Wednesday, June 10, 2020

आरटीई क्षतिपूर्ति की जो राशि मिली, वह ऊंट के मुंह में जीरे के समान

निवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के अंतर्गत फीस प्रतिपूर्ति की राशि समय पर नहीं मिलने से नाराज निजी स्कूल संचालकों ने बुधवार को जिलेभर में प्रदर्शन किया। शहर में प्रदर्शन के साथ ही अधिकारियों को ज्ञापन देने के बाद स्कूल संचालकों ने मास्क और सैनिटाइजर भी वितरित किए।
अशासकीय शाला प्रतिनिधि संगठन के बैनर तले शहर अध्यक्ष जितेंद्र शिंदे के नेतृत्व में शहर में निजी स्कूल संचालकों ने प्रदर्शन किया। जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी) पीएस सोलंकी और बीआरसी (उज्जैन शहर) संजय शर्मा को निजी स्कूल संचालकों ने ज्ञापन दिए। डीपीसी से स्कूल संचालकों ने कहा सत्र 2018-19 की फीस प्रतिपूर्ति की केवल 30 प्रतिशत राशि का ही भुगतान शासन द्वारा स्कूलों को किया जा रहा है, जो ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। स्कूलों की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई है। कोरोना संक्रमण की वजह से फीस की राशि भी अभी प्राप्त नहीं हो पा रही है। ऐसी स्थिति में अब स्कूल चलाना ही मुश्किल हो रहा है। संगठन के जिला अध्यक्ष मनीष भारद्वाज ने बताया सत्र 2018-19 और 2019-20 में विद्यार्थियों की पूरे शिक्षण सत्र में स्कूल द्वारा पढ़ाई करवाई जा चुकी है।
न्यायालय के निर्देश के अनुसार प्रत्येक सत्र की समाप्ति पर 31 मार्च तक स्कूलों को भुगतान करना होता है। इसके विपरीत स्कूलों का दो शिक्षण सत्रों का भुगतान लंबित है, जिससे मान्यता प्राप्त सभी स्कूलों की आर्थिक स्थिति चिंताजनक हो गई है। स्कूल संचालकों ने यह भी मांग की कि जिन बच्चों का आधार सत्यापन एक बार स्कूल द्वारा किया जा चुका है, उनके बार-बार आधार सत्यापन की बाध्यता को समाप्त किया जाए। कोरोना के कारण किसी भी बच्चे का बायोमीट्रिक सत्यापन भी प्रतिबंधित है। ऐसे में स्कूलों द्वारा बच्चों को स्कूल बुलाकर किसी भी प्रकार से प्रक्रिया पूर्ण करना संभव नहीं है। 2017 -18 की भी फीस प्रतिपूर्ति की राशि भी कई स्कूलों छोटे-छोटे तकनीकी कारणों से नहीं मिली है। स्कूल संचालकों ने मांग रखी कि सत्र 2018-19 और 2019-20 की राशि का बिना किसी प्रक्रिया के 90 प्रतिशत राशि का भुगतान स्कूलों को किया जाए। शेष 10 प्रतिशत राशि का भुगतान स्थितियां सामान्य होने पर हो, तब प्रक्रिया को पूर्ण कर उसका समायोजन किया जा सकता है। संचालकों ने कहा 15 दिन में इस समस्या का निराकरण नहीं हुआ तो आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा। प्रदर्शन के बाद स्कूल संचालकों ने डीपीसी सोलंकी और बीआरसी शर्मा को 50-50 फेस मास्क और सैनिटाइजर भी वितरित किए। इसके अलावा जिले की सभी तहसीलों में व जिले के अन्य स्थानों पर भी बीआरसी को ज्ञापन सौंपा।



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source https://www.bhaskar.com/local/mp/ujjain/news/the-amount-of-rte-compensation-received-like-the-cumin-in-the-camels-mouth-127397632.html

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