इस मर्तबा मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष की सोमवती अमावस्या पर सालों उपरांत अमावस्या के संजोग के साथ में ‘चन्द्रशुक्रबुधादित्य योग’ की संयुक्त निर्मित हो रही है। वृश्चिक राशि के अंतर्गत 5 ग्रह संयुक्त रूप से इस अमावस्या पर विराजमान रहेंगे। सूर्य, चंद्र, बुध, शुक्र और केतु एक ही ग्रह वृश्चिक राशि में स्थित रहेंगे। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पतियों के दीर्घायु कामना के लिए व्रत का विधान है। साथ ही इस दिन श्रद्धापूर्वत किए गए व्रत पूजन से आरोग्यता समृद्धि विद्या की प्राप्ति होती है।
इस मर्तबा सोमवती अमावस्या 14 दिसंबर को मनाई जाएगी। सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहते हैं। ये साल में लगभग एक या दो ही बार पड़ती है। ज्योतिषियों की माने तो जिनके विवाह में विलम्ब हो रहा है या विवाह में अर्चन उत्पन्न हो रही हैं उन्हें इस व्रत को अवश्य करना चाहिए। इस दिन मौन व्रत रहने से सहस्र गोदान का फल मिलता है। शास्त्रों में इसे अश्वत्थ प्रदक्षिणा व्रत की भी संज्ञा दी गई है। अश्वत्थ यानि पीपल का पैड़। इस दिन विवाहित स्त्रियों द्वारा पीपल के पेड़ की दूध, जल, पुष्प, अक्षत, चंदन इत्यादि से पूजन कर पेड़ के चारों ओर सूत का धागा लपेट कर परिक्रमा करने का विधान होता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान का भी विशेष महत्व समझा जाता है।
इस दिन किया दान अनंत पुण्य प्राप्त होता है
ज्योतिषाचार्य पंडित संजयशिवशंकर दवे ने बताया सूर्य, चंद्र, बुध, शुक्र और केतु एक ही ग्रह वृश्चिक राशि में स्थित रहेंगे। इन ग्रहों की संयुक्त युक्ति के साथ सोमवती अमावस्या पर किए गए दान का अनंत पुण्य प्राप्त होता है। इस अमावस्या पर अपने पितरों के निमित्त उनको सद्गति प्राप्ति हेतु घर में पितृदोष की शांति के लिए अपनी यथा शक्ति और सामर्थ्य के अनुसार बरगद, पीपल, तुलसी, आम इत्यादि पौधों का अवश्य रोपण करना चाहिए व जरूरतमंदों में ऊनी वस्त्र इत्यादि का भी अवश्य दान का महत्व अनंत गुना बढ़ जाता है।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/ratlam/news/moon-venus-is-being-formed-on-somavati-amavasya-127998156.html
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