लॉकडाउन के कारण सबसे बुरा हाल मध्यप्रदेश के बस संचालकों का हुआ है। 35000 बस संचालित होती थी। 3 माह से बस ऑपरेटरों ने अप्रैल, मई,जून का टैक्स नहीं भरा है। इन ऑपरेटरों की बस बिना परमिट की हो गई है जिससे यह बस का उपयोग यात्री सेवा के लिए परिवहन के रूप में नहीं कर सकते तथा टैक्स पर चक्रवर्ती ब्याज चल रहा है, क्योंकि सरकार ने प्रदेश बस ऑनर्स एसोसिएशन की कोई भी मांग को भी स्वीकार नहीं किया है, हालांकि 6 जून को मध्यप्रदेश बस ऑनर्स एसोसिएशन का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि से मिला हैं, जिसने गंभीरता से इनकी समस्याओं को सुना तथा उनका समाधान ढूंढा जा रहा है, लेकिन वर्तमान स्थिति को देखते हुए अनलॉक के द्वितीय चरण में परिवहन के साधनों को छूट देने के बाद भी शहर की बसों का आवागमन पास के जिलों में मुश्किल रहेगा, क्योंकि जिले का कोई भी बस ऑपरेटर इस महामारी में और बिना मांग स्वीकार किए यात्री बसों को चलाने के लिए तैयार नहीं है।
जिले की 80% बसें इंदौर, उज्जैन और भोपाल के लिए
जिले में 35 ऑपरेटरों की 200 बसें संचालित है। इनके अलावा गांव, कस्बों और स्कूलों के लिए 100 अन्य संचालित हैं। इसमें से 60 से 65 इंदौर तथा 50 से 55 उज्जैन व बाकी राजगढ़, ब्यावरा, सारंगपुर भोपाल तक जाती हैं। कुछ आगर मार्ग के रास्ते की बसें हैं परंतु इंदौर, उज्जैन और भोपाल में बसों का परिवहन अभी शुरू नहीं हुआ तथा वहां खतरा ज्यादा है इस कारण भी बस ऑपरेटर यात्री सेवा के लिए अपनी बसों का आवागमन अभी शुरू करने के मूड़ में नहीं हैं, क्योंकि अभी इसकी परमिशन भी नहीं है।
अधिग्रहण करने के लिए बोला बस ऑनर्स
एसोसिएशन के अध्यक्ष गोविंद शर्मा बताते हैं कि हमने अपनी समस्याओं के बारे में सरकार को दो-तीन बार अवगत करा चुके हैं। इसमें बस ऑपरेटरों पर मुख्य रूप से लोन की किस्त, ड्राइवर-कंडक्टर तथा हेल्परों के लिए राशन और नकदी की व्यवस्था के अलावा 3 महीने का जो लॉकडाउन के कारण हमने टैक्स नहीं भरा हैं उसकी माफी की मांग है। इसके अलावा हमने शासन से निवेदन किया है कि अगर उसे हमारी मांग गलत लगती हैं तो वह खुद ही बसों का अधिग्रहण कर चलाएं, क्योंकि नए निर्देशों के अनुसार बस ऑपरेटर बसें संचालित नहीं कर सकता, जिसमें 50% यात्री बैठाने का प्रमुख निर्देश है।
पड़ोसी राज्यों ने टैक्स माफ कर दिए
बस ऑपरेटर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष शैलेंद्र सिंह सेंगर ने बताया मध्य प्रदेश में अभी तक टैक्स माफ नहीं किया गया है, जबकि गुजरात, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में टैक्स माफ किए जा चुके हैं। कर्नाटक और दिल्ली सरकार ऑटो चालक के लिए भी तनख्वाह देने की घोषणा कर चुकी हैं। बस ऑपरेटरों को टैक्स के अलावा बस के परिवहन के लिए फिटनेस प्रमाण पत्र, नवीनीकरण अस्थाई अनुज्ञा पत्र यह सब भी बनवाने होंगे।
टैक्स पर चल रहा है चक्रवर्ती ब्याज
जिला बस ऑपरेटर के सचिव सुमित नागर बताते हैं कि कहने को तो सरकार ने टैक्स और दूसरी किस्त को आगे बढ़ा दिया है, परंतु उसमें चक्रवर्ती ब्याज चल रहा है। मतलब हमें टैक्स बाद में भरना है और ब्याज समेत, इस फैसले से कोई भी खुश नहीं है। प्रत्येक बस ऑपरेटर पर लॉक डाउन में बस नहीं चलने के कारण 4 लाख रुपए का टैक्स का कर्ज हो चुका है। इसके अलावा इन महीनों में बिजनेस नहीं हुआ उसका घाटा और बस कंडक्टर का खर्चा अलग हैं इसलिए कोई भी बस ऑपरेटर वर्तमान में जब तक टैक्स माफ नहीं होता बस संचालित करने की इच्छा नहीं रखता हैं, क्योंकि बिना परमिट से चालान अलग से कटेगा।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/ujjain/shajapur/news/bus-operators-have-not-paid-for-three-months-tax-is-why-all-the-buses-are-without-permits-127386905.html
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