इस बार बारिश कम होने के कारण दूध का सीजन एक महीने की देरी से शुरू हो पाया है। इसके बाद भी दुग्ध फैक्टरियां 38 रुपए लीटर के रेट से दूध खरीद रही हैं। इससे किसानों को 10 रुपए लीटर का घाटा हो रहा है। जबकि पिछले साल सितंबर में दूध के रेट 48 रुपए तक पहुंचे थे।
अप्रैल से अगस्त तक दूध की कमी के कारण दूध कारोबारियों को दूध के रेट अच्छे मिलने चाहिए लेकिन लॉकडाउन का हवाला देकर दुग्ध फेक्टरियां सितंबर में दूध को 38 रुपए लीटर खरीद रही हैं। जबकि इससे पहले के महीनों में दूध का भाव 32,34,36 रुपए लिटर रहा है। बड़ा सवाल यह है कि दूध की कमी के दौर में कंपनियों की मनमानी के कारण पशु पालकों को दूध के रेट 10 रुपए लिटर कम मिल रहे हैं और इस पर सरकार की किसी एजेंसी का नियंत्रण नहीं है। आलम यह है कि दूध के वयवसाय से जु़ड़े चिलर मालिक अपने व्यवसाय को जिंदा रखने के लिए दुग्ध उत्पादक समितियों ने 40 रुपए लीटर दूध खरीदकर उसे 38 रुपए लीटर के रेट से मालनपुर, धौलपुर की दुग्ध कंपनियों को बेचने को मजबूर हैं। क्योंकि दूध की कमी व मांग अधिक होने के कारण दूध बेचने का धंधा करने वाला किसान अधिक रेट मिलने पर दूध के विक्रय को अन्यत्र ग्राहक को ट्रांसफर कर देता है।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/gwalior/morena/news/factories-are-getting-milk-at-the-rate-of-rs-38-bought-last-year-at-rs-48-per-liter-127700813.html
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