-after-centuries-it-cried-my-eyes-joshi-127394304.html

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