वनाधिकार पट्टों के दावों का पुनरीक्षण बंद करने की मांग उठ रही है। ग्रामीणों का कहना है उप चुनाव के पहले इसी घोषणा होनी चाहिए, यदि ऐसा नहीं हुआ, तो वह चुनाव का ही बहिष्कार कर देंगे। जिले से 11 हजार दावे लगाए गए है। इसमें हजारों दावेदार अवैध रूप से जंगलों की कटाई कर रहे है। इससे ग्रामीण आहत है।
वनाधिकार अधिनियम के 2005 के पहले से वन भूमि पर काबिज आदिवासियों को वनाधिकार पट्टे देने का प्रावधान है, लेकिन जिले में बाहर से आए अतिक्रमणकर्ताओं ने सैकडों दावे लगा दिए। जिसे बार बार पुनरीक्षण में ले लिया जाता है। जबकि निरस्त होने के बाद दावों को बार बार पुनरीक्षण में लेने का कोई नियम नहीं है। जिलेभर में वनाधिकार के करीब 11 हजार दावे लगाए गए हैं। जिसमें से आधे से ज्यादा निरस्त हो चुके हैं। इसकी प्रमुख वजह अधिकांश अतिक्रमणकर्ताओं का वन भूमि पर 2005 से पहले काबिज न होना है। इसे लेकर ग्राम घाघरला के ग्रामीणों ने मांग उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि जो दावे निरस्त हो चुके हैं उन्हें तत्काल पुनरीक्षण सूची से बाहर किया जाना चाहिए नही तो आने वाले विधानसभा उपचुनाव का बहिष्कार किया जाएगा।
पट्टे की आस में तबाह कर रहे जंगल, अफसर मौन
पट्टे की आस में नेपानगर के वन क्षेत्र को तबाह किया जा रहा है। घाघरला के जंगल में मौजूद करीब एक हजार से ज्यादा बाहरी अतिक्रमणकर्ता मौजूद हैं। जिन्हें वन विभाग और प्रशासन खदेड़ने में नाकाम साबित हो रहा है। अतिक्रमणकर्ताओं ने पिछले दिनों में जंगल में घुसने वाले सारे रास्ते बड़े बड़े पत्थरोें और पेड़ गिराकर बंद कर दिए थे। यहां अब बड़े पैमाने पर खैर, धावडा, पलाश और सलई सहित अन्य कई किस्मों के बेशकीमती पेड़ काटे जा रहे हैं। पेड़ काटने के बाद इन्हीं स्थानों पर अतिक्रमण किया जा रहा है। सबकुछ जानने के बाद भी प्रशासन पूरी तरह मौन है।
वन विभाग नहीं उठा रहा कटे हुए पेड़, जंगल में जाने से डर
वनकर्मी जंगलों में जाने से डर रहे हैं। पिछले महीनों चार बार वनकर्मियों और ग्रामीणों पर हमले के कारण अब भी वनकर्मियों में डर का माहौल है। यही वजह है कि वन विभाग घाघरला के जंगल में जगह जगह कटे पड़े पेड़ों को एकत्रित भी नहीं कर पा रहा है। अधिकांश स्थानों पर यह पेड़ कटी हुई स्थिति में पड़े हैं। बताया जा रहा है कि वन विभाग और प्रशासन आगामी विधानसभा उपचुनाव के कारण कार्रवाई करने से बच रहा है। वोटबैंक के लालच में सरकार की उपेक्षा के यही हाल कायम रहे तो उपचुनाव होते-होते एक चौथाई जंगल का सफाया हो जाएगा।
खकनार में सीएम को सौंपी वन कटाई की शिकायत, हमले की दी जानकारी
घाघरला के ग्रामीणों ने बुधवार को खकनार पहुंचकर सीएम शिवराजसिंह चौहान को शिकायत सौंपी। इसमें कहा कि अतिक्रमणकर्ताओं ने घाघरला के जंगल को पूरी तरह तबाह कर दिया है। अतिक्रमणकर्ता गांव के लोगों को जंगल में घुसने तक नहीं दे रहे हंै। आए दिन ग्रामीणों को धमकी दी जाती है कि जंगल में न आएं। पिछले दिनों आंवला तोड़ने गए करीब 20 से अधिक ग्रामीणों जिनमें महिलाएं भी थी को अतिक्रमणकर्ताओं ने खदेड़ दिया था। गांव के लोगों का कहना है कि अब तक अतिक्रमणकर्ता गांव की सीमा तक आ गए हैं। हम नई कटाई का विरोध करते हैं। इस दौरान कडु पाटिल, संजय पठारे, पांडुरंग महाजन, जिला पंचायत सदस्य किशन धांडे सहित अन्य ग्रामीण मौजूद थे। सरकार की ओर से पहले से ही कहा जा रहा है कि नई कटाई नहीं होने देंगे लेकिन जंगल में रोजाना पेड़ों की अंधाधुंध कटाई जारी है। वन विभाग भी कार्रवाई नहीं कर रहा।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
source https://www.bhaskar.com/local/mp/khandwa/news/demand-to-stop-revision-of-claims-of-forest-rights-leases-villagers-said-announcement-before-elections-127748570.html
No comments:
Post a Comment