Friday, June 19, 2020

फिर छलनी किया बनबना तालाब का सीना

ये तस्वीरें हैं शहर के बनबना तालाब की। जहां मुफ्त की मिट्टी और मुरम के लिए खनन माफियाओं ने जेसीबी से तालाब का स्वरूप ही बिगाड़ दिया है। अवैध खुदाई से हुए इन गहरे गड्ढों में बारिश का पानी भरेगा, तब इसमें तैरने पहुंचने वालों को पता भी नहीं होगा कि यहां तालाब की गहराई अधिक है। ऐसे में ये गड्ढे गांव के लोगों और राहगीरों के लिए जानलेवा साबित होंगे। हैरत है कि अवैध खुदाई की ओर किसी का ध्यान नहीं है। गनीमत है कि गुरुवार को आसपास के ग्रामीणों को तालाब की खुदाई की जानकारी लगी तो सबने एकजुट होकर अवैध खनन करने वालों को खदेड़ दिया।
बच्चों की मौत फिर भी जिम्मेदारों ने नहीं लिया सबक
हैरानी है कि इसी बनबना तालाब में 2012 में अवैध खुदाई से बने गड्ढों में बारिश का पानी जमा होने से शहर के तीन और डाबड़ी गांव के एक बच्चे यानी कुल चार मासूमों की मौत डूबने से हुई थी। तब प्रदेश स्तर पर मासूमों की मौत पर बवाल हुआ था, सवाल भी पूछे गए थे, लेकिन जिम्मेदार किसी को नहीं ठहराया गया था। घर का चिराग खो चुके परिवारों को निर्माण कंपनी ने एक-एक लाख के मुआवजे का मरहम लगाकर मामला दबा दिया था। ऐसी ही लापरवाही फिर से हो रही है। इस बनबना तालाब में चार बच्चों ने दम तोड़ा था, वहां फिर से अवैध खनन जारी है। इतना खनन हो चुका है कि भविष्य का अंदाजा तस्वीरें देखकर भी लगाया जा सकता है।

बच्चों को नहीं मालूम 5 की जगह 50 फीट हो गए गड्‌ढे
2012 में सड़क निर्माण कंपनी ने बनबना तालाब से उज्जैन-जावरा स्टेट हाइवे निर्माण के लिए मिट्टी व मुरम का खनन किया था। निर्धारित गहराई तय की गई थी। बावजूद कंपनी ने मिट्टी और मुरम के लालच में तालाब की सीमा को छलनी कर किया था। मासूमों को तालाब की सीमा और किनारे पता थे, लेकिन ये नहीं पता था कि मिट्टी और मुरम के लिए तालाब की गहराई जहां 5 फीट गहरी थी, वो 50 फीट तक गहरे खोद दिए गए हैं। और अब फिर से यही अपराध किया जा रहा है।

आज पंचनामा बनाकर विभाग को बताएंगे
^शुक्रवार को ही तालाब के चौकीदारों ने अवैध खनन की सूचना दी है। शनिवार को पंचनामा बनाकर जल संसाधान विभाग को अवगत कराया जाएगा।
करणसिंह शेखावत, अध्यक्ष, जल उपभोक्ता संस्था, बनबना तालाब



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Then sieve the banabana pond


source https://www.bhaskar.com/local/mp/ujjain/nagda/news/then-sieve-the-banabana-pond-127428373.html

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