कभी बारिश और कभी धूप निकलने के कारण मौसम में लगातार बदलाव हो रहा है, वहीं जगह-जगह जलभराव के चलते मच्छरों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है, जिसके कारण रोगियों की संख्या बढ़ रही है, इधर देखा जाए तो नगर का अस्पताल स्टाफ व सुविधाओं के अभाव में खुद ही बीमार है, यहां चिकित्सकों की कमी स्वास्थ्य सेवाओं में रोड़ा बन रही है। वहीं अस्पताल के पैथोलॉजी विभाग में स्टाफ की कमी के कारण जांच कार्य प्रभावित हो रहा है, इसके साथ ही दिमनी और खड़ियाहार में अस्पताल में लैब टेक्नीशियन पदस्थ ना होने के कारण यहां भी लैब बंद है, जिससे यहां के मरीजों को भी सिविल अस्पताल अंबाह में जांच के लिए भेजा जा रहा है, जिससे यहां जांच कराने वालों की संख्या एक सैकड़ा से ज्यादा हो जाती है, जिससे मौजूदा स्टाफ को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
वर्तमान में सिविल अस्पताल अंबाह में आने वाले रोगियों की संख्या में 15 से 20 फीसदी तक इजाफा हुआ है, यहां प्रतिदिन चार सैकड़ा से अधिक मरीज ओपीडी में आ रहे हैं, निजी चिकित्सकों के यहां भी मरीजों की कतार लगी है। अस्पताल की लैब में पैथोलॉजिस्ट के अभाव में जांच का कार्य यहां पदस्थ एक मात्र लैब टेक्नीशियन के भरोसे चल रहा है। वर्तमान में यहां दो लैब टेक्नीशियन पदस्थ हैं, जिनमें से एक लैब टेक्नीशियन एआर खान टीबी रोग की जांच का कार्य देखते हैं, वहीं एक अन्य लैब टेक्नीशियन आरएस भदौरिया हाल ही में सेवानिवृत्त हो गए हैं। ऐसे में यहां पदस्थ लैब टेक्नीशियन बीएस राजपूत ही लैब में सैंपल लेने से लेकर जांच करने और जांच रिपोर्ट बनाने का कार्य करते हैं।
यहां प्रतिदिन 75 से लेकर 100 जांचें होती हैं, सुबह 8 बजे से लेकर 12 बजे तक सैंपल लिए जाते हैं, उसके बाद जांच कार्य होता है, तब कहीं जाकर मरीजों को रिपोर्ट मिल पाती है। रिपोर्ट के इंतजार में मरीजों को पूरे दिन अस्पताल में ही बैठना पड़ता है।
सिविल अस्पताल में खड़ियाहार, दिमनी से आते हैं मरीज
सिविल अस्पताल अंबाह से लगभग चार लाख की आबादी जुड़ी हुई है, इसके अलावा वर्तमान में दिमनी और खड़ियाहार में लैब टेक्नीशियन के अभाव में जांच केंद्रों पर ताले पड़े हुए हैं, जिसके चलते यहां के चिकित्सक भी मरीजों को जांच के लिए अंबाह भेज रहे हैं, जिसके चलते मरीजों को समय बेवजह खर्च करने के साथ-साथ आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। यह भी कहा जा सकता है कि शासन की इस नि:शुल्क जांच योजना का लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि किराए भाड़े में जितना खर्च होता है उतने में प्राइवेट लैब पर जांच हो जाती है। जानकारी के अनुसार खड़ियाहार और दिमनी की लैब एक वर्ष से अधिक समय से बंद है, जिसके चलते यहां रखे जांच उपकरण भी खराब हो रहे हैं।
मलेरिया और वायरल के बढ़ रहे मरीज
बारिश के बाद कई जगह भराव से मच्छर पनप रहे हैं। इसके अलावा मौसम में बदलाव के कारण वायरल फीवर भी फैल रहा है। ऐसे में खून की जांच के लिए लैब में लोगों की लाइन लगी है, लेकिन स्टॉफ की कमी के कारण मरीज परेशान हो रहे हैं। जबकि मलेरिया और वायरल फीवर में खून की जांच अहम होती है। इसके बाद ही चिकित्सक मरीज को उपचार का परामर्श ठीक से दे पाता है।
स्टाफ की कमी है
^सिविल अस्पताल अंबाह में एक लैब टेक्नीशियन के सेवानिवृत्त हो जाने से स्टाफ की समस्या उत्पन्न हो गई है। स्टाफ में दो ही व्यक्ति होने के कारण एक व्यक्ति टीबी वार्ड की जांच दूसरा व्यक्ति सामान्य जांच करता है। स्टाफ कम होने की सूचना से वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। स्टाफ की नियुक्ति शासन स्तर से ही संभव है।
डॉ. डीएस यादव, बीएमओ सिविल अस्पताल अंबाह
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/gwalior/morena/news/the-hospital-labs-rely-on-a-technician-400-people-arriving-for-testing-only-100-are-being-done-127704116.html
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