आदर्श ग्राम पंचायत सिरसौद से खेड़ापति और बड़ी माता मंदिर तक जाने वाला रास्ता हर बारिश में दलदल जैसा हाे जाता था। पैदल या बाइक से निकलना तो दूर, ट्रैक्टर तक नहीं निकल पाते थे। श्रद्धालुओं को मंदिर जाने में बेहद परेशानी होती थी। इससे परेशान लोगों ने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से कई बार जर्जर सड़क को दुरुस्त कराने की मांग की, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। आखिरकार ग्रामीणों ने खुद ही सड़क बनवाने का निर्णय लिया। 12 ग्रामीणों ने सड़क के लिए स्वेच्छा से अपने खेतों में से 6-6 फीट जमीन दान दी और लगभग 10 लाख रुपए एकत्रित कर एक किमी लंबी मुरम की सड़क खुद ही श्रमदान कर बना रहे हैं।
मंदिर जाने तक का रास्ता देश की आजादी के बाद से कभी नहीं बना था। पिछली साल बारिश का मौसम बीतने के बाद बाद लोधी समाज सहित गांव के अन्य लोगों के मन में यह सड़क जनभागीदारी से बनाने का ख्याल आया। ग्राम पंचायत को योजना बताई, लेकिन किसी ने रुचि नहीं ली। इसके बाद गांव वालों ने मिलकर पैसे इकट्ठे किए लेकिन राशि को गुप्त रखा और सड़क बनवाना शुरू कर दी। मुरम की सड़क का काम तेजी से आगे बढ़ने लगा। अब 1 किमी में मुरम डाल दी गई है, अब उसे बिछाना शेष रह गया है।
रास्ता बनाने के लिए 12 ग्रामीणों ने जमीन दान दी
आदर्श ग्राम पंचायत सिरसौद में जब शासन और प्रशासन ने ग्रामीणों की समस्या नहीं सुनी तो स्वयं ही ग्रामीण एक जुट हो गए। मंदिर जाने तक सड़क नहीं थी इसलिए पंचायत के 12 ग्रामीणों ने आगे आगकर अपने-अपने खेतों से सड़क के लिए 6-6 फीट जमीन दान दी। इसके साथ ही करीब 400 ग्रामीणों ने 10 लाख रुपए चंदा जुटा। इसके बाद ग्रामीण खुद के 25-25 ट्रैक्टर से मुरम ला रहे हैं और स्वयं की श्रमदान कर बिछा रहे हैं।
संसाधन जुटाने से श्रमदान करने तक एकजुट हुए ग्रामीण
दरअसल, गांव की महिला श्रद्धालु नवरात्रि में बच्चों के साथ कीचड़ भरे रास्ते से निकलते थे। इससे उन्हें काफी परेशानी होती थी। कई श्रद्धालु संकट के दौरान सुबह-शाम बारिश के दिनों में अपनी मन्नत मांगने के लिए नहीं जा पाते थे। इससे परेशान होकर लोधी समाज आगे आया और उन्होंने इस सड़क की हालत को सुधारने का बीड़ा उठाया। लोधी समाज ने सड़क बनाने की पहल की तो अन्य ग्रामीणों का भी सहयोग मिलना शुरू हो गया। सड़क बनाने के लिए संसाधन जुटाने से लेकर निजी जमीन दान देकर श्रमदान करने में ग्रामीण खुद जुट गए।
निजी जमीन से था रास्ता, इसलिए नहीं बना पा रहे थे सड़क
मंदिर तक जाने वाला रास्ता निजी जमीन से निकलता है, इसलिए ग्राम पंचायत इस रास्ते का निर्माण कार्य नहीं करा पा रही थी। अब ग्रामीणों ने स्वेच्छा से जमीन दान कर और श्रमदान कर मुरम का रास्ता बना दिया है।
रामलली-अतरसिंह लोधी, सरपंच, सिरसौद
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/gwalior/krera/news/the-path-used-to-become-like-a-swamp-in-the-rain-the-villagers-donated-now-one-km-long-road-is-being-built-127404595.html
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