Friday, June 5, 2020

सागर रत्न थे आचार्य द्विवेदी, उनका मौलिक एवं अनूदित साहित्य यथार्थपूर्ण है : डॉ. तिवारी

आर्ष परिषद सागर के तत्वावधान में साहित्यचार्य पं. प्रेमनारायण द्विवेदी की 98वीं जन्म जयंती पर ऑनलाइन वेबिनार हुआ। अध्यक्षता कर रहे संगीतज्ञ डॉ. भुवनेश्वर तिवारी ने कहा कि आचार्य द्विवेदी जी सागर रत्न थे। उनका स्वभाव सागर जैसा शांत एवं गंभीर था। ठीक वैसे ही उनका मौलिक एवं अनूदित (अनुवाद किए जा चुके ग्रंथ) साहित्य भी गंभीर और यथार्थपूर्ण है। इस पर शोध की जरूरत है। ताकि साहित्य जगत उनके हर पक्षों को गहराई से जान सके।

उन्होंने द्विवेदी जी के भावपूर्ण संस्मरणों को प्रस्तुत करते हुए कहा कि जब वे बड़े बड़े काव्यों का अनुवाद करके मेरे काका आचार्य वागीश शास्त्री के पास आते थे और अपनी रचनाओं को दिखाते थे। हम लोग उन्हें समझ नही पाते थे कि ये महामना पंडित हैं। बलराम न्यायाचार्य से वृंदावन बाग मंदिर में वे न्याय दर्शन और पंडित गोविंद प्रसाद शास्त्री से व्याकरण पढ़कर विश्व स्तरीय पंडित बने। इससे पहले शुभारंभ मंगलाचरण से हुआ। वैदिक मंगलाचरण अखिलेश मिश्र, जबलपुर, लौकिक मंगलाचरण डॉ. प्रदीप दुबे सागर ने किया। डॉ. नौनिहाल गौतम ने कवि परिचय देते हुए कहा कि द्विवेदी जी का व्यक्तित्व एवं कृतित्व यथा नाम तथा गुण वाला है।



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source https://www.bhaskar.com/local/mp/sagar/news/sagar-ratna-was-acharya-dwivedi-his-original-and-translated-literature-is-accurate-dr-tiwari-127379935.html

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